लोकसभा चुनाव 2019 की घंटी बजते ही जहाँ सभी दल पैसे और रसूख वाले प्रत्याशी की खोज में रात- दिन एक किये हुए हैं वहीं अगर एक अत्यंत साधारण परिवार की महिला को टिकट मिल जाये तो आज के माहौल में इसे चमत्कार ही कहा जायेगा. यह चमत्कार हुआ है उड़ीसा के आस्का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में जहाँ प्रमिला बिश्नोई नामक बेहद गरीब एक जमीनी कार्यकर्त्ता को सत्ताधारी दल ने अपना उम्मीदवार बनाया है.
प्रमिला बिश्नोई सेल्फ हेल्फ ग्रुप (SHG) से जुड़ी हुयी हैं और पिछले 18 वर्षों से मिड डे मील के जरिए अपर प्राइमरी स्कूल के बच्चों की सेवा कर रही हैं. प्रमिला बिश्नोई एक किसान हैं, जिनके पास एक एकड़ से भी कम जमीन है. उनका बड़ा बेटा दिलीप चाय बेचता है जबकि छोटा बेटा रंजन बाइक रिपेयरिंग की एक गैरज में काम करता है. उनकी दो शादीशुदा बेटियां भी हैं. उनके परिवार की कुल आय दस हजार रुपए से बारह हजार रुपए मासिक है.
बताया जाता है कि आर्थिक हालत खराब होने के बावजूद प्रमिला ने SHG के जरिए इलाके की महिलाकों के सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाई है. उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि इलाके में उनका गांव खुले में शौच से मुक्त घोषित हो चुका है. अपने इलाके में वो पर्यावरण संरक्षण के लिए भी काम करती हैं और “पिकॉक संरक्षण समित” बनाकर लोगों को पर्यावरण के लिए जागरूक करती रही हैं.
ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) ने अपने इस जमीनी कार्यकर्ता को लोकसभा 2019 के लिए टिकट देकर एक नयी मिसाल कायम की है. बीजू जनता दल के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सोमवार को प्रमिला बिश्नोई को आस्का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से टिकट देने का ऐलान किया. मुख्यमंत्री पटनायक ने बीस साल पहले इसी लोकसभा क्षेत्र से अपना राजनैतिक कैरियर शुरू किया था.
मुख्यमंत्री ने लोकसभा प्रत्याशी के रूप में उनके नाम का ऐलान करते हुए कहा कि जब प्रमिला को संसद भवन में प्रवेश करते हुए देखूंगा तो दिल को काफी सुकून मिलेगा और बेहद खुशी होगी.


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