कर्नाटक के बल्लेबाज मयंक अग्रवाल (27वर्ष) पिछले एक साल से भारत की ओर से अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट में डेब्यू करने के इंतजार में थे और ज्योंही मेलबर्न के मैदान पर इस सलामी बल्लेबाज़ का सपना हकीकत में बदला उसने इतिहास रच दिया. आस्ट्रेलियाई धरती पर डेब्यू टेस्ट में भारत की और से सर्वाधिक 76 रन बनाने वाले बल्लेबाज़ बन गये, हाँलाकि उनके अनुसार अपनी भावनाओं पर काबू करना बल्लेबाज़ी करने से ज्यादा कठिन हो रहा था.
भारत की ओर से 295वें टेस्ट क्रिकेटर के रूप में डेब्यू करते हुए मयंक ने 161 गेंदों पर आठ चौके और एक छक्के की बदौलत 76 रन बनाकर MCG ग्राउंड पर वह कारनामा कर डाला जो आजतक कोई भारतीय बल्लेबाज़ आस्ट्रेलिया में नहीं कर पाया था. इसके पूर्व दत्तू फड़कर ने 1947 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) पर 51 रनों की पारी खेली थी. MCG ग्राउंड पर ऋषिकेश कानितकर ने 1999 में 45 रन और सैय्यद आबिद अली ने 1967 में एडिलेड के मैदान पर खेले गये मैच की दोनों परियों में 33- 33 रन की पारी खेली थी. यही नहीं टेस्ट पदार्पण में अर्धशतक जड़ने वाले मयंक सातवें भारतीय सलामी बल्लेबाज हैं.
मयंक ने 17- 18 रणजी सीजन में जब सर्वाधिक 1160 रन बनाये थे और इसी रणजी सीजन में मयंक ने एक महीने में ही 1033 रन ठोंक कर एक और उपलब्धी हासिल की थी, इसके पूर्व कोई दूसरा भारतीय बल्लेबाज़ यह नहीं कर पाया था. नवंबर 2017 में रणजी ट्रॉफी में कर्नाटक के लिए खेलते हुए महाराष्ट्र के खिलाफ मयंक ने अपना पहला तिहरा शतक (नाबाद 304)जड़ा था. उसी समय से माना जा रहा था कि वेस्टइंडीज के विरुद्ध घरेलू सीरीज में उन्हें मौका मिलेगा. वैसे एक महीने में सर्वाधिक फर्स्टक्लास रन बनाने का विश्व रिकार्ड इंग्लैंड के महानतम बल्लेबाज़ सर लें हेटन के नाम है, जिन्होंने 1949 के जून में 1294 रन बनाये थे.
उस समय मयंक पर पृथ्वी शा को वरीयता मिली थी और उसने डेब्यू टेस्ट में ही शानदार शतक भी ठोंका और दो टेस्ट में 237 रन बनाने के बाद धूम- धडाका करने आस्ट्रेलिया जाने का भी अवसर मिला पर किस्मत ने उन्हें तब दगा दे दिया जब अभ्यास मैच के दौरान चोटिल हो जाने के फलस्वरूप पूरी श्रिंखला से ही उन्हें बाहर होना पड़ा. दूसरी ओर केएल राहुल और मुरली विजय की सलामी जोड़ी आस्ट्रेलिया में बुरी तरह नाकाम रही और मयंक को मौका मिल गया, जिसे उसने दोनों हाथ से लपक लिया.
सलामी बल्लेबाज मयंक इसी के साथ डेब्यू टेस्ट में सर्वाधिक रन बनाने के मामले में चौथे बल्लेबाज़ बन गये हैं. इस मामले में सर्वाधिक 187 रन शिखर धवन ने आस्ट्रेलिया के ही विरुद्ध 2013 में, पृथ्वी शा ने 134 रन इसी वर्ष वेस्टइंडीज के तथा वेस्टइंडीज के ही विरुद्ध केसी इब्राहीम ने 85 रन 1948 में बनाये थे. हाँलाकि महानतम सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी अपने डेब्यू मैच के दौरान 1971 में वेस्टइंडीज के विरुद्ध 65 रन बनाये थे. अपने डेब्यू टेस्ट मैच में 76 रन बनाकर आउट हुए मयंक अपने फर्स्ट क्लास रणजी डेब्यू मैच में भी झारखंड के विरुद्ध 90 रन बनाकर आउट हो गये थे.


मयंक पिछले एक वर्ष से भारत की ओर से टेस्ट में पदार्पण करने का इंतजार कर रहे थे और जब उनका सपना हकीकत में बदला तो उन पर भावनाएं हावी होने लगीं. मैच के बाद मयंक ने कहा कि “भारत के लिए पदार्पण करना शानदार अहसास था, पर जब कैप (295) मिली तब अपनी भावनाओं को काबू में रखना काफी मुश्किल था. मैं इसे जीवन भर सहेजकर रखूंगा. तब भावनाओं को काबू में रखते हुए एकाग्रता बनाए रखना आसान नहीं था, लेकिन ऐसा करने की जरूरत थी. यह काफी बड़ा अवसर था और मैंने जैसी शुरुआत की उससे खुश हूँ. यह बड़ा मंच और बड़ा मौका था, सीनियर खिलाड़ी मेरे पास आये और बोले कि जितना बड़ा दिन होता है, छाप छोड़ने का उतना ही बड़ा मौका भी होता है. जब मुझे वेस्टइंडीज के खिलाफ चुना गया था तो वो मेरे लिए एक बड़ा लम्हा था.
मयंक ने कहा कि मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि मैं काफी भाग्यशाली हूँ, क्योंकि मैंने अपना पदार्पण MCG में किया. प्रत्येक खिलाड़ी को रन बनाने होते हैं और मैंने भी यही किया, इसे लेकर मैं काफी खुश हूँ. मैंने काफी कुछ सीखा. जब भारत के प्रत्येक हिस्से में आप पांच साल रणजी खेले हों जहाँ अलग अलग स्थितियों का सामना करना होता है तो यह हमेशा काफी कुछ सीखने वाला होता है. MCG की सपाट पिच पर असमान उछाल के बारे में पूछने पर कहा कि- मैं पिच के बारे में शिकायत नहीं करूंगा, मुझे लगता है कि यह बल्लेबाजी के लिए अच्छी थी. शुरू में गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिल रही थी और पिच धीमी थी, लेकिन लंच के बाद यह थोड़ी तेज हो गई.
पहले दिन 2.41 रन प्रति ओवर की गति से दो विकेट पर 215 रन बनने का श्रेय आस्ट्रेलियाइ गेंदबाजों की कसी हुई गेंदबाजी को देते हुए कहा कि उन्होंने शानदार गेंदबाजी की. उन्होंने ढीली गेंद नहीं फेंकी, कसी हुई गेंदबाजी की और वे आक्रामक भी थे. इसलिए उन्होंने जिस तरह की गेंदबाजी की उसे देखते हुए मुझे लगता है कि हम अच्छा खेले. अपने सलामी जोड़ीदार हनुमा विहारी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने रन तो काफी नहीं बनाए लेकिन नई गेंद का सामना करते हुए 66 गेंद शानदार ढंग से खेली, वो अच्छा खिलाड़ी है. उसने ‘ए’ टीम और रणजी में ढ़ेरों रन बनाए हैं और तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए तिहरा शतक भी जड़ा है.



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