बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के वास्ते बंगाल का लक्ष्य कर दिया है. शाह का लक्ष्य राज्य की 42 संसदीय सीटों में से करीब-करीब आधी सीटें जीतने का है.
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपने दो दिवसीय दौरे पर बंगाल पहुंच चुके हैं. वहां पहुंचने के बाद पहले ही दिन उन्होंने राज्य के वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक भी की. इसके बाद वह कई बुद्धिजीवियों से भी मिले.
पार्टी का एजेंडा है कि दो नरेंद्र (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वामी विवेकानंद) के खूबसूरत और खुशहाल राज्य बनाए जाने के सपने को पूरा करने के लिए सारे प्रयास करने होंगे. शाह ने बंगाल से लोकसभा सीट की 50 फीसदी सीट जीतने का लक्ष्य तय किया है.
अमित शाह अपने लक्ष्य के प्रति आश्वस्त दिखते हैं और उन्होंने बगैर किसी लागलपट के तृणमूल कांग्रेस के साथ निकट भविष्य में किसी तरह के समझौता करने से इनकार कर दिया. शाह की कोशिश है कि राज्य में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाए जिससे वहां पर पकड़ बनाने में कामयाबी मिले. उन्होंने कहा, ‘तृणमूल का मूल से उन्मूलन करना है.’ शाह से मुलाकात के बाद उत्साहित दिख रहीं बीजेपी सांसद रुपा गांगुली ने कहा, ‘बंगाल में बवाल और धमाल होगा. कल की रैली का इंतजार कीजिए. मैं कह सकती हूं कि ममता बनर्जी अपने हर स्तर पर बीजेपी के पोस्टर्स को हटाने की कोशिश करेंगी, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिलेगी.’
बंगाल दौरे के पहले दिन शाह ने राज्य के कई बुद्धिजीवियों से मुलाकात भी की. इस मुलाकात पर कई बुद्धिजीवी बेहद उत्साहित नजर आए. बुद्धदेब गुहा ने कहा, ‘मैं अन्य लोगों की तरह हमेशा देश से प्यार करता हूं और देश की सेवा करता हूं. मैं बतौर हिंदू पैदा हुआ था, लेकिन अब मैं इंसानी धर्म में विश्वास करता हूं. मुझे अमित शाह को सुनने में रुचि है. मैं इससे पहले उनसे कभी नहीं मिला.’
प्रोफेसर पुरबी रॉय ने कहा कि आज का कार्यक्रम बेहद शानदार था. राजनीति ऐसा क्षेत्र है जहां पर बुद्धिजीवियों की जरूरत हमेशा रही है, और जब वे आपके साथ होते हैं तभी कोई राजनीतिक कार्यक्रम या आंदोलन कामयाब होता है.
बीजेपी अध्यक्ष ने हावड़ा में सोशल मीडिया की टीम को संबोधित करते हुए उनमें जोश भरा था और उनसे अपील की थी कि वे सोशल मीडिया के जरिए अपने स्तर पर पार्टी के संदेश को पहुंचाएं.
पिछले कुछ सालों में बंगाल की राजनीति में बीजेपी ने तेजी से अपनी पैठ बनाई है, राज्य में अपनी स्थिति और बेहतर करने के लिए पार्टी लगातार कोशिशों में जुटी है. राज्य में इस भगवा पार्टी का ग्राफ 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार बढ़ता जा रहा है.
बंगाल में बीजेपी शुरू से ही ममता बनर्जी को मुस्लिमपरस्त के तौर पर पेश करती रही है. बीजेपी आने वाले चुनाव में ममता की मुस्लिमपरस्ती की छवि को भुनाने की कोशिश में है और इसका इसका फायदा भी उसे मिल रहा है. आज स्थिति यह है कि बीजेपी सीपीएम और कांग्रेस को पीछे छोड़कर टीएमसी के बाद राज्य में दूसरे नंबर की पार्टी बन गई है. 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी ने 17 फीसदी वोटों के साथ 2 सीट हासिल करने में कामयाब रही थी. तब सीपीएम के भी दो ही सांसद जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. लेफ्ट को 2009 की तुलना में 13 सीटों का नुकसान हुआ था तो वहीं बीजेपी को एक सीट का फायदा हुआ था.
2 साल बाद 2016 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी के वोट में 6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई और पार्टी को 10 फीसदी मत मिले. चुनाव में बीजेपी के तीन विधायक जीतने में सफल रहे. जबकि उसके गठबंधन को 6 सीटें मिलीं. इससे पहले बीजेपी के एक भी विधायक राज्य में नहीं था.
कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल पंचायत चुनावों में सत्तारूढ़ टीएमसी क्लीन स्वीप करने में कामयाब जरूर रही, लेकिन बीजेपी ने सभी को चौंकाते हुए लाजवाब प्रदर्शन किया. राज्य में कुल 31,802 ग्राम पंचायत सीटों में से टीएमसी ने 20,848 पंचायत सीट हासिल की जबकि बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी और 5,657 सीटें जीतने में कामयाब रही.
साथ ही पिछले दिनों पश्चिम बंगाल की नवपाड़ा विधानसभा और उलुबेरिया लोकसभा उपचुनाव में टीएमसी ने जीत हासिल की थी. लेकिन दिलचस्प बात इन दोनों सीटों पर बीजेपी को सीपीएम से ज्यादा वोट मिले थे. सीपीएम और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए बीजेपी लगातार जिस तरह से दूसरे स्थान पर काबिज होती जा रही है.

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