सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का दर्द एकबार फिर तब छलक उठा जब लखनऊ के गांधी सभागार में आयोजित सपा नेता भगवती सिंह के जन्मदिन के मौके पर उन्होंने कहा कि ऐसा वक्त आ गया है कि अब मेरा कोई सम्मान नहीं करता, लेकिन शायद मेरे मरने के बाद लोग मेरा सम्मान करेंगे. मुलायम सिंह ने कहा कि राम मनोहर लोहिया के साथ भी ऐसा ही हुआ था. एक वक्त ऐसा आ गया था जब वो भी कहा करते थे कि इस देश में जिंदा रहते कोई सम्मान नहीं करता है.
उन्होंने भगवती सिंह के संदर्भ में कहा कि समाजवादी पार्टी के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए बहुत काम किया है. उन जैसे नेताओं की कोशिशों के चलते ही पार्टी इस मुकाम तक पहुंच पाई है. उन्होंने राम मनोहर लोहिया की भी खूब प्रशंसा की.
पिछले साल पार्टी नेतृत्व को लेकर समाजवादी पार्टी के भीतर जो हंगामा हुआ था उसके बाद आपसी कलह खुलकर सामने आ गई थी. नेतृत्व को लेकर पिता और पुत्र कोर्ट तक पहुंच गए थे. आखिरकार अखिलेश को पार्टी का नेतृत्व मिला, लेकिन उस घटना के बाद से मुलायम सिंह का दर्द कई मौकों पर झलक चुका है.
अखिलेश को जब पार्टी का नेतृत्व मिला था, उस वक्त मुलायम सिंह ने कहा था कि पिता के नाते उनका आशीर्वाद हमेशा अखिलेश के साथ है और रहेगा. परन्तु वैचारिक तौर पर मैं अखिलेश के फैसलों से सहमत नहीं हूं. उस घटना के बाद से चाचा शिवपाल और अखिलेश के बीच भी काफी ज्यादा दूरियां बढ़ चुकी हैं.
पिछले दिनों शिवपाल यादव ने महागठबंधन और अखिलेश से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि अखिलेश पार्टी के अध्यक्ष हैं, इसलिए महागठबंधन को लेकर आखिरी फैसला उनका होगा. अखिलेश के साथ अपने रिश्तों पर बोलते हुए शिवपाल यादव ने कहा था कि मैं पार्टी का विधायक मात्र हूं. इसलिए पार्टी के फैसले में मेरा कोई योगदान नहीं होगा. बात अगर अखिलेश के साथ संबंधों की करें तो मैं उन्हें केवल पार्टी अध्यक्ष के रूप में देखता हूं.

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