सरकार ने आज मंगलवार कहा कि बैंक खातों में न्यूनतम अधिशेष नहीं रखने के लिए बैंक दंडात्मक शुल्क लगा सकते हैं लेकिन यह लेवी उपयुक्त स्तर की और खाता सेवाओं की औसत लागत के अनुरूप ही होनी चाहिए. वित्त राज्यमंत्री संतोष कुमार गंगवार ने उच्च सदन को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार बैंकों को अपने मौजूदा खाताधारकों को कम से कम एक माह पहले ही न्यूनतम निर्धारित शेष बचत में बदलाव के बारे में और नहीं तो उस पर लगाए जाने वाले शुल्क के बारे में सूचित करना चाहिए.

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने अपने ग्राहकों को झटका देने की तैयारी कर ली है. एसबीआई एक अप्रैल से बैंक खाते में न्‍यूनतम राशि न रखने वालों से जुर्माना वसूलेगा. बैंक ने मिनिमम बैलेंस की सीमा शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के हिसाब से तय की है. एसबीआई ने तय किया है कि महानगरों में बैंक अकाउंट रखने वालों को 5000 रुपए मिनिमम बैलेंस रखना होगा. शहरी क्षेत्रों में यह सीमा 3 हजार रुपए, सेमी अरबन क्षेत्र 2 हजार रुपए और गांव की शाखाओं में बैंक खाता रखने वालों को एक हजार रुपए मिनिमम बैलेंस रखना होगा. एक अप्रैल से ऐसा नहीं करने वालों पर पेनल्‍टी लगाई जाएगी।.

महीने में तीन बार से अधिक लेनदेन पर लगेगा चार्ज
देश के सबसे बड़े बैंक ने महीने में तीन बार बचत खाताधारकों को बिना शुल्क के नकद धन जमा कराने की अनुमति दी है. इसके बाद नकदी के प्रत्येक लेनदेन पर 50 रुपए का शुल्क और सेवाकर ग्राहकों को देना होगा. चालू खातों के मामले में यह शुल्क अधिकतम 20,000 रुपए भी हो सकता है. एसबीआई के संशोधित शुल्कों की सूची के अनुसार खातों में मासिक औसत बकाया (एमएबी) रखने में नाकाम रहने पर 100 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और इस पर सेवाकर भी देय होगा.

शहरी क्षेत्र के खाताधारकों के खाते में यदि न्यूनतम राशि 5,000 रुपए का 75 प्रतिशत होगी तो 100 रुपए का शुल्क और सेवाकर जुर्माना स्वरूप देना होगा. यदि यही बकाया न्यूनतम राशि के 50 प्रतिशत अथवा उससे भी कम है तो ऐसी स्थिति में बैंक 50 रुपए और सेवाकर वसूलेगा. मासिक औसत शेष यानी एमएबी शुल्क बैंक शाखा की जगह के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है. ग्रामीण शाखाओं के मामले में यह न्यूनतम रह सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक ने इस संबंध में बैंकों को अनुमति दे दी है.

एटीएम से तीन बार से ज्यादा निकासी पर लगेगा शुल्क
स्टेट बैंक ग्राहकों द्वारा इसी प्रकार एक माह में अन्य बैंक के एटीएम से तीन बार से ज्यादा निकासी पर 20 रुपए का शुल्क देय होगा. एसबीआई के एटीएम से पांच से ज्यादा आहरण करने पर हर बार 10 रुपए का शुल्क लिया जाएगा. हालांकि, एसबीआई खुद के एटीएम से तब कोई शुल्क नहीं लगाएगी जबकि संबंधित व्यक्ति के खाते में 25,000 रुपए से अधिक बकाया रहता है. वहीं खाते में एक लाख रुपए से अधिक बकाया रहने पर स्टेट बैंक ग्राहक यदि दूसरे बैंकों के एटीएम से कितनी भी बार निकासी करता है तो कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. डेबिट कार्डधारकों से एसएमएस अलर्ट भेजने के लिए एसबीआई हर तिमाही 15 रुपए का शुल्क लेगा जो त्रैमासिक आधार पर औसत 25,000 रुपए की बकाया राशि खाते में रखते हैं. बैंक यूपीआई के माध्यम से 1,000 रुपए तक के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लेगा.

आरबीआई के अनुसार एक अप्रैल 2017 से स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद और भारतीय महिला बैंक का विलय हो जाएगा. साथ ही उनके कस्टमर एसबीआई के बन जाएंगे. पांच बैंकों के विलय से एसबीआई का एसेट बेस करीब 37 लाख करोड़ रुपए (555 अरब डॉलर) होगा. साथ ही 22500 ब्रांच और 58 हजार एटीएम होंगे. नए बैंक के 50 करोड़ से ज्यादा ग्राहक होंगे. जिसके जरिए वह दुनिया के टॉप-50 बैंकों में शामिल हो जाएगा.

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