भ्रष्टाचार से प्रशासन लकवाग्रस्त, देश के विकास में आ रही हैं रुकावटें : सुप्रीम कोर्ट

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जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस आर.भानुमती की खंडपीठ ने बुधवार को नीरा यादव मामले में देश की जड़ों में फैले भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार ने सरकारी प्रशासन के प्रमुख क्षेत्रों के कामकाज को ही लकवा मार दिया है। इससे देश के विकास में रुकावटें आ रही हैं। अगर प्रशासन का आचरण सही रहे और वह अपने दायित्वों को पूरी मुस्तैदी और मेहनत से निभायें तभी जनता के अधिकारों की रक्षा होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने ब्यूरोक्रेसी में भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए अपने फैसले में कहा कि ये कड़वी सच्चाई है कि ब्यूरोक्रेसी के वर्तमान तंत्र में भ्रष्टाचार सभी तरफ व्यापक रूप में फैला है। यह भी हकीकत है कि पैसे वाले और ताकतवर लोग ट्रायल और सजा को रोकने या उसमें देरी करने की कोशिश करते हैं।


कोर्ट ने कहा कि हालांकि भाग्यवश मौजूदा मामला इसका अपवाद बन कर उभरा है। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार के लिये भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार से निपटना वरीयता पर रहने वाला है। उसे इस महामारी से निपटने के लिये बहुत ही कड़ी कार्रवाई करनी होगी।
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी 1998 को CBI जांच के आदेश दिये थे, 26 फरवरी 1998 को CBI ने नोएडा की CEO नीरा यादव व अन्य अधिकारियों के साथ साजिश रच कर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नोएडा में भूखंड आवंटन और उनके कन्वर्जन में अनियमितताएं करने के खिलाफ FIR दर्ज की थी।

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