बिहार में लालूप्रसाद के साथ कांग्रेस का गठबंधन जारी रहेगा : राहुल गाँधी

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अपनी ही सरकार का अध्यादेश लालूप्रसाद के मुद्दे पर फाड़ देने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज की परिस्थिति में भाजपा के ख़िलाफ संघर्ष में उनका साथ नहीं छोड़ेंगे। बिहार कांग्रेस में टूट की आशंकाओं के बीच प्रदेश के विधायकों के साथ अपनी बैठक में राहुल गाँधी ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी राजद के साथ ही रहेगी।
बीते वर्षों में लालू के साथ राजनीतिक मंच साझा नहीं करने वाले राहुल गाँधी बिहार के 21 विधायकों व दो विधान पार्षदों से मुलाकात कर पार्टी पर छाये विभाजन के संकट को फिलहाल तो टाल दिया, लेकिन साथ ही नाराज विधायकों की राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का साथ छोड़ने की सलाह नहीं मानी। भ्रष्टाचार पर एक स्टैंड लेकर राहुल गांधी ने अपनी अलग छवि बनाने की जो कवायद की थी, उसपर स्वयं कुठाराघात करते हुए उन्होंने अपने उपर राजनीतिक हमले का अवसर विरोधियों को दे दिया है साथ ही अपनी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगा दी है।


राहुल गाँधी ने बिहार कांग्रेस में फेरबदल के संकेत देते हुए कहा कि प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा जल्द ही की जाएगी। बैठक में पहुंचे विधायकों की संख्या से साफ है कि कांग्रेस विधायक दल को तोडऩे की कसरत फ़िलहाल पूरी होने वाली नहीं है। पार्टी सूत्रों ने कहा कि अशोक चौधरी और सदानंद सिंह ही विधायकों को लालू प्रसाद के विरोध के नाम पर तोडऩे की कोशिश कर रहे थे। लालू के साथ रहने में राजनीतिक नुकसान की बात के बहाने ही दोनों ने करीब 13 विधायकों से हस्ताक्षर भी कराए थे। मगर कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ विधायक बने जदयू से आए चार-पांच लोगों के अलावा पार्टी के 27 में से 21 विधायकों ने केंद्रीय नेतृत्व में भरोसा जताया है।
कांग्रेस में फूट को लेकर अटकलों को कांग्रेस नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना में नरम रवैया बरतने से बल मिला। साथ ही महागठबंधन सरकार गिरने के बाद उसमें शामिल रहे राजद के मंत्रियों को बंगला खाली करने का नोटिस तो दिया गया पर कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में से अशोक चौधरी और अवधेश कुमार सिंह से सरकारी बंगले खाली नहीं कराए गए। इससे भी अटकलों को बल मिला। उधर बिहार की नई राजग सरकार में आठ मंत्रियों की जगह अभी भी खाली है।
कांग्रेस नेतृत्‍व भाजपा के खिलाफ लालू प्रसाद यादव को मजबूत करने का पक्षधर है। लेकिन, बिहार कांग्रेस के नेताओं का एक धड़ा मानता है कि लालू का साथ देने पर पार्टी को नुकसान झेलना पड़ सकता है। पार्टी पर छाया आसन्‍न संकट फ़िलहाल भले ही टल गया हो, मगर आगे की राह आसान नहीं। राहुल गाँधी द्वारा यह साफ करने के बाद कि आगे का सफर लालू प्रसाद के साथ करना है, नाराज पार्टी विधायकों को रोकना आसान नहीं होगा। क्योंकि कांग्रेस विधायकों को लगता है कि राज्य में सिर्फ ‘MY’ समीकरण से नीतीश के नेतृत्व वाले NDA से मुकाबला आसान नहीं होगा।

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