मोदी सरकार की योजना; बॉर्डर पर कदम रखते ही घुसपैठियों का होगा खात्मा

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भारत इजरायल में विकसित एक स्मार्ट बाड़ प्रणाली पाकिस्तान से लगी अपनी सीमा पर तैनात कर रहा है, जो CCTV से लैस QRT तंत्र है. घुसपैठ की कोशिश का पता लगने पर नियंत्रण कक्ष द्वारा ही हमला करता है. BSF व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS) की एक महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्यान्वयन कर रहा है.
भारत-पाक एवं भारत-बांग्लादेश सीमाओं को आने वाले कुछ सालों में पूरी तरह सील करने की नरेंद्र मोदी सरकार की योजना का यह हिस्सा है. BSF 6,300 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमाओं की सुरक्षा करता है. BSF के महानिदेशक के के शर्मा के अनुसार नई सीमा सुरक्षा प्रणालियों से पहली बार इस क्षेत्र में एक ‘‘आमूलचूल बदलाव’’ आएगा. इस समय हम सीमा पर एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक गश्त करते हैं. अब हमारी QRT आधारित प्रणाली की तरफ बढ़ने की योजना है और अब तक इस्तेमाल नहीं की गयी कई अन्य नई तकनीकों का भी परीक्षण किया जा रहा है.
शर्मा के अनुसार नई प्रणाली में नए उपकरण एवं तकनीक एकीकृत किए जाएंगे और CCTV कैमरों से फीड सीमा चौकी पर भेजी जाएगी जहां मॉनिटर लगा रहेगा. दो- तीन लोग 24 घंटे इसकी निगरानी करेंगे. अब हमारे पास ऐसे सॉफ्टवेयर हैं जो किसी भी तरह की घुसपैठ या परिस्थिति में बदलाव का पता लगा लेंगे तथा सतर्क कर देंगे.


महानिदेशक के अनुसार एक स्वचालित अलार्म उस सटीक जगह की जानकारी देगा जहां घुसपैठ हो रही है या ऐसी कोई कोशिश की जा रही है या कुछ भी नजर आ रहा है. जानकारी देने वाले अलार्म के बजते ही हम उस जगह पर अंधेरे में काम करने वाले अपने कैमरे को जूम कर देंगे और पता कर लेंगे कि वहां क्या हो रहा है, जिससे हम खतरे से निपटने में सक्षम होंगे.
BSF इस संदर्भ में जम्मू में पांच-पांच किलोमीटर की दो पायलट परियोजनाएं चला रहा है और बाद में चार और सीमा खंडों पर ऐसा किया जाएगा. इनमें से एक-एक पंजाब तथा गुजरात में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा एक-एक पश्चिम बंगाल और धुबरी (असम) में भारत-बांग्ला सीमा में होंगी. नयी प्रणाली के जरिए BSF के जवानों को सीमा पर दिन-रात गश्त करने की जरूरत नहीं होगी, जवान सीमा चौकी पर ही मौजूद होंगे और खतरा नजर आने पर निकलेंगे. उन्होंने कहा कि स्मार्ट बाड़ तथा निगरानी पद्धतियों की यह प्रणाली इजरायल में इस्तेमाल की जा रही अत्याधुनिक तकनीकों में है.
महानिदेशक के अनुसार उन्हें इस बात को लेकर दृढ़ विश्वास है कि सीमा सुरक्षा का भविष्य तकनीक में बसा है ना कि जवानों की संख्या बढ़ाने में. इसलिए मैंने संसदीय समिति से कहा है कि कृपया हमें तकनीक खरीदने के लिए पैसा दें और मुझे यह बताने में खुशी हो रही है कि मौजूदा सरकार इस प्रस्ताव को लेकर काफी सकारात्मक है.
महानिदेशक के अनुसार सौ प्रतिशत अचूक जैसी कोई चीज नहीं होती लेकिन यह प्रणाली मौजूदा प्रणाली से बहुत ज्यादा कारगर है. वैसे भी BSF के पास बहुस्तरीय प्रणालियां होंगी, हाँलाकि यह करीब- करीब अचूक होगा.

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