प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साक्षात्कार में कहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक में खतरा था, मुझे इसकी कामयाबी से ज्यादा फिक्र जवानों की सुरक्षा को लेकर थी. मैंने जवानों को संदेश भेजा था कि हर हाल में सुबह होने से पहले वापस आ जाना. साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश लाने के बारे में अदालती प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही विचार किया जाएगा. तीन तलाक पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही सरकार अध्यादेश लाई थी.
एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जब पूछा गया कि क्या भाजपा राम मंदिर मुद्दे को भावनात्मक मुद्दे के तौर पर उठाती है? तो उन्होंने कहा कि हमने भाजपा के घोषणा-पत्र में भी कहा है कि इस मुद्दे का हल संविधान के दायरे में रहकर ही निकल सकता है, अदालती प्रक्रिया खत्म होने दीजिए. जब अदालती प्रक्रिया खत्म हो जाएगी, उसके बाद सरकार के तौर पर हमारी जो भी जवाबदारी होगी, हम उस दिशा में सारी कोशिशें करेंगे. इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि जो लोग 70 साल सत्ता में रहे, उन्होंने अयोध्या मुद्दे का हल निकालने के रास्ते में खलल पैदा करने की पूरी कोशिशें कीं. मैं कांग्रेस से अनुरोध करता हूं कि देश में शांति और एकता के लिए उन्हें अपने वकीलों को अयोध्या विवाद पर खलल पैदा करने से रोकना चाहिए. कांग्रेस के वकील फैसले में खलल पैदा कर रहे हैं, इसलिए अदालती कार्यवाही धीमी हो गई है. अदालती प्रक्रिया को अपना रास्ता तय करने देना चाहिए, इस मुद्दे को राजनीतिक तराजू में नहीं तौलना चाहिए.
मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में कहा कि- उड़ी हमले में जवानों को जिंदा जलाए जाने के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई गई थी. पर जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसकी तारीख दो बार बदली गई थी. मेरे और सेना के भीतर ही भीतर एक गुस्सा पनप रहा था, मैंने जवानों को भेजे संदेश में कहा था कि मिशन की कामयाबी या नाकामी के बारे में मत सोचना, किसी भी प्रलोभन में मत आना और सुबह होने से पहले हर हाल में वापस आ जाना. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान सीमा पार से हमले क्यों करता है? सवाल पर मोदी ने कहा- एक लड़ाई से पाकिस्तान सुधर जाएगा, यह सोचना बहुत बड़ी गलती होगी, पाकिस्तान को सुधरने में अभी और समय लगेगा.
आरबीआई के गवर्नर रहे उर्जित पटेल के इस्तीफा पर मोदी ने कहा कि निजी कारणों के चलते पटेल खुद पद छोड़ना चाहते थे, मैं इस बारे में पहली बार यह खुलासा कर रहा हूँ. उन्होंने इस्तीफे से छह-सात महीने पहले ही मुझे इस बारे में बताया था और लिखित में भी अपनी इच्छा जताई थी. उन पर किसी तरह के राजनीतिक दबाव का कोई सवाल ही नहीं, उन्होंने RBI गवर्नर के रूपमें अच्छा काम किया.
तीन राज्यों में भाजपा की चुनावी हार पर मोदी ने कहा कि तेलंगाना और मिजोरम में भाजपा सत्ता में आएगी, ऐसी बात कोई नहीं कह रहा था, छत्तीसगढ़ में साफ-साफ हमारी हार हुई. बाकी के दोनों राज्यों में हंग असेंबली है. 15 साल की एंटी इन्कम्बेंसी को लेकर हम चुनाव में उतरे थे, लेकिन पिछले दिनों हरियाणा में स्थानीय निकायों में हम जीते, जम्मू-कश्मीर के निकाय चुनाव में भाजपा से जुड़े लोग जीते. जीत और हार, यही एक मानदंड नहीं होता है.
तीन राज्यों में हार के बाद कांग्रेस मुक्त भारत के सपने पर मोदी ने कहा कि- कांग्रेस एक कल्चर लाई थी- परिवारवाद, जातिवाद, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावादी. मैं जब कांग्रेस मुक्त भारत की बात करता हूं, तब मैं इस तरह की संस्कृति से मुक्त होने की बात करता हूँ. कांग्रेस को भी इस कल्चर से मुक्त होना पड़ेगा, दुर्भाग्य है कि देश में आज एक मजबूत विपक्ष नहीं है.
क्या मोदी मैजिक कम हुआ है? सवाल पर कहा कि जो लोग कहते हैं कि अब मोदी लहर काम नहीं करेगी, वे एक तरह से मोदी मैजिक या मोदी लहर की बात को स्वीकार ही करते हैं. जहां तक मेरा सवाल है, लहर सिर्फ जनता की आशा और आकांक्षाओं की होती है, लहर सिर्फ जनता के विश्वास की होती है. आज हिंदुस्तान में विश्वास पनपा है, आज युवा पीढ़ी की आकांक्षाएं हैं. भाजपा को लोकसभा चुनाव में 543 में से 180 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी राजनीतिक विश्लेषकों के इस आकलन को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक वे लोग ऐसी बड़ी-बड़ी बातें नहीं करेंगे, तब तक उनके गठबंधन से लोग जुड़ेंगे कैसे? । क्या इसका कोई साइंटिफिक अनुमान है? 2013 में भी इसी प्रकार के लॉजिक दिये जाते थे.
मोदी-शाह का 2014 वाला कॉम्बिनेशन क्या 2019 में काम कर पाएगा? सवाल पर कहा कि- जो लोग कहते हैं कि भाजपा नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कारण चलती है, वे हमारी पार्टी को नहीं जानते. भाजपा दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संगठन है. हम पोलिंग बूथ की मजबूती पर चलते हैं, एक या दो लोग भाजपा नहीं चलाते. जो लीग कहते हैं कि भाजपा हार रही है, उन्हें असम, त्रिपुरा, हरियाणा के नतीजे देखने चाहिए. मनोबल कम होने का कोई कारण ही नहीं है, 2019 में भी जनता हम पर ही भरोसा करेगी.
किसानों के लिए आपने कुछ नहीं किया और राहुल के कर्ज माफी के वादे को लॉलीपॉप कहते हैं? के जवाब में PM ने कहा- सभी किसानों का कर्ज माफ करने के झूठे वादे को मैंने लॉलीपॉप कहा था. भारत सरकार ने बैंकों से रुपए लूटकर मौज करने वालों के खिलाफ कानून बनाया, तीन लाख करोड़ रुपए हम वापस लेकर आए हैं. अगर कर्ज माफी से किसानों के जीवन के सारे दर्द दूर होते हैं, तो बिल्कुल करना चाहिए. 2008 में भी चुनाव जीतने के लिए कर्ज माफी हुई, लेकिन क्या किसानों के दुख दूर हुए? उपाय यही है कि बीज से बाजार तक किसानों को मजबूत किया जाए. किसान कर्जदार होता क्यों है? इस पर सोचने की जरूरत है, किसानों की कई सालों से मांग थी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना दिया जाए. हमने 21 फसलों में इसे लागू किया. कर्ज माफी से कितने किसानों को फायदा होता है? ज्यादातर किसान साहूकारों से लोन लेता है, जबकि कर्ज माफी की सरकार की योजना में वह नहीं आता.
क्या नोटबंदी झटका नहीं थी? सवाल पर कहा कि- ये झटका नहीं था, एक सफाई की जरूरत थी. एक साल से हम कहा रहे थे कि आपके पास कालाधन है तो आप जमा कराइए, लोगों ने सोचा कि पहले की सरकारों की तरह मोदी भी वैसा ही होगा. काफी कम लोग आगे आए, एक साल प्रक्रिया चली, बार-बार कहा गया, इसके बाद यह कदम उठाया गया. यह देश के आर्थिक व्यवस्था के लिए जरूरी था, जब ट्रेन भी पटरी बदलती है तो उसकी रफ्तार कम होती ही है. मनमोहन सिंह जी जब आर्थिक सुधार लाए, तब भी GDP घटा था. देश में पैरेलल इकोनॉमी चल रही थी, उद्योगपतियों, व्यापारियों, बाबुओं के घर से बोरे भर-भरकर नोट निकलते थे. नोटबंदी से पैसा बैंकिंग व्यवस्था में आया, एक ईमानदारी का माहौल बना है. टैक्स कलेक्शन बढ़ने को क्या आप नोटबंदी की सफलता नहीं मानेंगे?


जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स कहे जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए PM ने कहा कि जिसकी जैसी सोच होती है, उसकी वैसी राय होती है, इसमें मेरा उलझना ठीक नहीं होगा. सभी राजनीतिक दलों ने अच्छी व्यवस्था का समर्थन किया था, संसद ने आम सहमति से इसे पारित किया था. GST पर क्या सभी दलों की सर्वसम्मति नहीं थी? इससे पहले टैक्स रेट क्या था? 30 से 40 प्रतिशत टैक्स वाली चीजें थीं, बार-बार टैक्स लगता था. GST के कारण यह सरल हुआ, 500 से ज्यादा चीजें जीरो टैक्स रेट में आईं. GST काउंसिल में कांग्रेस के भी मंत्री हैं, क्या वे अपनी ही पार्टी के लोगों को गाली दे रहे हैं?
विजय माल्या और नीरव मोदी को वापस नहीं ला पाने के सवाल पर कहा कि- सवाल यह है कि आखिर उन्हें भागना क्यों पड़ा? उन लोगों को इसलिए भागना पड़ा, क्योंकि यहां उन्हें पाई-पाई चुकानी पड़ेगी. जो लोग भागे हैं, उनके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून होते हैं. ऐसे भगोड़ों की संपत्ति जब्त करने का हमने कानून बनाया है और एक दिन हम ऐसे लोगों को वापस ले आएंगे.
अपने प्रतिबद्ध वोटर मिडिल क्लास, बिजनेस क्लास के राहत के लिए क्या किया? सवाल पर PM ने कहा कि- मिडिल क्लास के बारे में हमें सोच बदलनी होगी, यह स्वाभिमान से जीने वाला वर्ग है. देश चलाने में उसका सबसे बड़ा योगदान है. मिडिल क्लास की चिंता हमारा दायित्व है, महंगाई काबू होती है तो मध्यमवर्ग को सबसे पहले राहत मिलती है. हायर एजुकेशन में सीटें बढ़ती हैं तो इसी वर्ग को सबसे ज्यादा फायदा मिलता है. इसी वर्ग के लोग सस्ती हवाई सेवा में ट्रेवल कर रहे हैं.
2जी, सीडब्ल्यूजी जिनका जिक्र आप करते थे, उनके आरोपी आज भी खुले आम घूम रहे हैं? के जवाब में कहा कि कुछ लोग जमानत पर भी हैं. इस देश में जिसे प्रथम परिवार कहा जाता था, वह भी आज पैसों की हेराफेरी के मामले में ही जमानत पर है. इस देश के पूर्व वित्त मंत्री को अदालत के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, यह कोई छोटी बात नहीं है. वैसे कोई भाजपा का विरोधी है, इसलिए उसे तकलीफ हो, हम इस सोच के पक्षधर नहीं हैं. अगर कल मोदी गलत करे तो मोदी को भी भुगतना होगा.
मॉब लिंचिंग पर मोदी ने कहा कि- ऐसी कोई भी घटना सभ्य समाज को शोभा नहीं देती है. ऐसी घटनाओं के पक्ष में कभी भी आवाज नहीं उठनी चाहिए. वैसे क्या यह 2014 के बाद शुरू हुआ है. यह समाज के अंदर आई एक कमी का फैलाव है. इस स्थिति को सुधारने के लिए हमें मिलकर प्रयास करना चाहिए. अरब देश के एक बहुत बड़े विद्वान ने कहा है कि “हिंदुस्तान में कई संप्रदायों के लोग हैं, लेकिन वहां सभी लोग मिल-जुलकर रहते हैं. हम लोग एक ही समुदाय हैं, तब भी यहां लड़ाइयां होती हैं.” हर चुनाव के पहले लोगों को असहिष्णुता दिखने लग जाती है. 18 हजार गांवों में बिजली पहुंची, सौभाग्य योजना पहुंची, हमने यह नहीं पूछा कि किस समुदाय के लोग हैं.
महागठबंधन बढ़ता जा रहा है? चंद्रबाबू नायडू कहते हैं कि केसीआर के गठबंधन को मोदीजी समर्थन दे रहे हैं? सवाल पर कहा कि- केसीआर गठबंधन बना रहे हैं, यह मेरे सामने अभी नहीं आया है. वैसे तेलंगाना में जिस तरह से महागठबंधन का हाल बेहाल हुआ, उससे उनकी पीड़ा झलकती है. आखिर महागठबंधन क्यों बन रहा है? 5 साल हो गए इस महागठबंधन ने देश के सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर कुछ कहा है क्या? अभी भी उनके यहां कई सुर निकलते हैं. ये लोग एक-दूसरे को सहारा देकर बचने की कोशिश कर रहे हैं, उनका एकमात्र एजेंडा मोदी है. 2019 का चुनाव जनता बनाम महागठबंधन होगा, मोदी तो केवल जनता के प्यार और आशीर्वाद का नाम है.
एनडीए के साथियों के सवाल पर कहा कि 2014 में जितने दल थे, उससे ज्यादा दल अब हमारे साथ जुड़ रहे हैं. सीधे मायावती के सवाल पर कहा कि- कौन जुड़ रहा है और कौन नहीं, इसका जिक्र कोई भी टीवी के सामने नहीं करेगा. ‘चौकीदार चोर है” उद्धव के इस जुमले पर कहा कि हमें पूर्ण बहुमत मिला, गठबंधन का धर्म है, सबके साथ विचार-विमर्श करके हम निर्णय लेते हैं. साथी दल भी तरक्की करें यह उनकी इच्छा है, हम भी यही चाहेंगे. जम्मू-कश्मीर में गठबंधन के लोगों ने तय किया चुनाव का बहिष्कार करेंगे, जनता ने रिकॉर्ड वोट दिए. त्रिपुरा में भी भाजपा जीती, गठबंधन हारा. महागठबंधन में जो लोग हैं, वे कांग्रेस से कभी ना कभी निकले थे और उनके विरोध से पैदा हुए.
दक्षिण भारत में क्या किसी के साथ मिलकर अपना जनाधार बढ़ाएंगे? सवाल पर कहा कि गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र में हमारी सरकार है, हम दक्षिण में हैं. लोग कहते हैं कि भाजपा उच्च वर्ण की पार्टी है, लेकिन PM से लेकर नीचे तक सबका वर्ण क्या क्या है, यह मैं बोलना नहीं चाहता हूँ. हमें शहरी पार्टी बना दिया गया, इतनी बड़ी पार्टी केवल शहरी रहती तो वहीं तक रह जाते, यह पुराने जमाने की सोच है. भाजपा का विधायक हर जगह है, हम लगातार अपनी पार्टी में विस्तार कर रहे हैं. जो हमारे साथ चलना चाहते हैं और जिसके साथ हम चल सकते हैं, उन सभी के साथ चलेंगे.
विपक्षियों के आरोप कि भाजपा सरकार संस्थानों में हस्तक्षेप कर रही है? सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि कांग्रेस को तो यह बोलने का कोई हक ही नहीं है. PM और PMO के खिलाफ आपने NAC बना दिया था. कैबिनेट के निर्णय को पार्टी का नेता कॉन्फ्रेंस में फाड़ दे, यह किस इंस्टिट्यूशन का सम्मान है? RBI में कई बार गवर्नरों को बाहर निकलना पड़ा, आपने प्लानिंग कमीशन का असम्मान किया था. CBI का आंतरिक मामला आया तो सरकार ने कहा कि आप दोनों छुट्टी पर जाएं. RBI मामले में गवर्नर ने निजी कारणों से इस्तीफा दिया, वह 6 महीने से मुझसे कह रहे थे. इसमें कोई राजनीतिक दबाव होने का सवाल ही नहीं उठता. सोहराबुद्दीन केस का फैसला आया, किस तरह से इन लोगों ने संस्थानों का दुरुपयोग किया है, वह सब इसमें लिखा है. ईडी की बात करें तो वह प्रोफेशनली अपना काम कर रहा है, विदेश से कोई राजदार भारत में आता है तो इस पर गर्व होना चाहिए. आप अपनी पार्टी के वकील के माध्यम से उसकी मदद को पहुंच जाते हैं.



loading…

Loading…






Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *