भारत ने तकनीक, रक्षा और अं‍त‍रिक्ष के क्षेत्र में काफी तेजी से तरक्‍की की है। यह तीनों एक दूसरे से न सिर्फ जुड़े हुए हैं, बल्कि इनका सुरक्षा के लिहाज से काफी बड़ा योगदान है। इनकी बदौलत भारत सैन्‍य शक्ति के मामले में अब टॉप पांच देशों में शामिल हो गया है।
इसरो हो, डीआरडीओ हो या फिर तकनीक के क्षेत्र में काम कर रही दूसरी अन्य कंपनियां। इन सभी का देश की सुरक्षा में काफी अहम योगदान है। भारत आज विश्‍व का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश भी है। वैसे भी पिछले पांच वर्षों में बड़े हथियारों का व्यापार शीतयुद्ध के बाद से सर्वाधिक हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया और एशिया में हथियारों की मांग में तेजी रही है।
दुनिया की सबसे ताकवर अमेरिकी सेना को माना गया है। अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति पर करीब 612 बिलियन डॉलर खर्च करता है। उसके पास अत्याधुनिक हथियारों के साथ 2,130 क्रूज मिसाइल, 450 बैलिस्टिक मिसाइल और 19 विमान वाहक हैं, जो हवा से हवा में वार करने में सक्षम हैं।

अमेरिका अपने रक्षा खर्चों में किसी तरह की ढील नहीं होने देता है। अमेरिका का कुल रक्षा बजट उसके कुल जीडीपी का 3.3 फीसदी है। अपने अत्याधुनिक हथियारों और मजबूत जहाजी बेड़े के कारण यह विश्व की सबसे शक्तिशाली नौसेना है। अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ज्यादा प्रशिक्षित विशिष्ट सैनिकों की बड़ी फौज है, जो किसी भी देश पर पूरी ताकत से हमला करे, तो कुछ ही समय में तबाह कर दे।
दूसरे नंबर पर रूस की सेना है। सोवियत संघ के विघटन के तकरीबन दो दशक बाद अपने सैन्य बजट में 44 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी कर इसने फिर से अपनी सेना को मजबूत किया है। इस समय रूस के पास 7 लाख 66 हजार सक्रिय सैनिक, 24 लाख 85 हजार प्रशिक्षित रिजर्व सैनिक और 15,500 से ज्यादा टैकों की दुनिया का सबसे बड़ा टैंक भंडार है। रूस का सैन्य खर्च 69.2 अरब डॉलर है।
2012-16 के दौरान भारी हथियारों के निर्यात में रूस का हिस्सेदारी करीब 23 फीसद थी। इस दौरान रूस ने भारत, वियतनाम, चीन और अल्जीरिया को हथियारों का निर्यात किया था। रुस का कुल रक्षा बजट 66.4 बिलियन डॉलर था जो कि कुल जीडीपी का 5.4 फीसदी था। सैन्य खर्च में रूस ने 5.9 फीसदी की बढ़ोतरी की है।

चीन की सेना दुनिया में तीसरे नंबर पर है, जिसका सैन्‍य बजट मौजूदा समय में करीब 126 बिलियन डॉलर है। इस समय चीन के पास 22 लाख 85 हजार की सक्रिय सेना और 23 लाख सैनिक रिजर्व में हैं। हाल ही में उसने अपनी सेना में एफ-35 फाइटर प्लेन शामिल किए हैं। हथियारों के निर्यात में चीन ने भी बढ़ोतरी दर्ज की है। 2007-11 में उसकी वैश्विक हिस्सेदारी 3.8 फीसद थी, जो 2012-16 में बढ़कर 6.2 फ़ीसद हो गई है। चीन रक्षा खर्च के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है चीन का कुल रक्षा बजट 215.0 बिलियन डॉलर है जो उसकी जीडीपी का 1.9 फीसदी है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2012-16 तक सऊदी अरब में हथियारों का आयात पिछले पांच वर्षों की तुलना में 212 फीसदी बढ़ा है और यह बड़े आयातकों में दूसरे नंबर पर है। 2016 में उसका रक्षा खर्च 30 फीसदी गिरावट के बावजूद 63.7 अरब डॉलर रहा। सऊदी अरब का कुल रक्षा बजट 87.2 बिलियन डॉलर है, जो उसकी कुल जीडीपी का 13.2 फीसदी है।
भारत की गिनती आज दुनिया के पांच बड़ी सैन्‍य शक्तियों में होती है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश भी है। भारत के रक्षा बजट में भी जबरदस्‍त वृद्धि हुयी है। भारत अपनी रक्षा तैयारी पर सबसे ज्यादा रकम खर्च करता है। साल 2016 में भारत का सैन्य खर्च 8.5 फीसद रहा और भारत ने सेना पर 55.9 बिलियन डॉलर खर्च किए। 2012 से 2016 के बीच दुनिया के कुल शस्त्र आयात में भारत की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत रही।
भारत के पास इस समय बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा है। अर्जुन टैंक, तेजस फाइटर जेट इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसके अलावा भारत धनुष तोप, मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम पिनाका, इंन्सास राइफल, बुलेटप्रूफ जैकेट-हेलमेट, सेना के लिए विशेष ट्रक-गाड़ियां, मिसाइल, अरिहंत पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे तमाम हथियार और सैन्य उपकरण बना रहा है। वहीं अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन भारत में F-16 लड़ाकू विमान का कारखाना खोलने में रुचि दिखा रही है।

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