मीडिया का मजबूत होना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत : डाॅ. प्रेम कुमार

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मीडिया का मजबूत होना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है. तीस वर्ष पहले गिनती के अखबार थे, जबकि न्यूज चैनल थे ही नहीं, जबकि आज के समय मीडिया संस्थानों की संख्या काफी बढ़ गई है। बिहार के कृषि मंत्री डाॅ. प्रेम कुमार ने उक्त बातें विश्व संवाद केंद्र द्वारा शुरू किए गए तीन महीने के पत्रकारिता सर्टिफिकेट कोर्स का उद्घाटन करते हुए कहीं.
डाॅ. प्रेम कुमार ने कहा कि वर्तमान में जब अखबारों व न्यूज चैनलों की भरमार हो गई है, ऐसे में यह आवश्यक है कि पत्रकारिता में गुणवत्ता बनी रहे और इसके लिए जरूरी है कि पत्रकारों का विधिवत प्रशिक्षण हो. विश्व संवाद केंद्र का यह प्रयास सराहनीय है. उन्होंने कहा कि 1990 में जब मैं पहली बार विधायक बना तो पत्रकारों ने पूछा कि अगर राजनीति में नहीं होते तो क्या करते? इस पर उन्होंने कहा कि राजनीति में नहीं होते, तो पत्रकार होते. उन्होंने जेपी आंदोलन के समय मीडिया की स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि सेंसरशिप के उस दौर में भी कुछ लोग पत्रकारिता के मूल्यों को लेकर निष्ठावान थे.


विश्व संवाद केंद्र के न्यासी व समाजसेवी विमल जैन ने अपने संबोधन में कहा कि मीडिया के माध्यम से समाज में सही विमर्श होना आवश्यक है. उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज यह देखा जा रहा है कि अपने स्वार्थ के कारण चंद मीडिया संस्थान राष्ट्रविरोधी तत्वों का यशगान करने में लगे हैं, वहीं किसी भी घटना को अपनी सुविधानुसार बढ़ा या घटाकर प्रस्तुत करते हैं. यह पत्रकारिता के लिए दुखद है, इस अवमूल्यन को रोकने के ध्येय से विश्व संवाद केंद्र द्वारा पत्रकारिता प्रशिक्षण कोर्स शुरू किया गया है.
विश्व संवाद केंद्र के संपादक संजीव कुमार ने कोर्स की जानकारी देते हुए कहा कि विगत चौदह वर्षों से यह संस्था मूल्य आधारित पत्रकारिता को अक्षुण्ण रखने के लिए कृतसंकल्पित है. मंच संचालन विपुल कुमार सिंह ने किया. इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कांत ओझा, विजय कृष्ण अग्रवाल, नीरव समदर्शी समेत पत्रकारिता के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे.

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