तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है, तो तीन तलाक का मुद्दा आस्था का विषय क्यों नहीं हो सकता है। मुस्लिम समाज में तीन तलाक 1400 साल से जारी है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को काफी पहले ही अधिकार दिये हुए हैं। तीन तलाक परिवार और पर्सनल लॉ संविधान के तहत हैं। यह व्यक्तिगत आस्था का विषय है। कपिल सिब्बल ने ये जवाब तब दिया, जब जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कपिल सिब्बल से पूछा कि क्या कोई ई-तलाक जैसी भी चीज है।
सिब्बल ने कहा कि कोर्ट को किसी की आस्था और विश्वास को न तो तय करना चाहिए और न ही उसमें दखल देना चाहिए। इस पर जस्टिस आर। एफ नरीमन ने सिब्बल ने पूछा, ‘क्या आप यह कहना चाहते हैं कि हमें इस मामले पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए?’ जवाब में सिब्बल ने कहा, ‘हां, आपको नहीं करनी चाहिए।’

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 5 सदस्यीय संविधान पीठ से कहा, “अगर अदालत तुरंत तलाक (तीन तलाक) के तरीके को खारिज कर देती है, तो केंद्र सरकार मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक से जुड़ा एक नया कानून लाएगी।”
इससे पहले सोमवार को तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो तीन तलाक के साथ-साथ बहुविवाह और निकाह हलाला की भी समीक्षा करेगा, लेकिन कोर्ट अभी तीन तलाक पर ही अपनी सुनवाई करेगा। सोमवार को सरकार की तरफ से पेश मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से इसकी मांग की थी।ताज़ा अपडेट पाने के लिए हमारे पेज को लाइक करें

loading…



Loading…




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *