सर्वोच्च न्यायालय ने 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर फ्रांस के साथ हुए सौदे की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि राफेल की खरीद-फरोख्त प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है. केंद्र के 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना सही नहीं है, सौदे पर कोई संदेह नहीं है.
देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस रंजन गोगोई ने सुनवाई के दौरान कहा कि विमान की क्षमता में कोई कमी नहीं है. इसके साथ ही कोर्ट ने सौदे को लेकर दायर की गई सभी जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया. इस फैसले से राफेल सौदे पर लगातार विपक्ष के आरोपों का सामना कर रही मोदी सरकार को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट का फैसला कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार राफेल को Big Scam कहते आए हैं. पूरी कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार का घेराव करते हुए राफेल डील में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाती रही है.
न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सौदे की खरीद प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है. कोर्ट ने कीमत के मुद्दे पर सरकार की ओर से दिए गए आधिकारिक जवाब को रिकार्ड कर कहा कि कीमतों की तुलना करना कोर्ट का काम नहीं है. कोर्ट ने कहा कि डील पर किसी भी प्रकार का कोई संदेह नहीं है, वायुसेना को ऐसे विमानों की जरूरत है और मोटे तौर पर प्रक्रिया का पालन किया गया है. कोर्ट सरकार के 36 विमान ख़रीदने के फ़ैसले मे दख़ल नहीं दे सकता.
सरकार ने भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 58,000 करोड़ रुपये में दो इंजन वाले 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए फ्रांस के साथ समझौता किया, जिसका निर्माण फ्रांस की सरकारी कंपनी दसाल्ट एविशन करती है. राफेल सौदे के कीमत को सार्वजनिक करने की मांग का विरोध करते हुए केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि 2016 के एक्सचेंज रेट के मुताबिक खाली राफेल जेट की कीमत 670 करोड़ रुपये है. लेकिन, पूरी तरह से हथियारों से लैस राफेल विमान की कीमत को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे देश के दुश्मन फायदा उठा सकते हैं.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हम सरकार को 126 विमान खरीदने पर विवश नहीं कर सकते. कोर्ट ने केंद्र सरकार को राफेल डील में क्लीन चिट देते हुए कहा कि पसंद का ऑफसेट पार्टनर चुने जाने में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है, और व्यक्तिगत सोच के आधार पर रक्षा खरीद जैसे संवेदनशील मामलों में जांच नहीं करवाई जा सकती.
कोर्ट ने कहा कि हमें ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली, जिससे लगे कि कमर्शियल तरीके से किसी खास कंपनी को लाभ दिया गया. हम इस बात से संतुष्ट हैं कि प्रक्रिया पर संदेह करने का अवसर नहीं है. कोई भी देश पूरी तैयारी के बिना रहने का खतरा नहीं उठा सकता. इसमें कोई शक नहीं कि विमान हमारी ज़रूरत हैं और उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल नहीं है. हमें 4th और 5th जनरेशन के विमानों की ज़रूरत है, जो हमारे पास नहीं है. विमान सौदे की निर्णय प्रक्रिया सही है. राफेल सौदे में कोर्ट के हस्तक्षेप की कोई वजह नहीं है.


याचिकाकर्ताओं प्रशांत भूषण, एमएल शर्मा, विनीत ढांडा, आप नेता संजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने सौदे में अनियमितता का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट से CBI को जांच के लिए FIR दर्ज करने के निर्देश देने की अपील की थी. फैसले से नाखुश प्रशांत भूषण ने कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए सवाल उठाया कि वायुसेना ने कभी ने नहीं कहा कि उसे 36 राफेल चाहिए. वायुसेना से बिना पूछे मोदी जी ने फ्रांस में जाकर समझौता कर लिया और तय कीमत से ज्यादा पैसा दे दिया. हमारे हिसाब से राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिल्कुल गलत है. हम इस बात पर विचार करेंगे कि हमें पुर्निविचार याचिका दायर करनी है या नहीं?
कोर्ट के फैसले पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आज सत्य की जीत हुई. आज सिद्ध हो गया कि चोर-चोर वही चिल्लाते हैं जिनको चौकीदार का भय होता है. कांग्रेस पार्टी के काल्पनिक जगत में सच और न्याय की कोई जगह नहीं है. सवाल कांग्रेस पार्टी खड़े करती है, वकील भी वही हैं और न्यायाधीश भी वही है. कांग्रेस पार्टी देश के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर सवाल खड़ा कर रही है. देश की आज़ादी के बाद से एक कोरे झूठ के आधार पर देश की जनता को गुमराह करने का इससे बड़ा प्रयास कभी नहीं हुआ और सबसे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि यह प्रयास देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष के द्वारा किया गया. कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने और अपनी पार्टी के तत्काल फायदे के लिए झूठ का सहारा लेकर चलने की एक नई राजनीति की शुरुआत की है. राहुल गांधी देश की जनता को जवाब दें कि वो किस आधार पर देश की जनता को गुमराह कर रहें थे? क्या राहुल ने राजनैतिक फायदे के लिए देश से झूठ बोला? राहुल अपनी जानकारी का स्त्रोत बताए? क्या कांग्रेस ने कमीशन के लिए डील रोकी थी ? और कोर्ट में राहुल गांधी याचिकाकर्ता क्यों नहीं बने?
UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे कांग्रेस पार्टी का झूठ बेनकाब हो गया. राजनीतिक लाभ उठाने के लिए केन्द्र सरकार को बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने झूठ बोलकर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया है. कांग्रेस पार्टी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए.
महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि- फैसला साफ कर देता है कि कांग्रेस पार्टी और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी झूठ बोल रहे थे. राहुल ने वैश्विक रूप से देश को बदनाम किया है और अब उन्हें माफी मांगनी चाहिए. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मामला पहले से बिल्कुल स्पष्ट था. हम पहले से कह रहे थे कि कांग्रेस राजनीतिक फायदा उठाने के लिए आधारहीन आरोप लगा रही है. भाजपा नेता राम माधव ने कहा कि- अब गलत प्रचार के लिए राहुल गांधी और विपक्ष को देश की जनता के सामने जाकर उनसे माफी मांगनी चाहिए. शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि- SC ने कहा है कि इसमें कुछ गलत नहीं है, कीमत SC का विषय नहीं है. ठीक वैसे ही राम मंदिर निर्माण भी उनका विषय नहीं है.
फैसले का स्वागत करते हुए अनिल अंबानी ने कहा कि रिलायंस ग्रुप और मेरे खिलाफ जितने भी आरोप लगाए गए थे सभी आधारहीन और राजनीति से प्रेरित थे. राफेल मामले में हम राष्ट्र सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. शुरू में ही अंबानी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को आधारहीन और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा था कि सचाई की जीत होगी. क्योंकि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह दुर्भावनापूर्ण, निहित स्वार्थ और कंपनी प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित है.
कांग्रेस अब बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है और उसने JPC की मांग फिर उठाना शुरू कर दिया है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि- हमने पहले ही कहा था कि इस तरह के संवेदनशील रक्षा मामलों पर फैसला लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट मंच नहीं है. कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम मुद्दों पर गौर नहीं किया है, हम इस मामले में जेपीसी की मांग करते रहेंगे. जेपीसी को तमाम दस्तावेज मंगाने का अधिकार है. तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राॅय ने भी कहा कि हम संयुक्त संसदीय कमेटी (JPC) की मांग कर रहे हैं.



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