बेनामी संपत्ति मामले में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से साढ़े सात घंटे हुयी पूछताछ

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बेनामी संपत्ति मामले में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे छोटे पुत्र तेजस्वी प्रसाद यादव से आयकर विभाग ने मंगलवार को सुबह 11 बजे से शाम 6:30 बजे तक गहन पूछताछ की. उनसे एक-एक प्लॉट और फ्लैट के बारे में जानकारी ली गयी.
इस मामले में हालांकि लालू प्रसाद स्वयं मुख्य अभियुक्त हैं, लेकिन फिलहाल उनसे पूछताछ नहीं हुई है. CBI इनके खिलाफ पद का दुरुपयोग कर करोड़ों की अवैध संपत्ति जमा करने के मामले में FIR दर्ज कर चुकी है और उसी क्रम में बेनामी संपत्ति से संबंधित मामले में आयकर विभाग जांच कर रहा है. जांच में इनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी बेनामी संपत्ति के मामले में सामने आये हैं.
इस मामले में पूछताछ के लिए राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को नयी दिल्ली बुलाया गया था, लेकिन वहां जाने में दोनों ने निजी कारणों से असमर्थता जताते हुए नहीं गये. जिसके बाद विभाग की टीम ने नयी दिल्ली से पटना आकर ही पूछताछ करने का फैसला किया. नयी दिल्ली में आयकर उपायुक्त शैलेंद्र कुमार के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम के साथ पटना के अधिकारी भी इस पूछताछ में शामिल रहे. टीम ने पटना में मौजूद लालू परिवार की तमाम संपत्ति के बारे में जानकारी ली.
आयकर की विशेष टीम ने राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से सभी पहलुओं पर साढ़े सात घंटे तक पूछताछ की. इस दौरान बाद में राबड़ी देवी की बड़ी बेटी सांसद मीसा भारती भी मां को ढाढ़स बंधाने के लिए पहुंचीं. उनसे किसी तरह की कोई पूछताछ नहीं की गयी. मां और बेटे से अलग-अलग पूछताछ हुई और दोनों से करीब सामान समय तक और तकरीबन एक तरह के ही प्रश्न पूछे गये. इनमें अधिकतर का उत्तर देने से राबड़ी देवी बचती दिखीं या उन्होंने गोल-मटोल जवाब दिया. मां और बेटे दोनों के चेहरे पर तनाव और परेशानी साफ तौर पर दिख रही थी.

राबड़ी देवी से पूछा गया कि मॉल का इतना बड़ा प्लॉट आपके परिवार ने कब और कैसे खरीदा? जमीन के दर्जनों प्लॉट और फ्लैट के खरीदने के लिए पैसे का स्रोत क्या है? लालू प्रसाद पैसे कहां से लाये थे? क्या उन्हें होटल व्यवसायी कोचर बंधु ने जो घूस दी थी, उससे ही जमीन खरीदी गयी है?
तेजस्वी यादव से जो कुछ अलग सवाल पूछे गये, उनमें प्रमुख थे कि जब वह बालिग हुए तो डिलाइट कंपनी का नाम और मालिकाना हक बदलते हुए ‘लारा प्राइवेट लिमिटेड’ कर दिया गया, जिसमें वह अपनी मां के साथ निदेशक हैं. इसी कंपनी के नाम पर मॉल बन रहा है. इसके लिए पैसे कहां से आये? किन-किन लोगों ने इसमें निवेश किया है?
लालू प्रसाद की कंपनी ‘लारा प्रोजेक्ट एलएलटी’ के नाम से फुलवारीशरीफ अंचल क्षेत्र के जलालपुर मौजे में सबसे ज्यादा सात प्लॉट हैं. इनकी खाता संख्या 90, तौजी संख्या- 5519 और प्लॉट संख्या 49, 54, 55 और 56 है. प्लॉट संख्या 55 और 56 में 27.75 डिसमिल के चार प्लॉट हैं, जबकि 54 नंबर प्लॉट 23.75 डिसमिल का और अन्य सभी प्लॉट 27.75 डिसमिल के हैं. ये सभी प्लॉट एक ही स्थान पर हैं और इन सभी को मिला कर ही राज्य का सबसे बड़ा मॉल बनाने की तैयारी चल रही थी. जिसका कुल रकवा करीब 162.50 डिसमिल (करीब 55 कट्ठा) है.
इसके अलावा चितकोहरा मुहल्ले में खेसरा संख्या 437 और खाता संख्या 151 में 9.84 डिसमिल का प्लॉट और इसी के पास 553 खाता संख्या में 183 नंबर और 1161 नंबर प्लॉट है, जिसका रकवा 21.68 डिसमिल है. इसके अलावा गोला रोड में मौजूद एक अपार्टमेंट में छह फ्लैट भी सामने आये हैं. इस तरह के अन्य कई प्लॉट भी आयकर विभाग के रडार पर बताये जाते हैं.

आयकर विभाग ने कथित बेनामी संपत्ति सौदों के मामलों में 16 मई को दिल्ली और आसपास के 22 जगहों पर छापे मारे थे. विभाग ने बेनामी संपत्ति मामले में लालू के परिवार के छह लोगों के खिलाफ बेनामी प्रॉपर्टी एक्ट के तहत कार्रवाई की थी. इसमें लालू की पत्नी राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और उनके पति शैलेष, बेटी रागिनी और बेटी चंदा की प्रॉपर्टी जब्ती का नोटिस जारी हुया. नोटिस में दिल्ली की जमीन, प्लॉट और भवन तथा पटना की 9.32 करोड़ की कीमत वाली जमीन को जब्त करने का आदेश शामिल है.
रेलवे टेंडर आवंटन को लेकर लालू यादव के खिलाफ 7 जुलाई को सीबीआई ने सुबह से ही देश भर के 12 ठिकानों पर छापेमारी की और ठीक 24 घंटे बाद लालू की बेटी और दामाद के खिलाफ भी दिल्ली के तीन जगहों पर छापेमारी हुई. उनपर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है. 8000 करोड़ की ब्लैकमनी को व्हाइट कराने के मामले की जांच चल रही है.


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