राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने राजभवन में अशोक गहलोत सरकार मंत्रिमंडल में 13 कैबिनेट और 10 राज्य मंत्रियों को शपथ दिलायी.
राजभवन में सुबह साढ़े ग्यारह बजे आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शपथ लेने वाले सभी सदस्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय से एक साथ बस में सवार होकर राजभवन पहुंचे. इसके पूर्व वहाँ मंत्रिमंडल में शामिल होने जा रहे सदस्यों का अभिनंदन कर उन्हें तिलक लगाया गया. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने मंत्री बनाए जाने वाले विधायकों को फोन कर एक दिन पूर्व उन्हें सूचना दी थी. समारोह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे. गहलोत ने एक- एक कर सभी को मंच पर बुलाया, जहां राज्यपाल कल्याण सिंह ने उनको शपथ दिलाई.
तेईस मंत्रियों में से अठारह यानी दो तिहाई से ज्यादा नए चेहरे हैं. राष्ट्रीय लोक दल के भरतपुर विधायक सुभाष गर्ग भी मंत्री बनाये गये. कैबिनेट में 60 फीसदी अशोक गहलोत समर्थक हैं तो 40 फीसदी पायलट समर्थकों को जगह मिली है. यानी एक बार फिर गहलोत सचिन पायलट पर भारी पड़ गए हैं. जातिगत आधार पर सबसे ज्यादा 4 जाट, 4 एससी, 3 वैश्य, 3 एसटी, दो ब्राह्मण, दो राजपूत, दो ओबीसी, एक गुर्जर, एक विश्नोई और एक मुस्लिम मंत्री बनाए गये हैं. ममता भूपेश केवल एक महिला मंत्री बनाई गयी हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट दोनों ओबीसी से ही आते हैं.
पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी, हेमाराम चौधरी, भरत सिंह, दीपेंद्र सिंह शेखावत, परसराम मोरदिया, राजेंद्र पारीक, अशोक बैरवा, महेश जोशी, जितेंद्र सिंह, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, बृजेंद्र ओला और राजकुमार शर्मा समेत कई दिग्गज चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पायी. हाँलाकि पांच मंत्रियों की जगह अभी खाली है. मंत्रिमंडल गठन के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता सुशासन लाना है और जल्‍द ही बेरोजगारी व किसानों की समस्‍याओं का समाधान किया जाएगा. मंत्रियों के शपथ ग्रहण के दौरान कुछ विधायकों को मंत्री नहीं बनाए जाने से उनके नाराज समर्थक नारेबाजी करने लगे.
डॉ. बीडी कल्ला, शांति धारीवाल, रघु शर्मा, लालचंद कटारिया, प्रमोद जैन भाया, परसादीलाल मीना, विश्वेन्द्र सिंह, हरीश चौधरी, रमेश मीना, मास्टर भंवरलाल, प्रतापसिंह खाचरियावास, उदयलाल आंजना और सालेह मोहम्मद को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. जबकि गोविंद सिंह डोटासरा, ममता भूपेश, अर्जुन बामणिया, भंवर सिंह भाटी, सुखराम बिश्नोई, अशोक चांदना, टीकाराम जुली, भजनलाल जाटव, राजेन्द्र यादव और सुभाष गर्ग को राज्यमंत्री बनाया गया है.


कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और बीकानेर पश्चिम से चुनाव जीते हैं. गहलोत कैंप के कल्ला राज्य में एक दर्जन मंत्रालय पूर्व में संभाल चुके हैं. शांति धारीवाल कोटा दक्षिण से चुनाव जीते हैं, मुख्यमंत्री के बेहद करीबी जिन्हें पूर्व में भी भारी-भरकम मंत्रालय मिलता रहा है.
रघु शर्मा केकड़ी विधानसभा से दूसरी बार चुनाव जीते हैं. पूर्व में अजमेर लोकसभा उपचुनाव जीतकर कांग्रेस का कद बढ़ाने के बाद कैंपेन समिति के अध्यक्ष बने. गहलोत के चहेते रघु शर्मा कभी पायलट के करीबी रहे थे. लालचंद कटारिया जयपुर की झोटवाड़ा सीट से विधायक बने हैं. मनमोहन सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके हैं. पहली बार राज्य में मंत्री बने हैं यह भी गहलोत के करीबी हैं. परसादी लाल मीणा लालसोट से चुनाव जीते हैं. मीणा समाज में कांग्रेस का चेहरा हैं और गहलोत के करीबी हैं. विश्वेंद्र सिंह डीग से विधायक हैं, पूर्वी राजस्थान के बड़े जाट नेता हैं और तीन बार सांसद रह चुके हैं. पहली बार मंत्री बन रहे हैं, जिनकी पायलट से नहीं पटती है. उदय लाल आंजना निंबाहेड़ा से दूसरी बार विधायक हैं और ओबीसी के बड़े नेता हैं. एक बार सांसद रह चुके हैं और गहलोत समर्थक हैं. सालेह मोहम्मद पोकरण से दूसरी बार चुनाव जीते हैं. हरदम विवादों में रहने वाले सालेह मोहम्मद पश्चिमी राजस्थान के बड़े मुस्लिम नेता गाजी फकीर के बेटे हैं. सालहे भी गहलोत के करीबी हैं.
हरीश चौधरी बायतु से विधायक हैं और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं. पश्चिमी राजस्थान के बड़े जाट नेता हैं और एक बार बाड़मेर से सांसद भी रह चुके हैं. ये पायलट के करीबी हैं. प्रमोद जैन भाया अंता सीट से विधायक बने हैं और सचिन पायलट के बहुत करीबी हैं. पिछली सरकार में बीच में हटा दिया गया था. रमेश चंद्र मीणा सपोटरा से किरोड़ी लाल मीणा की पत्नी गोलमा देवी को हराया है. 2008 में पहली बार बसपा से जीते थे, कांग्रेस सरकार को समर्थन देकर संसदीय सचिव बने और लगातार तीसरी बार विधानसभा पहुंचे ये पायलट के करीबी हैं. प्रताप सिंह खाचरियावास जयपुर की सिविल लाइन सीट से जीते हैं. इन्होंने जयपुर के जिला अध्यक्ष रहते हुए पांच साल भाजपा सरकार के खिलाफ संघर्ष किया है. दूसरी बार विधायक बने और पायलट के बेहद करीबी हैं. मास्टर भंवरलाल मेघवाल सुजानगढ़ से चुनाव जीते हैं पहले शिक्षा मंत्री थे, लेकिन इस्तीफा देना पड़ा था. एससी समाज के नेता भंवरलाल पायलट के बेहद करीबी हैं.
राज्यमंत्री भजन लाल जाटव पहली बार 2014 में विधानसभा उपचुनाव में वैर सीट से जीते थे और इस बार भी वहीं से जीते हैं. इन्हें पायलट के करीबी माना जाता है. गोविंद सिंह डोटासरा लक्ष्मणगढ़ से तीसरी बार विधायक बने हैं. विधानसभा में मुख्य सचेतक रहे गोविंद सिंह पायलट के करीबी हैं हाँलाकि उन्हें गहलोत से भी परहेज नहीं है. टीकाराम जूली अलवर ग्रामीण से दूसरी बार विधायक बने हैं. ये जितेंद्र सिंह के करीबी हैं. ममता भूपेश मंत्रिमंडल की एकमात्र महिला चेहरा हैं जो दूसरी बार विधायक बनी हैं. कांग्रेस सरकार में संसदीय सचिव रह चुकी ममता किसी कैंप में नही हैं. अर्जुन बामणिया बांसवाड़ा से तीसरी बार चुनाव जीते हैं, कांग्रेस के प्रदेश सचिव रह चुके बामणिया को गहलोत समर्थक माना जाता है.
भंवरसिंह भाटी कोलायत से लगातार दूसरी बार जीते हैं. इन्होंने पहली बार भाजपा के दिग्गज नेता देवी सिंह भाटी को और दूसरी बार उनकी बहू को हराया है. भाटी गहलोत समर्थक हैं. सुखराम बिश्नोई सांचौर सीट से लगातार दूसरा चुनाव जीते हैं और बिश्नोई समाज के प्रतिनिधि के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल किए गए हैं. सुखराम गहलोत समर्थक हैं. अशोक चांदणा लगातार दूसरी बार चुनाव जीते हैं. कड़े तेवर वाले युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक भी गहलोत समर्थक हैं. राजेंद्र यादव कोटपूतली विधानसभा से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए यह भी गहलोत समर्थक हैं. सुभाष गर्ग राष्ट्रीय लोक दल के टिकट पर पहली बार चुनाव जीते हैं और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेहद करीबी रहे हैं.



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