मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को साढ़े नौ बजे अयोध्या पहुंचने के बाद सीएम ने सबसे पहले हनुमानगढ़ी में पूजन और दर्शन क‌िए। इसके बाद रामलला के ल‌िए रवाना हो गए। राम लला के दर्शन करने के बाद सीएम राम की पैढ़ी पहुंचे। यहां उन्होंने सरयू की पूजा और आरती की। योगी के वहां पहुंचते ही जय श्रीराम के नारे लगाए जाने लगे।
मुख्यमंत्री सुबह 8.55 बजे हवाई पट्टी पर पहुंचने से लेकर शाम साढ़े पांच बजे तक के कार्यक्रम को लेकर यहां सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं। खासकर अयोध्या को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विशेष सुरक्षा दस्ता देर शाम कार्यक्रम स्थलों की जांच-पड़ताल में जुटा रहा। सरयू में पीएसी की बाढ़ कंपनी उतारी गई है। जबकि जिले की फोर्स के अलावा छह एएसपी, 14 सीओ, 11 निरीक्षक, 60 उपनिरीक्षक, 6 महिला उपनिरीक्षक, 320 सिपाही, 35 महिला सिपाही, 9 यातायात निरीक्षक, 8 हेड कांस्टेबल यातायात, 37 यातायात आरक्षी समेत भारी संख्या में पीएसी व होमगार्ड की ड्यूटी लगाई गई है।
इसके बाद विवि सभागार में 12 बजे से ढाई बजे मंडल के विकास कार्य और कानून व्यवस्था की मंडलीय समीक्षा बैठक मुख्यमंत्री करेंगे। इसमें मंडल के सांसद, मंत्री और विधायक शामिल होंगे। ढाई बजे एक बार फिर वह अयोध्या के लिए प्रस्थान करेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अयोध्या यात्रा कई संदेश देने के साथ ही सूबे की सियासत के भावी समीकरणों का भी संकेत देगी। यह यात्रा भले ही फैजाबाद मंडल की कानून-व्यवस्था व विकास कार्यों की समीक्षा और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव की वजह से तय हुई हो, लेकिन यह यात्रा यहीं तक सीमित नहीं रहने वाली। इसके राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इसका संबंध भविष्य में योगी की चुनावी यात्रा से भी जुड़ा हो सकता है।
भाजपा का कोई मुख्यमंत्री करीब 17 साल बाद अयोध्या में होगा। अयोध्या की भूमिका भाजपा की ताकत बढ़ाने में महत्वपूर्ण रही है। इसीलिए भगवा टोली के नेताओं के यहां आने के खास अर्थ रहे हैं। सीएम योगी अभी सांसद हैं।
मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें छह माह में विधानसभा या विधान परिषद में से किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। कुछ दिनों से सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि समीकरण साधने और लोकसभा 2019 के मद्देनजर एजेंडे को धार देने के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर योगी की नई कर्मभूमि अयोध्या भी हो सकती है। वे यहां से चुनाव लड़ सकते हैं। साथ ही अयोध्या पर आस्था और इसके महत्व का संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं।

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