फिलिस्तीन जल्द ही एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र बनेगा : मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिलिस्तीन के सबसे बड़े सम्मान ग्रेंड कॉलर से नवाजा गया। मोदी ने उम्मीद जताई कि फलस्तीन शांतिपूर्ण तरीके से जल्द ही एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र बनेगा।
मोदी ने महमूद अब्बास के साथ द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा कि फलस्तीन की खुशहाली और शांति के लिए बातचीत का रास्ता ही एक मात्र हल है। फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को उनके देश के लोगों के हितों के लिए भारत की प्रतिबद्धता के प्रति आश्वस्त किया और उम्मीद जताई कि फलस्तीन शांतिपूर्ण तरीके से जल्द ही एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र बनेगा। संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और फलस्तीन की चार दिन की यात्रा पर पहुंचे मोदी ने कहा कि वार्ता के जरिए यहां हिंसा खत्म होनी चाहिए तथा शांति का मार्ग निकलना चाहिए।
मोदी ने कहा कि फलस्तीन की तरह भारत भी युवाओं का देश है। उन्हें यहां के युवाओं से भी वही उम्मीदें हैं जो भारत के युवाओं से हैं। युवा हमारा भविष्य और उत्तराधिकारी हैं। इसलिए, दोनों देशों के बीच ज्ञान और विज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए हर साल इस उद्देश्य से एक-दूसरे के यहां आने-जाने वाले छात्रों की संख्या 50 से बढ़ाकर 100 की जाएगी। उन्होंने कहा कि फलस्तीन के साथ भारत का सदियों पुराना संबंध है और वर्तमान में भी भारत के लिए फलस्तीन का विशेष महत्व है। बेहतर कल के लिए दोनों देशों के बीच परस्पर सहयोग को मजबूत किया जाना आवश्यक है और इसके लिए ढांचागत विकास, तकनीकी, वित्त प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, संरचना विकास जैसे क्षेत्रों में एक दूसरे का सहयोग जरूरी है।
मोदी ने कहा कि इस क्रम में रामल्ला में टेक्नोलॉजी पार्क परियोजना शुरू की गई है और उस पर तेजी से काम चल रहा है। इसके साथ ही भारत यहां बन रहे राजनयिक संस्थान की स्थापना में भी सहयोग कर रहा है। यह संस्थान विश्व स्तर का होगा। परस्पर सहयोग के कार्यक्रमों के जरिए न सिर्फ संबंध मजबूत होंगे, बल्कि रोजगार के अवसर खुलेंगे और युवाओं के सुनहरे भविष्य का सपना पूरा हो सकेगा। दोनों देशों के बीच कौशल विकास और निवेश को बढावा देने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फलस्तीन के लोगों ने कठिन समय में चुनौतियों का बखूबी मुकाबला किया है। यहां के लोगों ने विपरीत परिस्थितियों में अपने विकास के लिए अपनी ऊर्जा और क्षमता का जिन चुनौतियों के साथ इस्तेमाल किया है वह सरहानीय है।


नरेंद्र मोदी को फिलिस्तीन की राजधानी रामल्ला पहुंचने पर प्रेसिडेंशियल हेडक्वॉर्टर अल-मुक्ता में गार्ड ऑफ आॅनर दिया गया। इसके बाद पीएम ने फिलिस्तीन के पूर्व राष्ट्रपति यासर अराफात को श्रद्धांजलि दी। मोदी ने फिलिस्तीन के प्रेसिडेंट महमूद अब्बास से मुलाकात की। मोदी को फिलिस्तीन के सबसे बड़े सम्मान ग्रेंड कॉलर से नवाजा गया। मोदी ने कहा कि फिलिस्तीन ने जो सम्मान मुझे दिया है, ये फिलिस्तीन की दोस्ती का प्रतीक है। मैं सवा सौ करोड़ भारतीयों की तरफ से इसका शुक्रिया अदा करता हूं।
मोदी ने कहा कि भारत और फिलिस्तीन के रिश्ते हमेशा से मजबूत रहे हैं। भारत की विदेश नीति में फिलिस्तीन का स्थान टॉप पर है। फिलिस्तीन के लोगों ने कठिन वक्त में जबर्दस्त साहस का परिचय दिया है। वहां अस्थिर हालात थे। वहां से आप जिन चुनौतियों से लड़कर आए हैं, वो काबिले तारीफ है।
फिलिस्तीन द्वारा दिए ग्रेंड कॉलर सर्टिफिकेट में कहा गया कि मोदी की जबर्दस्त लीडरशिप से भारत की देश और विदेश में शोहरत बढ़ी है। उनकी कोशिशों से भारत और फिलिस्तीन के ऐतिहासिक रिश्ते आगे बढ़े हैं। आजादी को सपोर्ट करने के लिए फिलिस्तीन के लोगों की तरफ से हम भारत का शुक्रिया अदा करते हैं। इसी से क्षेत्र में शांति कायम होगी।
मोदी 3 देशों की यात्रा में यूएई में मंदिर का शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा ओमान में 100 साल पुराने शिवालय में दर्शन करेंगे, साथ ही मस्जिद भी जाएंगे। मोदी इस यात्रा पर खाड़ी देशों के कई अहम समझौते करेंगे। रामल्ला दुनिया की सबसे विवादित जगह येरूशलम से महज 8 किमी. दूर है। पिछले साल अमेरिका ने येरूशलम को आधिकारिक तौर पर इजरायल की राजधानी घोषित किया था। जिसके बाद कई देशों ने अमेरिका के फैसले का विरोध किया था। भारत ने यूएन में इस मुद्दे पर फिलिस्तीन का साथ दिया था।
मोदी फिलिस्तीन जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। वह पिछले साल जुलाई में इजरायल की यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी थे। तब विदेश मामलों के जानकार कह रहे थे कि संभवत: भारत अपनी विदेश नीति बदल रहा है। इसलिए उसे अब फिलिस्तीन जैसे पुराने दोस्त की चिंता नहीं है। अब मोदी ने अपनी इस यात्रा से इस मिथक को तोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने विदेश नीति में भी सबको साध, सबका विकास फॉर्मूले को लागू किया है।
भारत का फिलीस्तीन के विकास में तीन तरफा योगदान है। पहला, राजनीतिक समर्थन, दूसरा इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास और तीसरा आर्थिक सहयोग। इजरायल-फिलीस्तीन में तनाव के बीच भारत के रिश्ते फिलिस्तीन से हमेशा अच्छे रहे हैं। 1947 में भारत ने यूएन में फिलिस्तीन के विभाजन के खिलाफ वोटिंग की थी। 1988 में फिलिस्तीन को देश का दर्जा देने वाले देशों में भारत पहले नंबर था। 1996 में भारत ने गाजा में रिप्रेंजेटेटिव ऑफिस खोला। 2003 में इसे रामल्ला भेजा और 2015 में फिलिस्तीन के ध्वज को मान्यता दी थी।

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