मोदी-शाह की जोड़ी ने तोड़े भारतीय राजनीति के सारे रिकॉर्ड, विपक्ष मुक्त भारत की तैयारी

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बिहार में तख्तापलट के बाद अमित शाह की लिस्ट में अगला नंबर दिल्ली और तमिलनाडु का है। बिहार की चुनावी हार को अपनी जीत में बदलने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को 20 महीने लगा। किसने सोचा होगा कि बीजेपी को सितंबर-अक्टूबर 2015 में भारी पराजय के बाद वापस सत्ता सुख भी भोगने को मिलेगाl वो भी तब, जब नीतीश कुमार ने बीजेपी को सांप्रदायिक कहकर भ्रष्टाचार के पितामह लालू यादव को गले लगा लिया था।
नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी लेकिन अगले ही साल बिहार चुनाव में बीजेपी हार गई। हाँलाकि इसके अलावे मोदी-शाह की जोड़ी एक के बाद एक कई राज्य जीतती चली गई। बिहार में सत्ता की वापसी के बाद लगता है पीएम मोदी का नारा कांग्रेस मुक्त भारत के बजाए अब विपक्ष मुक्त भारत हो गया है ।

अमित शाह की नजर अब राजधानी दिल्ली पर टिकी है, क्योंकि जिस दौरान कई राज्यों में बीजेपी जीत रही थी, उसी दौरान दिल्लीवासियों ने बीजेपी को नकार दिया था। अब जब AAP के 21 विधायकों पर अयोग्यता की तलवार लटकी है, ऐसे में बीजेपी चुनावों से पहले जीत के सारे इंतजाम करने में जुटी हुयी है।
सूत्रों के अनुसार AAP के कई विधायक केजरीवाल से खासे नाराज चल रहे हैं और कई मौके पर खुलकर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी के अंदर बढ़ती विधायकों की नाराजगी कभी भी चुनाव का मौका दे सकती है। इस लिस्ट में अगला नाम तमिलनाडु का है, बीजेपी अपनी उत्तर की पार्टी होने की छवि को बदलने की कोशिश कर रही है। सूत्रों ने कहा कि जयललिता के निधन के बाद पार्टी में बने गुटों ने बीजेपी की राह राज्य में आसान कर दिया है ।
बीजेपी ने तमिल सुपरस्टार रजनीकांत को पार्टी में शामिल करवाने के लिए नितिन गडकरी के जरिए निमंत्रण भिजवाया था, इससे साबित होता है कि तमिलनाडु को जीतने के लिए बीजेपी किसी भी मौके को छोड़ना नहीं चाहती है। सूत्रों का कहना है कि राज्य में पार्टी की रणनीति लंबी अवधि की है, क्योंकि मोदी लहर के बाद बीजेपी को अपने संगठन को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है। रजनीकांत के अलावा, पार्टी किसी भी अन्य स्थानीय इकाई को भी साथ लाने को तैयार हैl वो कोई भी गुट हो सकता है।
बिहार को मिलाकर NDA की 18 राज्यों में सरकार हो गई है और बीजेपी ने राजीव गांधी के 1984 के उस रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया है जब कांग्रेस की देश के 17 राज्यों में सरकार थी। कहीं ना कहीं बीजेपी ने राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय तो जोड़ ही दिया है और अब भारत विपक्ष मुक्त होने के कगार पर है ।

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