पटना के फ्रेजर रोड पर स्थित हसन इमाम वक्फ स्टेट की जमीन का फैसला शिया वक्फ बोर्ड के पक्ष में आने के बाद इसपर बने सेंट्रल मॉल, विशाल मेगा मार्ट, कौशल्या एस्टेट, वन मॉल, एक अखबार की बिल्डिंग, फजल इमाम कॉम्प्लेक्स, साकेत टावर सहित बंदर बगीचा की पांच बीघा जमीन एवं रिजवान पैलेस का मालिकाना हक शिया वक्फ बोर्ड का हो गया.
शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन इरशाद अली आजाद के अनुसार झारखंड के हजारीबाग सिविल कोर्ट ने एक टाइटल सूट में 90 साल बाद पटना फ्रेजर रोड स्थित हसन इमाम वक्फ स्टेट की जमीन पर बनी इमारतों का फैसला शिया वक्फ बोर्ड के पक्ष में दिया है. जिन संपत्तियों पर बोर्ड को मालिकाना हक मिला है उसकी कीमत इन दिनों कम से कम 2500 करोड़ रूपये है. फैसले के बाद स्टेट की जमीन पर बने सेंट्रल मॉल, विशाल मेगा मार्ट, कौशल्या एस्टेट, वन मॉल, एक अखबार की बिल्डिंग, फजल इमाम कॉम्प्लेक्स, साकेत टावर (एसपीवर्मा रोड) एवं बंदर बगीचा में 5 बीघा जमीन का मालिकाना हक शिया वक्फ बोर्ड का हो गया. 122 कट्‌ठा जमीन पर बने रिजवान पैलेस का मालिकाना हक भी बोर्ड को मिल गया है, फिलहाल इस भवन की देखरेख का जिम्मा जिला प्रशासन के पास है. इसके अलावा नेउरा में 106 बीघा जमीन का फैसला भी बोर्ड के पक्ष में आया है. कोर्ट के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है.
बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि बोर्ड ने पिछले तीन सालों में 40 केस जीता. वक्फ एक्ट के अनुसार वक्फ की संपत्ति को व्यावसायिक कार्य के लिए तीस वर्षों के लिए लीज पर देने का प्रावधान है. इन संपत्तियों का मालिकाना हक शिया वक्फ बोर्ड को मिल जाने के बाद अब इन इमारतों या अपार्टमेंटों में रह रहे या न कब्जे में रखने वालों को बोर्ड के अधीन आना होगा. बोर्ड उन्हें नोटिस देकर बुलाएगा और फिर बोर्ड के साथ उनका एग्रीमेंट होगा. फैसले के बाद बोर्ड के अलावा किसी दूसरे पक्ष का कोई अधिकार नहीं रह गया है, जल्द ही कोर्ट के निर्णय की कॉपी जिला प्रशासन को दी जाएगी.
चेयरमैन के अनुसार पटना के चर्चित बैरिस्टर हसन इमाम की संपत्ति पटना, हजारीबाग, गढ़वा, पलामू, भोजपुर, गुवाहाटी व देहरादून समेत कई अन्य शहरों में थीं. उन्होंने अपने आवास सहित सारी संपत्ति 1929 में वक्फ कर दी और 1931 में रजिस्ट्री हुई. उस वक्त शिया वक्फ बोर्ड वजूद में नहीं था, बिहार शिया वक्फ बोर्ड बनने के बाद 1948 में वक्फ संपत्ति को बोर्ड ने रजिस्टर्ड किया. इससे पहले 1934 में हाईकोर्ट का फैसला बोर्ड के पक्ष में आया था. बाद में 1993 और 2005 में भी हाईकोर्ट ने बोर्ड के पक्ष में फैसला दिया. हजारीबाग सिविल कोर्ट में टाइटल सूट चल रहा था, पिछले माह यह फैसला आया.
चेयरमैन के अनुसार हसन इमाम ने दो शादियां की थीं. पहली पत्नी को संपत्ति के दस आना का मुतवल्ली बनाया, जबकि छह आना का मुतावल्ली दूसरी अंग्रेज पत्नी को बनाया. पटना में उनकी संपत्ति के बंटवारे का केस हाईकोर्ट में गया जिसमें फैसला बोर्ड के पक्ष में आया. दूसरी पत्नी के बेटे सैयद अस्करी इमाम उर्फ टूटू इमाम हजारीबाग में बस गए. परिवार के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर टूटू इमाम ने हजारीबाग सिविल कोर्ट में 1988 में टाइटल सूट किया, उसके बाद कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड को नोटिस दिया.



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