मुसलमानों को अयोध्या की जमीन हिंदुओं को दे देनी : मौलाना सादिक

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अयोध्या में राम जन्मभूमि और बावरी मस्जिद विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच शिया धर्म गुरु मौलाना कल्वे सादिक ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान रविवार को कहा कि कोर्ट का निर्णाय चाहे जिस पक्ष में आये, मुसलमानों को विवादित जमीन हिंदुओं को दे देनी चाहिए।
मौलाना ने कहा कि बाबरी मस्जिद का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, अगर कोर्ट का फैसला मुसलामानों के हक में न आए तो मुसलमान को इस फैसले का स्वागत करना चाहिए। इसमें कोई भी दखल न दें और अगर कोर्ट का फैसला मुसलमान के हक में आता है तो मुसलामानों को बाबरी मस्जिद की जमीन हिंदुओं को दे देना चाहिए। मौलाना सादिक पहले भी ऐसा बयान दे चुके हैं।
केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने बयान की तारीफ करते हुए कहा कि मौलाना सादिक ने सबका दिल जीत लिया है। भगवान श्रीराम न हिंदुओं के और न मुसलमानों के हैं बल्कि वह तो भारत की आत्मा हैं।
उधर अयोध्या में राम मंदिर और बावरी मस्जिद की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने से पहले शिया वक्फ बोर्ड ने शपथ पत्र डालकर इस मामले को नया मोड़ दे दिया। शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी द्वारा दाखिल शपथ पत्र में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की जगह उसे पक्षकार बनाने की मांग की गई है। यही नहीं इस अर्जी में विवाद को सुलझाने का फॉर्मूला भी दिया गया है।


शिया वक्फ बोर्ड के द्वारा कोर्ट को दिये गए हलफनामें में इस मामले को सुलझाने के लिए एक सुझाव दिया गया, जिसमें कहा गया कि विवादित स्थल की जमीन को मंदिर निर्माण के लिए दे दी जाए और मुसलमानों को मस्जिद बनवाने के लिए विवदित स्थल से दूर मुस्लिम आबादी वाली जगह पर मस्जिद बनाने के लिए जगह दी जाए।
शिया वक्फ बोर्ड ने दावा किया है कि विवादित स्थल सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की नहीं, बल्कि शिया वक्फ बोर्ड की मिल्कियत है। बोर्ड ने यह भी दावा किया है कि बाबर की लिखी किताब में भी इस मस्जिद का कोई जिक्र नहीं है। अर्जी में कहा गया है कि जो विवादित स्थल बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता है, दरअसल वह वक्फ मस्जिद मीर बकी है। जो बाबर के समय में मीर बकी द्वारा बनवाई गई शिया मस्जिद थी।
राम जन्मभूमि-बाबरी केस पर 7 साल बाद सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई की। कोर्ट ने सभी पक्षों को ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुवाद के लिए 3 महीने का समय दिया। इस मामले की अगली सुनवाई पांच दिसंबर को तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहले वह दो मुख्य पक्षों को चुनेगा इसलिए सभी पक्ष अपने कागजात तैयार रखें।
सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अभी दस्तावेजों का ट्रांसलेशन नहीं हो पाया है, इसलिए इन्हें पेश नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने ट्रांसलेशन के लिए तीन महीने का वक्त दे दिया।

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