बिहार की जनता अगले नगर निकाय चुनाव में नगर निगम के महापौर, नगर पालिका व नगर परिषद के चेयरमैन का सीधे चुनाव करेगी. अब पदों के लिए अप्रत्यक्ष नहीं बल्कि प्रत्यक्ष चुनाव होंगे. साथ ही अब नगर निकायों के चुनाव में राजनीतिक दलों की भी सीधी भागीदारी होगी, राज्य सरकार इसका प्रस्ताव बना रही है.
बिहार में अबतक नगर निकायों के चुनाव में जीते पार्षद या सदस्य ही महापौर, नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव करते रहे हैं. जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में पहले से ही जनता सीधे मेयर या अध्यक्ष चुनती रही है. बिहार सरकार ने भी अब नगर निकायों के चुनाव में बदलाव के लिए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश नगर विकास विभाग को दिया है. अब ये चुनाव पार्टी आधारित होंगे, राजनीतिक दल उम्मीदवार घोषित करेंगे तथा प्रत्याशी चुनाव में राजनीतिक दलों के सिंबल का भी इस्तेमाल करेंगे. प्रस्ताव तैयार करने में विभाग डेवलपमेंट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (DMI) की भी मदद लेगी.
राज्य में कुल 143 नगर निकाय हैं. इन निकायों के चुनाव अभी पार्टी आधारित नहीं होते हैं. यह दीगर बात है कि पार्टियां पर्दे के पीछे से इन चुनावों में पूरी ताकत लगाती रही हैं. अब तक अपने समर्थित प्रत्याशियों के हारने-जीतने का जश्न विभिन्न राजनैतिक दल मनाते रहे हैं. महापौर और अध्यक्षों को भी अब तक पार्षद और सदस्य ही चुनते रहे हैं. इसमें सत्ता के दुरुपयोग और धन-बल के प्रयोग के आरोप भी लगते रहे हैं.



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