मिशनरीज ऑफ चैरिटी में बच्चों को बेचने का हो रहा धन्धा

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मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर नवजात बच्चे की बिक्री का आरोप लगा है. मामले में मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम राँची की कर्मचारी अनिमा इंदवार एवं दो अन्य सिस्टरों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
अनिमा पर आरोप है कि चैरिटी होम की महिला संचालक के साथ मिलकर आधा दर्जन नवजात बच्चों को बेच चुकी है. चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) की जांच में खुलासा हुआ कि एक बच्चा के एवज में एक लाख बीस हजार रुपये तक लिये गये हैं. पुलिस के अनुसार यहाँ से कुछ और बच्चों के भी अवैध तरीके से बेचे जाने की बात सामने आयी है. अवैध तरीके से बेचे गये बच्चों की मां के नाम भी पुलिस को मिले हैं. जिनकी विस्तृत जांच हो रही है.
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की अध्यक्ष रूपा कुमारी के अनुसार होम की कर्मचारी अनिमा को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उसने खुद स्वीकार किया है कि अब तक वह आधा दर्जन नवजातों को चैरिटी होम की संचालिका सिस्टर कोनसीलिया के साथ मिलकर बेच चुकी है. चैरिटी होम की संचालिका से पूछताछ के दौरान और भी नये खुलासे होंगे.
अनिमा ने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया कि रांची के इस्ट जेल रोड स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम से अवैध रूप से नवजातों की बिक्री के एवज में 50 हजार से एक लाख 20 हजार रुपये तक लिये गये हैं. बाल कल्याण समिति ने समिति से बरामद नवजात बच्चों को फिलहाल एक अन्य संस्था में रखा है.
CWC की अध्यक्ष रूपा कुमारी के अनुसार एक अविवाहित लड़की अश्मिता (बदला हुआ नाम) मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम में प्रेग्नेंसी के दौरान रह रही थी. उसने एक मई को सदर अस्पताल रांची में एक लड़के को जन्म दिया. चार दिन के मासूम नवजात को अनिमा इंदवार ने संचालिका सिस्टर कोनसीलिया की मिलीभगत से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के ओबरा में रहनेवाले दंपती सौरभ अग्रवाल व प्रीति अग्रवाल को अस्पताल खर्च के नाम पर एक लाख 20 हजार रुपये में बेच दिया. अनिमा ने तीन जुलाई को दंपती को बुलवाया और कोर्ट में पेश करने के नाम पर बच्चा ले लिया. जिसके बाद वह बच्चा लेकर गायब हो गयी. अग्रवाल दंपती ने बाद में जेल रोड स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी और डोरंडा स्थित दूसरे शाखा में जाकर अपना बच्चा मांगा, लेकिन बच्चा मिलना तो दूर उन्हें बच्चे से मिलने तक नहीं दिया गया. इसके बाद दंपती ने इसकी शिकायत CWC से की.


मिशनरीज ऑफ चैरिटी, ईस्ट जेल रोड की सिस्टर कोंसिलिया और महिला स्टाफ अनिमा इंदवार द्वारा बच्चा बेचे जाने का मामला प्रकाश में आने के बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपी सिस्टर और महिला स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज कर चैरिटी के सेंटर में छापेमारी की गयी और इस दौरान पुलिस ने यहां से 1.48 लाख रुपये जब्त किये.
पुलिस ने मामले में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की हेड सिस्टर मारी डीआइ, सिस्टर कोंसिलिया और अन्य महिला स्टाफ से पूछताछ की. सिस्टर कोंसिलिया ने स्वीकार किया कि बच्चा बेचने में वह शामिल थी. बच्चा बेचने के बाद अनिमा को 1.20 लाख मिले थे, जिसमें से उसने सिस्टर को 90 हजार रुपये दिये थे. अनिमा इंदवार ने भी पुलिस के समक्ष सिस्टर को पैसे देने की बात स्वीकार की. उसने यह भी बताया कि इससे पहले जो बच्चा बेचा गया था, उससे भी 1.20 लाख रुपये मिले थे. मामले की जांच चल रही है, सेंटर की इंचार्ज पर भी मामला दर्ज हो सकता है.
CWC की अध्यक्ष रूपा कुमारी के अनुसार मानव तस्करी से मुक्त करायी गयी या वैसी नाबालिग युवतियां, जो अविवाहित रहते गर्भवती हो जाती हैं, उन्हें ‘निर्मल हृदय’ मिशनरीज ऑफ चैरिटी में आश्रय दिया जाता है. किसी भी चैरिटी होम में अगर किसी गर्भवती महिला को रखा जाता है, तो उसकी जानकारी चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को देनी होती है. लेकिन, जब अश्मिता (बदला हुआ नाम) को भर्ती कराया गया, तो इसकी सूचना कमेटी को नहीं दी गयी और न ही बच्चे की जानकारी दी गयी.
चैरिटी संस्था में कार्यरत महिलाकर्मियों ने किशोर न्याय अधिनियम की जानकारी होने के बावजूद इस कृत्य को अंजाम दिया. बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रूपा कुमारी, सदस्य प्रतिमा तिवारी व व तनुश्री सरकार ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी से 11 गर्भवती बच्चियों सुरक्षा के लिहाज से नामकुम नारी निकेतन शिफ्ट कराया है. साथ ही CWC ने इस मामले की गहराई से जांच करने का अनुरोध पुलिस से किया है क्योंकि उसे आशंका है कि इस काम में एक बड़ा गिरोह शामिल हो सकता है.

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