भारत और आसियान देशों के संबंध हुए बेहतर, समुद्री क्षेत्र में सहयोग के लिए तंत्र बनाने पर बनी सहमती

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आसियान सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रामायण, बौद्ध धर्म और इस्लाम का साझा इतिहास भारत को आसियान देशों से जोड़ता है. भारत आसियान के मूल सिद्धांत शांति और सामाजिक सद्भाव के साथ हम संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं. आसियान नेताओं का स्वागत करते हुए PM ने कहा कि भारत और आसियान देशों के संबंध बेहतर हुए हैं. पिछले 25 सालों में हमारा व्यापार 25 गुना बढ़ा है, हम व्यापारिक संबंधों को और बेहतर बनाना चाहते हैं.
इसके पूर्व आसियान सम्मेलन में हिस्सा लेने आये नेताओं का राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य सबका स्वागत किया. इसके बाद विदेश मंत्रालय की सचिव (ईस्ट) प्रीति सरन ने बताया कि मोदी ने आसियान नेताओं के साथ 6 द्विपक्षीय बैठकों में आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की.
दो दिन तक चलने वाले भारत आसियान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए वियतनाम, कंबोडिया, म्यांमार, फिलीपीन्स, थाईलैंड, सिंगापुर और ब्रुनेई के शासनाध्यक्ष नई दिल्ली पहुंचें हुए हैं. चीन के साथ तल्ख होते रिश्तों के बाद अपनी ‘लुक ईस्ट नीति’ को धार देने में जुटे भारतीय कूटनीति के लिए यह सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण है. एशिया के सबसे मजबूत संगठन आसियान के दस सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों या उनकी सरकारों के प्रमुखों के साथ PM मोदी की इस बैठक पर एशिया की ही नहीं, दूसरे महाद्वीपों के देशों की भी नजरें टिकी हुई हैं. क्योंकि भारत इन देशों के रक्षा क्षेत्र में अपना बड़ा बाजार टटोल रहा है. यह पहला मौका है जब गणतंत्र दिवस समारोह में एक साथ दस देशों के राष्ट्र प्रमुख राजकीय अतिथि होंगे.
सभी देशों के प्रमुखों के साथ PM मोदी की द्विपक्षीय बैठक के अलावा आसियान-भारत संयुक्त बैठक भी हुयी, जिसमें समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग सबसे अहम विषय रहा. आसियान देशों के पास समुद्री क्षेत्र में चीन के दावे को लेकर हर तरफ बेचैनी मची हुयी है. दक्षिण चीन सागर इन सभी विवादों की जड़ है. जानकार मानते हैं कि इस बैठक में आसियान के सभी सदस्य देश यह भी तौलने की कोशिश करेंगे कि भारत समुद्री क्षेत्र में उनके हितों की सुरक्षा करने की कितनी क्षमता रखता है.
चीन के पूरे क्षेत्र में बढ़ते दबदबे पर अभी तक बेहद धीमी स्वर में प्रतिक्रिया दे रहे भारत की आवाज हाल के वर्षों में काफी बुलंद हुई है. डोकलाम और वन बेल्ट-वन रोज जैसे मुद्दे पर जिस तरह से भारत ने जापान, अमेरिका व अन्य देशों का समर्थन हासिल किया है, उससे आसियान देशों की उम्मीदें काफी बढ़ी हैं. साथ ही भारत ने जमीनी व समुद्री मार्ग से आसियान देशों को जोड़ने की अपनी नई योजना का खुलासा भी कर दिया है. इस बारे में मोदी की आसियान नेताओं के साथ और खुलकर बात हुयी. खास तौर पर भारत-म्यांमार-थाईलैंड के बीच बनने वाली सड़क परियोजना को आसियान के दूसरे देशों के बीच ले जाने की रणनीति पर चर्चा हुयी. उधर भारत द्वारा हाल ही में जापान, आस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ नई रणनीतिक गठबंधन बनाने की शुरुआत को लेकर भी आसियान के देशों में कुछ चिंताएं हैं, जिसको मोदी ने द्विपक्षीय बैठकों में दूर किया.
पूर्व नौकरशाहों का मानना है कि भारत और आसियान देशों के बीच वर्ष 2012 से ही चले आ रहे रणनीतिक संबंधों की प्रगति अब ज्यादा उल्लेखनीय तरीके से होने की उम्मीद है. खासतौर पर रक्षा क्षेत्र में संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि भारत अपने कई आधुनिक हथियारों के लिए भी आसियान देशों से बात कर रहा है. राजधानी दिल्ली में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारत-आसियान मैत्री पार्क का उद्घाटन किया, लुटियंस दिल्ली के मध्य में स्थित तुगलक क्रीसेंट में आयोजित समारोह में आसियान के महासचिव ली लूंग मिन्ह ने भी शिरकत की है.

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