भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार दोपहर 3:30 बजे भुवनेश्वर पहुंचे। एयरपोर्ट से निकलने के बाद उन्होंने रोड शो शुरू किया। इस रोड में वे करीब 8 किमी तक लोगों से मिलने के बाद वे 4:10 बजे गवर्नर हाउस पहुंचें।
जिन राज्यों में 2019 तक चुनाव होने हैं, वहां पर पार्टी को मजबूत करने के भाजपा आलाकमान के प्लान का हिस्सा है ओडिशा में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक। भाजपा यहां 20 साल बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मीटिंग कर रही है। इससे पहले भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 19 दिसंबर से 21 दिसंबर तक 1997 में भुवनेश्वर में ही हुई थी।
यूपी चुनाव की शानदार कामयाबी के बाद अब भाजपा के एजेंडे में ओडिशा है। इससे पहले शनिवार सुबह यहाँ पहुँचने पर अमित शाह का जोरदार स्वागत हुआ। पार्टी दफ्तर पर कार्यकर्ताओं ने शाह को 74 कमल फूलों की माला और 74 फूल देकर स्वागत किया। बता दें कि ओडिशा में 147 विधानसभा सीटें हैं और 74 सीटें बहुमत के लिए चाहिए।

ओडिशा की मीटिंग में केंद्र सरकार के 3 साल के कामकाज का लेखा-जोखा रखा जाएगा, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों पर मंथन तथा गुजरात-हिमाचल प्रदेश की चुनावी रणनीति पर चर्चा होने के साथ ही ओडिशा में पार्टी के राजनीतिक भविष्य का रोडमैप तय किया जायेगा। यहीं पर जीएसटी बिल पर आगे बढ़ने का रास्ता भी तैयार किया जाएगा।
26 दिसंबर 1997 को बीजू पटनायक ने जनता दल से अलग होकर बीजेडी का गठन किया था और 1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेडी ने भाजपा की अगुवाई में एनडीए साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। 2000 में नवीन पटनायक की अगुवाई में ओडिशा में एनडीए की सरकार बनी पर 2009 के लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर यह गठबंधन टूट गया था। दो महीने पहले हुए ओडिशा नगरपालिका और लोकल बॉडीज के चुनाव में भाजपा को जनता का भरपूर समर्थन मिला और बीजेपी को 850 सीट में से 306 सीटें मिलीं। जबकि 2012 के नगर पालिका और निकाय के चुनाव में भाजपा को 36 सीटें ही मिली थीं।

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