फर्जी कंपनियों पर मोदी सरकार का बड़ा अटैक, दो लाख कंपनियों का पंजीयन रद, बैंक खाते भी सील

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काले धन के खिलाफ लड़ाई को जारी रखते हुए केंद्र सरकार ने दो लाख फर्जी कंपनियों के पंजीयन को रद कर दिया है। इन कंपनियों के बैंक खाते को भी सील कर दिया गया है और इनके निदेशकों व कुछ अन्य अधिकारियों के बारे में साफ तौर पर कहा गया है कि वे कंपनी के किसी भी संचालन में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
सरकार को शक है कि इन कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद करने का गोरखधंधा चल रहा था। वित्तीय क्षेत्र की नियामक एजेंसियों और वित्तीय खुफिया एजेंसियों की तरफ से कई महीनों की जांच पड़ताल के बाद इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। काले धन के गोरखधंधे के साथ ये कंपनियां कर चोरी के काम में भी माहिर थी।

वित्त मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि कंपनी अधिनियम की धारा 248(5) के तहत 2,09,032 कंपनियों के पंजीयन रद कर दिये गये हैं। जब तक ये कंपनियां कानूनी तौर पर नए सिरे से वैध साबित नहीं हो पाती हैं तब तक उनके बैंक खातों का भी संचालन नहीं हो सकेगा। इसके लिए कंपनियों के प्रवर्तकों या निदेशकों की तरफ से कानून सम्मत कदम उठाने होंगे। कंपनियों की सूची सरकार के वेबसाइट पर डाली गई है और बैंकों को खास तौर पर निर्देश दिया गया है कि वे इन कंपनियों के बैंक खाते पर तुरंत रोक लगाने की कार्रवाई शुरू करें और इनके साथ किसी भी तरह के लेनदेन को लेकर सावधानी बरतें।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कंपनी कार्य विभाग ने सेबी, आरबीआइ, भारतीय बैंक संघ के साथ मिलकर जांच पड़ताल की है जिसमें इन दो लाख कंपनियों के नाम सामने आये हैं। इनका पंजीयन रद करना पहला कदम है। इसके बाद इन कंपनियों और आला अधिकारियों के खिलाफ व्यापक जांच होगी।
बैंक खाते सामने आने के बाद यह पता लगाना आसान है कि इन कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और इनके बैंक खाते में जमा राशि में कोई सामंजस्य है या नहीं। सरकार को इस बात के काफी सबूत मिल हैं कि किस तरह से ये कंपनियां काले धन को खपाने का काम करती हैं। अधिकांश मामले में इनके खिलाफ टैक्स चोरी का मामला भी बनता है।

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