ब्रिक्स सम्मेलन 2017 : मोदी की कूटनीति से पाकिस्तान को जोरदार झटका

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ब्रिक्स के घोषणापत्र में आतंकवाद का जिक्र होने को आतंकवाद के खतरे को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की बढ़ती संवेदनशीलता मानी जाये या भारत की दृढ़ व सटीक कूटनीतिक पहल का नतीजा माना जाये. ब्रिक्स घोषणा पत्र भारत के लिए एक जीत से कम नहीं है.
घोषणापत्र में पहली बार पाकिस्तान के सहयोग से फल फूल रहे आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम दुनिया के अन्य खूंखार आंतकी संगठनों के साथ जोड़ा गया है. कुछ ही दिनों पूर्व अमेरिका की नई अफगान नीति आने से परेशान पाकिस्तान के लिए यह दोहरा धक्का है. क्योंकि इन संगठनों के नाम को शामिल करने के लिए चीन की भी रजामंदी है.
घोषणापत्र में कहा गया है कि हम इस क्षेत्र में तालिबान, अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा हक्कानी नेटवर्क और जैश-ए-मोहम्मद द्वारा की जा रही हिंसा को लेकर और इसकी सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंतित है. हम विश्व और ब्रिक्स देशों में हुए सभी आतंकी हमलों की भर्त्सना करते हैं और आतंकवाद की निंदा करते हैं. घोषणापत्र में आतंकवादी संगठनों द्वारा की जा रही हिंसा की निंदा भी की गयी है.
चीन में जारी ब्रिक्स घोषणा पत्र को भारत की कूटनीतिक जीत मानने की बड़ी वजह यह है कि पिछले वर्ष गोवा में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की तमाम कोशिशों के बावजूद पाक परस्त इन आतंकी संगठनों का नाम घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया गया था. तब चीन और कुछ हद तक रूस ने भी भारत की कोशिशों को धक्का दिया था, लेकिन इसबार न सिर्फ इन संगठनों का नाम लिया गया बल्कि आतंक के खिलाफ जो अन्य बातें भी कहीं गयीं वह भारत की चिंताओं के प्रति दुनिया में बढ़ती संवेदनशीलता भी स्पष्ट करती है. घोषणा पत्र में पहली बार हर तरह की आतंकी गतिविधियों की भ‌र्त्सना करते हुए कहा गया है कि- ‘किसी भी वजह से आतंकी घटनाओं को जायज नहीं ठहराया जा सकता. आतंकी संगठनों के साथ इन्हें मदद करने वाले संगठनों को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.


ब्रिक्स घोषणा पत्र में जिस तरह से जैश-ए-मोहम्मद का नाम लिया गया है उससे यह सवाल उठता है कि क्या अब इस संगठन के मुखिया मौलाना मसूद अजहर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की राह खुलेगी. हाँलाकि अभी तक अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव UN में सिर्फ चीन के वीटो की वजह से गिरता रहा है. पिछले महीने की शुरुआत में भी ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका की मदद के बावजूद चीन के अडि़यल रवैये से अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया था, जिसपर नया प्रस्ताव अब अक्टूबर, 2017 के बाद ही लाया जा सकता है. ब्रिक्स घोषणा पत्र के आधार पर अब भारत इसे और मजबूती से रखेगा तब पता चलेगा कि चीन का रवैया बदला या नहीं.
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को मुख्य मुद्दा बताते हुए कहा कि शांति और विकास के लिए सहयोग जरूरी है. हमारा मिशन गरीबी को हटाना, स्वास्थय, सफाई, कौशल, खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समानता, शिक्षा सुनिश्चित करना है. ब्रिक्स देश ISA के साथ मिलकर सोलर एनर्जी पर काम कर सकते हैं. एक ताकतवर ब्रिक्स पार्टनरशिप और इनोवेशन विकास का जरिया बन सकते हैं. एनडीबी ने ब्रिक्स देशों में विकास के लिए लोन देने की शुरुआत की है.
सम्मेलन में शी जिनपिंग ने कहा कि जब विश्व में इतने बदलाव हो रहे हैं तो ब्रिक्स का सहयोग और महत्वपूर्ण बन गया है. हमारे राष्ट्रीय मतभेदों के बावजूद ब्रिक्स के सभी 5 देश विकास के एक ही स्तर पर हैं. अंतरराष्ट्रीय शांति और विकास से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए हमें एक साथ एक आवाज में बोलना होगा. विश्व के साथ हमारे नजदीकी रिश्ते की यह जरूरत है कि हम ग्लोबल गवर्नेंस में बढ़चढ़ कर भाग लें. हमारी सहभागिता के बिना बहुत सी वैश्विक चुनौतियों का हल सफलतापूर्वक संभव नहीं है. बिजनस ऑपरेशन और बैंक के विकास के लिए चीन एनडीबी प्रॉजेक्ट में 4 मिलियन डॉलर का योगदान देगा.

सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूरी गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया. मुलाकात के दौरान मोदी और जिनपिंग के बीच खासी गर्मजोशी देखने को भी मिली. मोदी जब जिनपिंग के पास पहुंचे तो दोनों नेताओं ने काफी देर तक हाथ मिलाया, इस दौरान दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी.

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