कभी प्रथम श्रेणी के शहरों के सिर्फ अमीर लोग ही फिल्म उद्योग में जा सकते थे, लेकिन अब दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों के कलाकार भी अपने पांव जमा रहे हैं और अपनी कलात्मक क्षमताओं को मजबूती दे रहे हैं. यह दिखाता है कि भारत बदल रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में नैशनल म्यूजियम ऑफ इंडियन सिनेमा की नई बिल्डिंग का उद्घाटन करने के बाद फिल्म इंडस्ट्री को संबोधित करते हुए पूछा- ‘हाउ इज द जोश’. ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ फिल्म में यह नारा आर्मी के जवान जोश भरने के लिए इस्तेमाल करते नजर आये हैं. भारतीय फिल्मों की तारीफ करते हुए PM ने कहा कि हमारी फिल्मों में मानवीयता की भावनाओं को बेहतरीन तरीके से पेश किया जाता है. बात चाहे फन पैदा करने की हो या फैन बनाने की, हम हर जगह आगे हैं. आज दुनिया में युवा अगर बैटमैन का फैन है तो बाहुबली का भी फैन है, हमारे किरदारों की भी ग्लोबल अपील है. भारतीयता का पूरे विश्व में प्रतिनिधित्व करते हुए फिल्में पूरे विश्व में भारत को ब्रैंड बनाने में बहुत बड़ा रोल प्ले करती हैं.
PM ने भारतीय फिल्मों में भावुकता की तारीफ करते हुए कहा कि एक विदेश यात्रा के दौरान मुझसे एक व्यक्ति ने पूछा कि भारतीय फिल्मों में लोग मंदिर में रोते हैं, पैर पकड़ लेते हैं, ऐसा क्यों है? सोचिए कि वह व्यक्ति भारत की फिल्मों में भावनात्मकता देखकर हैरान है और यही हमारी सफलता है. इजरायल के प्रधानमंत्री ने उन्हें ‘ईचक दाना, ईचक दाना’ गाना पूरा सुनाया, भले ही उन्हें इसका मतलब पता न हो. वियतनाम के प्रधानमंत्री से जुड़ा एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि एक कार्यक्रम में मैंने कई देशों के नेताओं को परिवार सहित बुलाया था. ज्यादातर लोग परिवार के साथ आए भी थे लेकिन कम्युनिस्ट देश वियतनाम के कम्युनिस्ट प्रधानमंत्री अकेले आए और कहा कि उनकी पत्नी रामायण सीरियल देखने में व्यस्त हैं, इसलिए वह साथ नहीं आईं.


मोदी ने कहा कि देश में कई सारे पर्यटन स्थल फिल्मों की वजह से जाने जाते हैं, पर्यटन को बढ़ाने में बहुत बड़ा रोल फिल्म इंडस्ट्री निभा सकती है. टूरिजम गरीब से गरीब को रोजगार देता है, चाय वाला भी कमाता है. फिल्म निर्माण में आ रही समस्याओं के बारे में बात करते हुए कहा कि फिल्म शूटिंग के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस का काम शुरू किया गया है, जिसके लिए एक पोर्टल बनाया जा रहा है, जिससे आपका काम तय समय में आसानी से हो जाएगा. भविष्य में आपको शूटिंग की परमिशन के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. हमने अपने कार्यकाल में अब तक 1400 कानून खत्म किए ताकि प्रक्रिया सरल हो.
प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी ‘‘बेबसी’’ पर ध्यान केंद्रित करने वाली भारतीय फिल्में अब बदल रही हैं. आज के भारत में समस्याओं से ज्यादा समाधान है. फिल्में और समाज एक दूसरे का प्रतिबिंब हैं और सिनेमा की तरह भारत भी वक्त के साथ बदल रहा है. आप जो फिल्मों में देख रहे हैं वह समाज में होता है और समाज में जो होता है वह फिल्मों में दिखता है. मोदी ने कहा कि फिल्मों को पूरा होने में पहले दस-पन्द्रह साल लग जाते थे, अब फिल्में कुछ महीनों में तय समय सीमा में बन जाती हैं. ऐसा ही कुछ सरकारी योजनाओं के साथ भी है, वे भी अब तय समयसीमा में पूरी हो रही हैं. हालांकि अगर कोई सरकार कहे कि वह सारे काम अकेले कर सकती है तो वह मूर्ख बना रही है. सबके विकास के लिये सबके साथ की जरूरत है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संग्रहालय में द्वितीय विश्वयुद्ध की 30 घंटे लंबी डिजिटाइज्ड फुटेज है, साथ ही इस युद्ध में शहीद होने वाले डेढ़ लाख भारतीय सैनिकों के पराक्रम को भी दुनिया जानेगी. उन्होंने फिल्म उद्योग को आश्वासन दिया कि पायरेसी और छिपे कैमरे से रिकॉर्डिंग रोकने के लिये प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने इस अवसर पर कहा कि दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच सम्मेलन की तरह भारत में वैश्विक फिल्म सम्मेलन आयोजित किया जा सकता है.



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