नरेंद्र मोदी की सरकार ने दो साल पहले ही सरकारी बैंकों के फंसे हुए कर्ज से निपटने की योजना तैयार की थी, तब इसे बहुत कठिन और जटिल टास्क माना जा रहा था। केंद्र ने पिछले साल इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड, 2016 लाकर इस पर शिकंजा कसने की शुरुआत की थी और अब कई अन्य तरीकों से इसे मजबूती दी जा रही है।
सरकार की ओर से इस दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा कदम भारतीय रिजर्व बैंक को बैड लोन से निपटने की ताकत दिए जाने के लिए नया कानून लाना है। सोमवार को ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में बैंकिंग रेग्युलेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2017 पेश किया था। यह नया कानून बैंकों को डिफॉल्टर्स के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी ऐक्ट के तहत कार्रवाई करने का अधिकार देगा।
सरकार के ये प्रयास इंडिया इंक के लिए कड़े संदेश की तरह हैं कि भविष्य में डिफॉल्टर होना उन्हें खतरनाक स्थिति में ला देगा। ऐसे कई प्रयास हो रहे हैं जिससे धीरे-धीरे डिफॉल्टर कंपनियों पर शिकंजा कसा जा सके तथा अन्य लोगों को डिफॉल्ट न करने का कड़ा संदेश भी दिया जा सके।


केंद्र सरकार ने मई में एक अध्यादेश जारी किया था, जिसकी जगह यह कानून लेगा। यही नहीं फंसे हुए कर्ज के निपटारे के लिए RBI के पास प्रस्ताव पारित करने और बैंकिंग कंपनियों को फंसे हुए कर्ज के निपटारे में मदद करने वाली अथॉरिटीज एवं कमिटियों में नियुक्ति एवं मंजूरी का अधिकार भी होगा। इस अध्यादेश के चलते ही RBI को 12 बड़ी डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की ताकत मिली है। RBI ने बैंकरप्सी कोड के तहत जिन 12 कंपनियों के खिलाफ ऐक्शन शुरू किया है, उनमें एस्सार स्टील और भूषण स्टील जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इनके मामले में नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल को रेफर कर दिए गए हैं।
सरकार बैड लोन पर शिकंजा कसने के साथ ही कंपनियों को डिफॉल्ट करने से हतोत्साहित भी कर रही है। सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया चाहता है कि कंपनियां पेमेंट से चूकने के मामलों का खुलासा करें। यदि ऐसा नियम आता है तो लिस्टेड कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज को बैंक लोन के इंटरेस्ट या किस्त से चूकने की जानकारी भी देनी होगी। सेबी का कहना है कि इससे वित्तीय अनुशासन बना रहेगा और शेयरहोल्डर्स को पूरी जानकारी मिल सकेगी।
पेमेंट से चूकने पर सूचना देने की अनिवार्यता के नियम से कंपनियों में खासी चिंता है। पेमेंट में देरी की जानकारी मिलने से कंपनी के स्टॉक वैल्यूएशन पर बड़ा असर होगा। आम लोगों को जानकारी होने की व्यवस्था के अभाव के चलते अब तक कंपनियां पेमेंट डिफॉल्ट के मामलों को गंभीरता से नहीं लेती थीं।

भारतीय रिजर्व बैंक ने NPA वाले 500 खाताधारकों की पहचान की है, जिनके पास सबसे ज्यादा राशि फंसी हुई है। यही नहीं सिर्फ इन्सॉल्वेंट अकाउंट ऐसे हैं, जिनके पास करीब 10 लाख करोड़ रुपये के NPA का 25% हिस्सा फंसा हुआ है। RBI इन अकाउंट होल्डर्स के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के तहत कार्रवाई करने की तैयारी में है। हालांकि RBI ने इन 12 डिफॉल्टर्स के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन बैंकर्स का कहना है कि इनमें भूषण स्टील, एस्सार स्टील, लैंको इन्फ्राटेक, आलोक टेक्सटाइल्स जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं।
रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा कि आंतरिक सलाहकार समिति ने फिलहाल NPA वाले बड़े अकाउंट्स पर फोकस करने पर सहमति जताई है। अब 500 बड़े NPA अकाउंट्स पर बैंकरप्सी कोड के तहत कार्रवाई की शुरुआत की जाएगी। 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के NPA वाले अकाउंट्स के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के तहत कार्रवाई करने की सिफारिश की गयी है।
RBI के अनुसार आतंरिक सलाहकार समिति ने कुल NPA की 25 फीसदी राशि दबाकर रखने वाले 12 बैंक खाताधारकों के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के तहत तत्काल कार्रवाई की सिफारिश की है। जबकि अन्य बैंक अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए बैंकों से छह महीने के भीतर प्लान तैयार करने को कहा गया है।

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