रडार की पकड़ में ना आने वाली INS ‘करंज’ पानी में उतरी

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भारत की स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस करंज को मुंबई के मझगांव डॉक पर नौसेना में शामिल कर लिया गया. इस दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा भी मौजूद थे.
इस पनडुब्‍बी का निर्माण मझगांव डॉकयार्ड ने फ्रांस के सहयोग से किया हैं. आधुनिक तकनीक से बनी ये पनडुब्बी कम आवाज से दुश्मन के जहाज को चकमा देने में माहिर है. अत्याधुनिक तकनीक और सटीक निशाने वाली करंज मेक इन इंडिया के तहत बनाई गई स्वदेशी पनडुब्बी है. जिससे चीन और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
इसका निर्माण मझगांव डॉकयार्ड ने फ्रांस के सहयोग से किया हैं. आधुनिक तकनीक से बनी ये पनडुब्बी कम आवाज से दुश्मन के जहाज को चकमा देने में माहिर है. इसमें तारपीडो जैसे हथियार भी लगे हैं जो दुश्मन के जहाज या पनडुब्बी को मार गिराने में सक्षम हैं. साथ ही इसमे दुश्मन के इलाके की निगरानी करने के लिए यंत्र लगे हुए हैं. इस क्लास की कुल 6 पनडुब्बी मझगांव डॉकयार्ड में बनेगी जो 2020 तक नौसेना में शामिल हो जाएगी.
करंज टारपीडो और एंटी शिप मिसाइल से हमला करती है. रडार की पकड़ में नहीं आती, समंदर से जमीन पर और पानी के अंदर से सतह पर हमला करने में सक्षम है. 67.5 मीटर लंबी, 12.3 मीटर ऊंची और 1565 टन वजन वाली इस पनडुब्बी में ऑक्सीजन भी बनाया जा सकता है. युद्ध की स्थिति में यह दुश्मन के क्षेत्र से चकमा देकर निकलने में सक्षम है. इससे पहले पहली स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को 14 दिसंबर, 2017 को और दूसरी पनडुब्बी खांदेरी को 12 जनवरी 2017 को लॉन्‍च किया गया था.

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