पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और रियल एस्टेट सेक्टर भविष्य में GST का हिस्सा होंगे : सुशील मोदी

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फिक्की की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए बिहार के वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि GST काउंसिल निकट भविष्य में बिजली, पेट्रोलियम उत्पादों और कुछ अन्य वस्तुओं को GST के दायरे में ला सकती है।
सुशील मोदी ने कहा कि बिजली, रियल एस्टेट, स्टांप ड्यूटी और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को वस्तु एवं सेवा कर का हिस्सा होना चाहिए। जीएसटी काउंसिल का यह प्रयास होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह कब तक संभव होगा इसके लिए कोई निश्चित समय बताना थोड़ा मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि बगैर संविधान में संशोधन किए GST के दायरे में इन्हें लाया जा सकता है। पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को अगर GST के दायरे में लाया जाता है तो यह उस समय मौजूदा दरों में सबसे ऊंची टैक्स दर के अंतर्गत आएगा और राज्यों के पास अपने राजस्व की रक्षा के लिए उस पर सेस लगाने की स्वतंत्रता रहेगी। मौजूदा समय में केंद्र और राज्य सरकारों को उनके कुल राजस्व में से 40 फीसद हिस्सा पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से प्राप्त होता है।
मोदी ने यह संकेत भी दिए हैं कि कर संग्रह के स्थिर होने के बाद टैक्स स्लैब को कम किया जा सकता है। वर्तमान समय में जीएसटी के अंतर्गत 5 दरें निर्धारित हैं, 0 फीसद, 5 फीसद, 12 फीसद, 18 फीसद और वर्तमान समय में 50 उत्पादों पर 28 फीसद लागू है। इसके अलावा कुछ उत्पादों पर GST सेस भी लगाया जाता है।
कई क्षेत्रों से यह लगातार मांग की जा रही है कि पेट्रोल-डीजल और रियल एस्टेट सेक्टर को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए, लेकिन चूंकि पेट्रोल राज्यों के राजस्व का प्रमुख हिस्सा है इसलिए इस पर सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।

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