मोदी का चीन दौरा; दोनों देश अपनी सेनाओं को सामरिक दिशानिर्देश जारी करेंगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग के बीच दो दिन की अनौपचारिक शिखर वार्ता के दौरान अपनी-अपनी सेनाओं को सामरिक दिशानिर्देश जारी करने का फैसला किया ताकि संचार मजबूत हो सके और विश्वास एवं समझ कायम की जा सके.
दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की इस अनौपचारिक शिखर वार्ता के सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है. जिसका मकसद द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए आम सहमति बनाना और संबंधों को प्रभावित करने वाले विवादित मुद्दों को सुलझाना था. औपचारिक दौरा नहीं होने के कारण कोई आधिकारिक समझौता या घोषणा नहीं हुयी लेकिन इसका भविष्य में कई मसलों पर असर दिखने की संभावना है.
इतिहास में पहली बार हुआ जब दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच अनौपचारिक वार्ता हुई. PM मोदी ने दुनिया के तमाम नेताओं से इस परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान भी किया. चीन के राष्ट्रपति किसी भी राष्ट्राध्यक्ष से राजधानी बीजिंग में ही वार्ता करते हैं, लेकिन इस ऐतिहासिक यात्रा पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वुहांग में दोनों देशों के रिश्तों की नई इबारत लिखी. दोनों नेताओं ने दोस्ताना माहौल में गर्मजोशी के साथ विस्तृत वार्ता की. हुबई संग्रहालय में शी को PM के साथ बीस मिनट रहना तय था, लेकिन दोनों 40 मिनट से ज्यादा वहां साथ रहे. मोदी ने शी जिनपिंग का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि भारत के लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि राष्ट्रपति शी ने राजधानी से बाहर आकर उनकी अगवानी की.
वार्ता के दौरान चीन ने दिल खोलकर मोदी का आदर सत्कार किया. हुबई म्यूजियम में पारंपरिक नृत्य के साथ स्वागत करने के बाद PM को ऐतिहासिक म्यूजियम में घुमाया गया. ईस्ट लेक पर चलते हुए लंबी बातचीत, चाय पर चर्चा और नौका विहार करने के अलावा वुहान के एक इवेंट में PM के सामने बॉलीवुड फिल्म के गाने की धुन भी बजाई गईं. वुहान में लंच के मेन्यू कार्ड का डिजाइन खुद जिनपिंग की देख-रेख में भारतीय झंडे (तिरंगा) जैसा तैयार किया गया, इसके ऊपर भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर का चित्र भी बनाया गया था.
अभूतपूर्व अनौपचारिक वार्ता के समापन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-चीन सीमा क्षेत्र के सभी इलाकों में अमन चैन कायम रखने को अहम करार दिया. दोनों देशों ने अफगानिस्तान में शांति कायम करने और आर्थिक मोर्चे पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई है, ताकि यहां से आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जा सके.
भारत में चीन के राजदूत लुओ झाओहुई ने PM मोदी के भारत रवाना होने के बाद ट्वीट कर कहा कि- “दो दिनों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सात मुलाकातें हुयीं, दोनों ने 9 घंटे का वक्त साथ बिताया. दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर आम सहमति के साथ लंबी बातचीत की.”


चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि चीन और भारत को राष्ट्रीय विकास, परस्पर लाभ के सहयोग को मजबूत करने, स्थिरता, विकास, समृद्धि के लिए साथ मिल कर काम करने और वैश्विक शांति एवं विकास पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है. दोनों देशों ने करीबी साझेदारी कायम की है और सहयोग किया है. हमने सकारात्मक प्रगति की है. भारत और चीन दोनों देशों की संयुक्त आबादी 2.6 अरब है जिसमें विकास के लिए जबर्दस्त क्षमता है. इन दोनों देशों का प्रभाव क्षेत्र और विश्व में बहुत तेजी से बढ़ रहा है. चीन और भारत वैश्विक संवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण इंजन हैं और हम बहुध्रुवीय एवं वैश्विकृत विश्व को बढ़ावा देने के लिए मुख्य स्तंभ हैं. दुनिया में शांति एवं स्थिरता कायम रखने के लिए चीन-भारत के बीच अच्छे संबंध जरूरी और सकारात्मक है.
सीमा विवाद को लेकर दोनों नेताओं ने 2005 के पैरामीटर के आधार पर सेकेंड स्टेज में विशेष प्रतिनिधियों द्वारा विवाद का बेहतर हल तलाशने का समर्थन किया. दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्र के सभी इलाकों में अमन-चैन कायम रखने को अहम करार देते हुए दोनों नेताओं ने फैसला किया कि वे अपनी-अपनी सेनाओं को सामरिक दिशानिर्देश जारी करेंगे ताकि हालात बेहतर हो सकें और डोकलाम जैसी स्थिति पुनः न पैदा हो. मौजूदा संस्थागत तंत्र को मजबूत करते हुए सहमति बनी कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच संचार बढ़े और परस्पर विश्वास पैदा हो ताकि सीमाई इलाकों में हालात संभाले जा सकें.
माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार और पर्यटन, गंगा नदी की सफाई और खेलों, दोनों देशों की फिल्में एक दुसरे देश में दिखाने के मुद्दे पर बातचीत होने के अलावे आतंकवाद से साथ मिलकर लड़ने पर भी भरोसा जताया गया.
दोनों नेताओं ने साल 2014 में अनौपचारिक बैठकों की शुरुआत की थी, जब पीएम मोदी ने दिल्ली के बजाय गुजरात में महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम में शी की मेजबानी की थी. मौजूदा वार्ता के दौरान PM ने अगले साल भारत में अगली अनौपचारिक बैठक की मेजबानी करने की शी से पेशकश भी की. इस ऐतिहासिक यात्रा में दोनों नेताओं के बीच 4 दौर की बातचीत हुई है.
चीनी अखबारों के पहले पन्ने पर मोदी-शी के ऐतिहासिक अनौपचारिक वुहान सम्मेलन की खबरों को प्रमुखता मिली. चीन के प्रमुख सरकारी अखबार पीपल्स डेली की लीड खबर इसके बारे में रही और मोदी- शी मुलाकात की दो तस्वीरें प्रकाशित की गई. एक अन्य प्रमुख अखबार चाइना डेली ने अपने संपादकीय में लिखा कि- ‘राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच वुहान में आयोजित इस अनौपचारिक सम्मेलन की खूबसूरती यह है कि इसमें किसी तरह का बोझ नहीं बल्कि सिर्फ उम्मीदें हैं.’

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