रामसेतु पर अमेरिकी वैज्ञानिकों ने लगायी मुहर

 67 


अमेरिकी भूगर्भ वैज्ञानिकों की एक टीम ने रामसेतु स्थल के पत्थरों और बालू के सैटेलाइट से मिले चित्रों का अध्ययन करने के बाद रामसेतु के अस्त‍ित्व के दावे को सच बताया है. भले ही भारत में राजनीतिक लोग अपने नफे- नुकसान के हिसाब से लगातार इसपर बयानबाजी करते रहे हों जो आज भी जारी है.
वैज्ञानिकों ने इसको एक सुपर ह्यूमन एचीवमेंट बताते हुए कहा है कि भारत-श्रीलंका के बीच 30 मील के क्षेत्र में बालू की चट्टानें पूरी तरह से प्राकृतिक हैं, लेकिन उन पर रखे गए पत्थर कहीं और से लाए गए प्रतीत होते हैं, जिनकी उम्र सात हजार साल से भी पुरानी लगती हैं.

देश के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अमेरिकी रिसर्च रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि हजारों वर्षों से राम का जीवन इस देश के कण-कण में है. अब विज्ञान ने भी पुष्टि की है. रामसेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले गलत साबित हुए हैं. प्रसाद ने कहा कि हम पहले से कहते रहे हैं कि रामसेतु आस्था का विषय होने के साथ ही एक सांस्कृतिक विरासत है. उसके साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए.
गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि अमेरिकी रिसर्च रिपोर्ट आने के बाद उन लोगों को जवाब मिला, जिन्होंने रामसेतु पर सवाल उठाए. भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि रामसेतु पर राहुल गांधी को अपना स्टैंड साफ करना चाहिए.
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला का कहना है कि रामसेतु तो पहले से है. हम सब उसको मानते हैं. यह लोग तो भ्रम फैला रहे हैं. रामसेतु के ऐतिहासिक तथ्य को हम मानते हैं.

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें


loading...


Loading...