जम्मू-कश्मीर की रहने वाली रुवेदा सलाम राज्य की पहली मुस्लिम महिला IPS हैं। रुवेदा एक ऐसी IPS हैं, जो UPSC का एग्जाम करने से पहले डॉक्टर थीं। इन्होंने एक बार नहीं, बल्कि दो बार UPSC का एग्जाम पास किया।
रुवेदा को लोग उनके काम से पहचानते हैं। रुवेदा काम को तो बखूबी निभाती ही हैं साथ ही साथ फिटनेस का भी ध्यान रखती हैं इसके लिए वे दौड़ती हैं और एक्सरसाइज भी करती हैं।
रुवेदा अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए IAS बनीं हैं। उनके पिता उनसे अक्सर कहते थे कि उन्हें एक IAS अफसर बनना है। पिता की बात उन्हें काफी प्रभावित करती थी और इसी से प्रेरणा लेकर रुवेदा ने एक IAS बनने का सपना देखा और उसे पूरा किया।
पोएट्री की शौकीन डॉक्टर रुवेदा ने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री भी ली है। MBBS की डिग्री लेने के बाद उन्होंने मेडिकल में पोस्ट ग्रैजुएशन करने के बजाय एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस को चुना।
2013 में UPSC के लिए क्वालिफाई किया और घाटी की पहली मुस्लिम महिला IPS बनीं। रुवेदा ने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से MBBS करने के बाद 2013 में UPSC की परीक्षा पास कर बतौर असिसटेंट कमिश्नर चेन्नई ज्वाइन किया था।
इंटरव्यू में रुवेदा ने बताया कि उनके बचपन में उनके पापा उन्हें IAS अफसर बनने के लिए कहा करते थे। जिसके बाद उन्होंने IAS अफसर बनने की ठान ली थी। अपने पहले ही अटेंप्ट में रुवेदा ने UPSC की परीक्षा पास करने के बाद IPS कैडर के लिए सेलेक्ट कर हुई थीं और फिर आगे की ट्रेनिंग के लिए उन्हें हैदराबाद भेजा गया था।
2015 में जब UPSC ने 2014 के रिजल्ट अनाउंस किए उसमें रुवेदा की 878 रैंक आई और उनका IAS बनने का सपना पूरा हुआ।
रुवेदा कहती हैं कि ट्रेनिंग का टाईम काफी मुश्किल भरा था। जब जी-20 देशों की समिट होती है तब उसी के साथ एक यूथ-20 का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें हर देश से 5 युवा हिस्सा लेते है और अपने विचार रखते हैं।
2016 में सिडनी में हुए जी-20 समिट में उनका चयन हुआ था जिसमें उन्होंने अपनी बात रखी थी। कश्मीर के बारे में उन्होंने कहा कि जब वह छोटी थी तब कश्मीर में पर्यटक काफी बड़ी मात्रा में आया करते थे, सब अच्छे से चल रहा था। 90 के दशक में कश्मीर के हालात काफी बुरे हो गए। पिछले 5 महीनों से तो हालात बहुत ही बुरे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीरीयत बहुत जरुरी है और कश्मीर मे कश्मीरी पंडितों को वापस बसाना बहुत जरुरी है।

अपनी ट्रेनिंग के कारण पिछले लम्बे समय से वो कश्मीर नहीं गई हैं पर परिवार से उन्हें सारी सूचनाएं मिलती रहती है। अपने खाली टाइम में रुवेदा किताबें पढ़ती हैं। वो अंग्रेजी के मशहूर कवियों रार्बट फ्रॉस्ट और विलियम वर्ड्सवर्थ की तरह कविताएं लिखने का भी शौक रखती हैं। शरीर को फिट रखने के लिए वो दौड़ती हैं और एक्सरसाइज भी करती हैं।
चेन्नई में 8 माह की ट्रेनिंग के बाद वो कहती है कि उनका पेशा मानवता की सेवा करने का है और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो किस राज्य में हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें चेन्नई पसंद है क्योंकि यह काफी सुंदर है।
अपने भविष्य पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि वो अपने जीवन में स्थिरता चाहती हैं। वो समाज के लिए कुछ करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर के बाहर लोगों को लगता है कि कश्मीरी भारत विरोधी हैं और वो कम्पीट नहीं कर सकते। हम ऐसे लोगो की सोच को बदलना चाहते हैं।

ताज़ा अपडेट पाने के लिए हमारे पेज को लाइक करें


loading…

Loading…



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *