राफेल पर सुप्रीम कोर्ट से झटका खाई कांग्रेस और ज्यादा आक्रामक हो चुकी है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद पार्टी के लोकसभा में नेता एवं लोक लेखा समिति के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता “अधिवक्ता” कपिल सिब्बल ने अलग- अलग केंद्र सरकार पर हमला बोला है. उधर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को फ्रांस के साथ राफेल विमान सौदा मामले में प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ ‘निर्लज्ज झूठ’ बोलने के लिए माफी मांगनी चाहिए.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सवाल खड़ा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दी ही कहां है? सुप्रीम कोर्ट ने फाइलें मंगवाई ही नहीं, नोटिंग देखी ही नहीं, तो फिर कहना कि ‘क्लीन चिट’ मिल गया, बचकानी बात है. सुप्रीम कोर्ट ने जब तकनीकी पक्ष और राफेल डील की प्राइसिंग की जांच ही नहीं की तो सरकार जीत का दावा कैसे कर रही है? कांग्रेस पार्टी इस मामले में कभी भी कोर्ट में पार्टी नहीं थी और हम पहले ही कह चुके हैं कि इसपर फैसला लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट उचित फोरम नहीं है क्योंकि सभी फाइलें वहां खोली ही नहीं जा सकती हैं, सुप्रीम कोर्ट के पास इसका अधिकार नहीं है.
सिब्बल ने कहा कि SC ने फैसले के 12वें, 15वें और 34वें पैरे में कहा है कि उसका अधिकार क्षेत्र सीमित है. कोर्ट ने कहा है कि हम कीमतों और तकनीक पर फैसला नहीं कर सकते हैं. राफेल में कथित भ्रष्टाचार, कीमत, तकनीक आदि की तकनीकी तौर पर क्या सही है, यह हम तय नहीं कर सकते हैं. हमें अटर्नी जनरल को पीएसी में बुलाकर पूछना चाहिए कि गलत हलफनामा कोर्ट में क्यों दिया गया? AG से पूछा जाएगा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया?
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता खड़गे ने कहा कि मैं लोक लेखा समिति के सभी सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि अटॉर्नी जनरल और सीएजी को यह बात पूछने के लिए तलब करें कि राफेल सौदे पर सीएजी की रिपोर्ट कब संसद में पेश की गई. अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट में इस तरह से पक्ष रखा कि न्यायालय को यह महसूस हुआ कि कैग रिपोर्ट संसद में पेश हो गई है और पीएसी ने रिपोर्ट देख ली है. जब पीएसी जांच करती है तो साक्ष्यों को देखती है. लेकिन न्यायालय को गलत जानकारी दी गयी और जिसके आधार पर गलत निर्णय आया. इसलिये हम जेपीसी की मांग कर रहे हैं ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके.
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील की याचिकाओं को खारिज करते हुए राफेल की कीमत पर कहा था कि कीमत से जुड़े विवरण सीएजी से साझा किए जा चुके हैं और सीएजी की रिपोर्ट की जांच-परख पीएसी कर चुकी है. शुक्रवार को पीएसी मामले पर राहुल गांधी ने कहा था कि हो सकता है मोदीजी ने अपनी पीएसी प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठा रखी हो.


सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अप्रत्याशित रूप से कांग्रेस के खिलाफ जाते हुए कहा कि राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आखिरी है. इस पर टिप्पणी करना अब ठीक नहीं है. पर अब भी अगर किसी को कुछ कहना है तो उसे अपनी बात सुप्रीम कोर्ट में ही रखनी चाहिए. मामले में कांग्रेस द्वारा JPC की मांग पर अखिलेश ने कहा कि यह मांग तब थी जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आया था. बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इसपर कोई भी बात करने से इन्कार कर दिया था. उन्होंने यह कहा कि रक्षा सौदे में विपक्ष को भी शामिल करना ठीक होगा.
भाजपा अध्यक्ष अमित ने शाह ने राफेल विमान सौदा मामले में प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ ‘निर्लज झूठ’ बोलने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा माफी मांगने तथा सूचना के स्रोतों के बारे में खुलासा करने की मांग की है. शाह ने कहा कि अदालत ने माना है कि पड़ोसी देशों की वायुसेना चौथे और पांचवी पीढ़ी के विमानों से लैस है. इसलिए देश के हित में विमानों की खरीद में कोई देरी नहीं होनी चाहिए और इसे रोका नहीं जाना चाहिए. यह फैसला कांग्रेसी नेताओं के मुंह पर तमाचा है.
उधर भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिश कर रहे हैं, यह घोर निंदनीय है. पाकिस्तान की अदालतों पर वह भरोसा कर सकते हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट पर उन्हें भरोसा नहीं है, इमरान खान और हाफिज सईद पर उन्हें विश्वास है लेकिन भारतीय आर्मी पर नहीं. भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि अगर उन्हें रिपोर्ट नहीं मिली तो कोर्ट में जाकर एफिडेविट या रिव्यू पीटिशन दायर करें.
भाजपा अब कांग्रेस के खिलाफ सोमवार को देशभर के सत्तर शहरों में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर केंद्र सरकार के खिलाफ षड्यंत्र रचने और देश की रक्षा के साथ गड़बड़ी करने के लिए कांग्रेस को घेरेगी. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता इसके लिए तैयारियों में जुट गए हैं. यह आयोजन उसी दिन होगा, जिस दिन कांग्रेस पार्टी के राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार बनाने का जश्न मना रही होगी.



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