मोदी का वादा न खाऊंगा, न खाने दूंगा, सिर्फ़ ड्रामेबाज़ी : सोनिया गांधी

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कांग्रेस अपने नये अध्यक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व में एक बार फिर हमारे देश की विविधता भरे समाज की उम्मीदों और आकांक्षाओं की नुमाइंदगी करते हुए देश का बुनियादी एजेंडा तय करेगी और देश में राजनीतिक व सार्वजनिक संवाद की सूत्रधार बनेगी.
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम दिल्ली में कांग्रेस के 84वें महाधिवेशन में पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने आक्रामक भाषण में कई मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से बलिदान के लिए तैयार रहने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ़ एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक सोच है. कांग्रेस हमेशा से एक आंदोलन रही है. कांग्रेस हमारे राष्ट्रीय जीवन का 133 वर्षों में इसलिए अभिन्न अंग है क्योंकि इसमें लोगों को भारतीय संस्कृति की तस्वीर दिखाई देती है. पार्टी की जीत देश की जीत होगी, हम सब की जीत होगी.
सोनिया गाँधी ने कांग्रेस के गिरते प्रदर्शन में तरक्की की उम्मीद बांधते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का ज़िक्र करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि जिस तरह से उनके समय में पार्टी ने प्रगति की थी, वैसे ही कुछ महीनों के बाद कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ऐसा शानदार प्रदर्शन करेगी जिससे देश की राजनीति को एक नई दिशा मिलेगी.
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मोदी सरकार पर हमलावर रहते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं. परन्तु गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हुए चुनावों और उप-चुनावों से पता चलता है कि जो लोग देश की राजनीति से कांग्रेस के अस्तित्व को मिटाना चाहते थे उन्हें यह अंदाज़ा नहीं था कि लोगों के दिलों में कांग्रेस के लिए कितना गहरा सद्भाव और लगाव है. पिछले चार साल में कांग्रेस को कमज़ोर करने के लिए साम, दाम, दंड और भेद का खुला खेल खेला गया है, परन्तु सत्ता के अहंकार के आगे न तो कांग्रेस झुकी है, न कभी झुकेगी.
उन्होंने मोदी सरकार को फ़रेबी सरकार बताते हुए कहा कि मोदी सरकार की योजनाएं कमज़ोर हैं, कांग्रेस ने देश को मनरेगा, पढ़ने, भोजन और सूचना का अधिकार दिया. कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्र निर्माण में सबसे अधिक योगदान दिया है. मोदी सरकार सभी कार्यक्रमों को कमज़ोर और नज़रअंदाज़ कर रही है. मोदी सरकार की तानाशाही तौर-तरीकों, संविधान की उपेक्षा, संसद का अनादर, विभाजनकारी विचारधारा, विपक्ष के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी मुकदमे लगाना और मीडिया को सताने के षड्यंत्रों के खिलाफ कांग्रेस संघर्ष करती रही है और करती रहेगी.
उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री मोदी की ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ जैसे वादे सिर्फ़ ड्रामेबाज़ी और वोट हथियाने की चाल थी. हमें एक ऐसा भारत बनाना है जो सत्ता की मनमानी से मुक्त हो. जिसमें नागरिकों की गरिमा बनी रहे. प्रतिशोध और अहंकार मुक्त भारत के लिए हम कांग्रेसी हर बलिदान देने को तैयार हैं.

सोनिया गांधी के भाषण से पहले पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी ने महाधिवेशन का उद्घाटन करने के बाद दिए अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि देश को सही रास्ता सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी ही दिखा सकती है. क्योंकि कांग्रेस पार्टी प्यार और भाईचारे का प्रयोग करती है, जबकि सत्तारुढ़ दल नफ़रत की विचारधारा को मानता है.
अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी की अध्यक्षता में पहला महाधिवेशन शुरू हुआ, जिसमें देशभर से करीब 12 हजार कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचे. उन्होंने कहा कि यह जो हाथ का निशान है, यही देश को जोड़ने और आगे ले जाने का काम कर सकता है. राहुल गांधी ने बिना नाम लिए बीजेपी में वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने में भरोसा रखती है. हम यहां भविष्य की योजना बनाने बैठे हैं, लेकिन हमें बीते कल को भी नहीं भूलना है. युवक कांग्रेस को आगे ले जाएंगे पर यह काम वरिष्ठ नेताओं के बिना नहीं हो सकता. हमारे लिए युवा और बुजुर्ग दोनों जरूरी है.

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