सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपर बालिका गृह यौन शोषण मामले में बिहार पुलिस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए सभी सत्रह शेल्टर होम्स की जांच CBI को सौंप दी. साथ ही कोर्ट ने कहा कि जांच कर रहे किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा.
कोर्ट ने बिहार सरकार की इस मामले में जवाब देने के लिए कुछ और समय देने की मांग को ठुकराते हुए कहा कि इस मामले की जांच कर रही CBI टीम को बिहार सरकार तमाम सुविधाएं मुहैया करवाए. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने CBI से पांच मिनट में जवाब माँगा कि वो बिहार के सभी शेल्‍टर होम के मामलों की जांच के लिए तैयार हैं या नहीं? CBI ने जवाब दिया कि हम जांच को तैयार हैं, साथ ही कोर्ट से कहा कि मुजफ्फरपुर मामले में सात दिसंबर तक केस दायर कर लिया जाएगा.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर बिहार सरकार और बिहार की पुलिस ने इस मामले की सही से जांच कराई होती तो CBI जांच की नौबत नहीं आती. कोर्ट ने कहा कि टिस की रिपोर्ट में जिन बिंदुओं पर जांच की बात कही गई है, उन सभी की सही से जांच करायी जाए.
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को मामले की सुनवाई के क्रम में बिहार के मुख्य सचिव की उपस्थिति में सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था आपने वक्त पर FIR तक दर्ज नहीं की, आप जांच कैसे कर रहे हैं? बच्चियों के साथ एेसा अमानवीय व्यवहार हुआ और आप कह रहे हैं कि कुछ हुआ ही नहीं. पुलिस ने धारा 377 के तहत मुकदमा भी दर्ज नहीं किया गया, ये अमानवीय और शर्मनाक है. जिन शेल्टर होम्स में बच्चों के साथ एेसा दुर्व्यवहार हुआ क्या वो बच्चे इस देश के नहीं?
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) मुंबई की ‘कोशिश टीम’ ने बिहार के बालिका आश्रय गृह पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को मार्च में सौंपी. रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि किस तरह आश्रय गृह में रहने वाली लड़कियों से दुर्व्यवहार किया जाता था. रिपोर्ट के बाद भी सरकार ने संज्ञान नहीं लिया. विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में टिस की रिपोर्ट को एजेंडे में शामिल किया गया और इसपर इतनी ही चर्चा हुई कि रिपोर्ट में बताई गई कमियों को दूर किया जाए. कहीं भी प्राथमिकी दर्ज करने की बात नहीं कही गई. बाद में जब मामले ने तूल पकड़ा तो विभाग ने सभी जिलों को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया. इसके बाद ब्रजेश ठाकुर के संरक्षण में चलनेवाले बालिका गृह के खिलाफ 29 मई को प्राथमिकी भी दर्ज की गई.


जब जांच शुरू हुई तो बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर का धीरे-धीरे पर्दाफाश होता गया. शेल्टर होम चलाने के बदले बिहार सरकार से ब्रजेश ठाकुर को करोड़ों रुपए मिलते थे. ठाकुर काफी रसूख वाला था, जिसकी पहुंच सरकारी महकमे में अधिकारियों और नेताओं तक थी. FIR होने पर भी पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई. उसने अवैध तरीके से NGO के नाम पर करोड़ों की संपत्ति बना ली थी. ठाकुर बाहरी दुनिया में समाजसेवी व पत्रकार था. पुलिस चार्जशीट, केस डायरी व वरीय पुलिस अधिकारियों के पर्यवेक्षण रिपोर्ट में उसके साथ शामिल दलालों व कारिंदों की पूरी फेहरिस्त है, जिसमें मधु, संजय उर्फ झूलन व रमाशंकर मुख्य हैं. आधा दर्जन लड़कियां भी इस रैकेट में शामिल बताई गयीं.
पुलिस के अनुसार ब्रजेश ठाकुर के धंधे में देह व्यापार से जुड़ी मधु मुख्य कर्ताधर्ता थी. सामाजिक जीवन में साफ सुथरी छवि रहे, इसके लिए वह संस्था के कार्यक्रमों में कार्यकर्ता की हैसियत से काम करती थी. ब्रजेश ठाकुर के अखबारों (प्रातः कमल, हालात-ए-बिहार और न्यूज नेक्स्ट) को सरकारी विज्ञापन नियमित मिलते थे.
बालिका गृह की बच्चियों ने पॉक्सो कोर्ट के मजिस्ट्रेट के सामने जो बयान दिेए हैं वो रोंगटे खड़े कर देती हैं. बच्चियों के अनुसार उन्हें रोज पीटा जाता था, नशीली दवाइयां दी जाती थीं और दुष्कर्म किया जाता था. एक बच्ची ने ब्रजेश ठाकुर की तस्वीर की शिनाख्त करते हुए कहा कि होम में उसे ‘हंटरवाला अंकल’ कहा जाता था, वह जब कमरे में दाखिल होते, तो हमारी रूह कांप जाती थी. एक किशोरी ने कहा कि उसे रात में नशीली दवाइयों का गहरा डोज दिया जाता था और जब वह सुबह जगती, तो उसके निजी अंगों में बेइंतहा दर्द होता था और वहाँ जख्म के निशान भी दिखते थे. महिला कर्मचारी को जब वो यह बताती तो वह अनसुनी कर देती. बच्चियों ने बताया कि जब वे विरोध करती थीं, तो उन्हें कई दिनों तक भूखा रखा जाता था. कुछ बच्चियों को रात को बाहर ले जाया जाता था और दूसरे दिन सुबह उन्हें वापस लाया जाता था. बालिका गृह में रात के अंधेरे में आनेवाले बाहरी लोगों को बच्चियां ने ‘तोंदवाला अंकल’, ‘मूंछवाला अंकल’ और ‘नेताजी’ के रूप में बताया.
पांच अप्रैल को टिस की रिपोर्ट विभाग के पास आने के बाद भी 17 अप्रैल को ब्रजेश के अल्पावास गृह को 25 लाख रुपये का फंड आवंटित किया गया. मामले के तूल पकड़ने पर विभाग ने आनन-फानन में ‘सेवा संकल्प’ NGO को ब्लैक-लिस्टेड किया. विभाग ने मामले में FIR दर्ज होने के बाद भी ब्रजेश ठाकुर के NGO को पटना में भिक्षुक गृह का टेंडर दे दिया.
इस कांड में बिहार सरकार के मंत्री से लेकर अधिकारी तक की संलिप्तता सामने आई है. समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति से ब्रजेश के ताल्लुकात का खुलासा होने के बाद मंजू वर्मा को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. CBI को मंत्री के घर से अवैध कारतूस मिले, आर्म्स एक्ट में FIR दर्ज होने के बाद मंजू वर्मा और उनके पति फरार हो गए. उनकी गिरफ्तारी को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और बिहार पुलिस पर तल्ख टिप्पणी की पर बिहार पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी. बाद में उनके पति और फिर उन्होंने कोर्ट में सरेंडर किया.



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