राम मंदिर निर्माण पर अपना रुख साफ करें राहुल गांधी : अमित शाह

 74 


भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अयोध्या में राम जन्मभूमी मंदिर निर्माण पर पार्टी का रुख स्पष्ट करने को कहते हुए पूछा है कि कांग्रेस मंदिर निर्माण पर सहमत है या 2019 तक इसका निर्माण टालना चाहती है?
शाह ने कांग्रेस नेता एवं ऑल इंडिया सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल की दलीलों के आधार पर यह सवाल किया है। जिसमें सिब्बल ने दलील रखी है कि जुलाई 2019 तक अर्थात जब तक आगामी लोकसभा चुनाव सम्पन्न नहीं हो जाते, तब तक इस केस की सुनवाई टाल देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस किसी विवादित मुद्दे पर अलग प्रकार का स्टैंड लेना चाहती है, तब कपिल सिब्बल को आगे कर देती है। उन्होंने कहा कि 2जी घोटाला हुआ तब भी जीरो लॉस की थ्योरी लेकर कपिल सिब्बल ही आगे आए थे।
गुजरात में जब आरक्षण का मसला सामने आया तब भी 50 फीसद से ज्यादा आरक्षण संभव है, ऐसा एक विचार लेकर कपिल सिब्बल ही आए थे और अब जब कांग्रेस को श्रीराम जन्मभूमि केस के रास्ते में रोड़े अटकाने हैं, तब भी कपिल सिब्बल ही कांग्रेस पार्टी की ओर से सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील के रूप में सामने हैं। कांग्रेस को इस विषय पर अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए कि वह श्रीराम जन्मभूमि केस की जल्द सुनवाई पर सहमत है या नहीं। या फिर कांग्रेस पार्टी भी चाहती है कि 2019 के आम चुनाव तक श्रीराम जन्मभूमि केस की सुनवाई न हो। शाह ने कहा कि जब सम्पूर्ण दस्तावेजों का अनुवाद हो चुका है और केस की सुनवाई तीन जजों की बेंच करेगी तो सुनवाई रोकने से क्या हासिल होगा।

अमित शाह ने कहा कि भाजपा मांग करती है कि कांग्रेस पार्टी इस विषय पर अपना अधिकृत स्टैंड स्पष्ट करे। उन्होंने कहा कि गुजरात में चुनाव चल रहे हैं, राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बनने वाले हैं, वह गुजरात में मंदिर-मंदिर जाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। एक ओर गुजरात में राहुल गांधी के मंदिरों के चुनावी दौरे चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि केस पर सुनवाई को टालने के लिए कपिल सिब्बल का उपयोग किया जा रहा है।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के सवालों पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस चाहती है कि अदालत राम मंदिर मामले में जल्द फैसला करे। भाजपा राम मंदिर के नाम पर राजनीति कर रही है। कांग्रेस अदालत के आदेश को मानती है और केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने संसद में और भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में भी यही बात कही है।
सुरजेवाला ने भाजपा पर राम मंदिर को सत्ता का साधन बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्मोही अखाड़े ने राममंदिर को लेकर पहला केस 1885 में किया था, जबकि भाजपा व विहिप ने 1990 में इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया। भाजपा ने राम का सत्ता के लिए उपयोग किया है। वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने खुद कहा था कि राममंदिर आस्था का प्रतीक है और कोई अदालत इस पर फैसला नहीं कर सकती। भाजपा पहले गठबंधन सरकार की मजबूरी जताते रहे, लेकिन अब पूर्णबहुमत होने के बाद भी राममंदिर नहीं बनवा रहे हैं।

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें


loading...


Loading...





Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *