देश के पूर्व रक्षा मंत्री और समता पार्टी के संस्थापक जॉर्ज फर्नांडिस का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. जॉर्ज फर्नांडिस लम्बे समय से बीमार होने के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहाँ सुबह 7 बजे लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित तमाम बड़े नेताओं ने उनके निधन पर दुःख व्यक्त किया है.
बीमारी की वजह से लम्बे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर रहे फर्नांडिस का भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक योगदान रहा है. जॉर्ज फर्नांडिस ने हमेशा ही आगे बढ़कर नेतृत्व किया. उनकी अगुवाई में 1974 में हुई रेलवे हड़ताल को आज भी देश की सबसे बड़ी हड़ताल के रूप में देखा जाता है. उस दौरान वो ऑल इंडिया रेलवेमैन फेडरेशन के प्रमुख थे, इस हड़ताल ने केंद्र सरकार की नींद उड़ा दी थी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई बड़ी हस्तियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जॉर्ज साहब ने भारत के राजनीतिक नेतृत्व का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधित्व किया. वे निडर, ईमानदार और दूरदर्शी थे, उन्होंने हमारे देश के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दिया. वह गरीबों और हाशिए के अधिकारों के लिए सबसे प्रभावी आवाज़ों में से एक थे, उनके निधन से दुखी हूँ. प्रधानमंत्री के अलावा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर शोक व्यक्त किया. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर शोक जताया है.
बिहार सरकार ने दो दिनों के राजकीय शोक की घोषणा कर दी है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने शोक संदेश में कहा कि जॉर्ज फर्नांडिस के रूप में देश ने बड़ी राजनीतिक शख्सियत के साथ ही प्रखर वक्ता, चिंतक, विचारक और करिश्माई व्यक्तित्व को खो दिया है. जॉर्ज फर्नांडिस श्रमिक संगठन के नेता और पत्रकार रहे थे, उनके नेतृत्व में समता पार्टी का गठन किया गया था. राज्‍यपाल लालजी टंडन ने भी जॉर्ज के निधन पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है कि जार्ज फर्नांडिस सादा जीवन, उच्च विचार से प्रेरित रहे.
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि मैं कई बार जॉर्ज साहब से मिला था. वह मजदूरों के लिए हमेशा लड़ते रहे. वे वंचित लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए हमेशा आगे रहे. जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव, नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव समेत तमाम नेताओं ने शोक व्यक्त किया है. इमरजेंसी के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस काफी एक्टिव रहे थे, आपातकाल हटने के बाद वह राजनीति में कूदे और चुनाव लड़ा. उन्होंने जेल में रहते हुए ही बिहार के मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ा और जीते भी. केंद्र में जब मोरारजी देसाई की अगुवाई में सरकार बनी तो उन्हें मंत्री पद भी दिया गया. इसके बाद वीपी सिंह की सरकार में वह रेल मंत्री भी रहे.


अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनी तो जॉर्ज फर्नांडिस को रक्षा मंत्री का पद दिया गया. उन्होंने NDA के संयोजक के रूप में अहम भूमिका निभाई, बताया जाता है कि उस दौरान अगर NDA में कोई रुठता तो उन्हें मनाने का काम जॉर्ज फर्नांडिस के जिम्मे ही रहता था. 3 जून 1930 को मैंगलोर में पैदा हुए जॉर्ज फर्नांडिस नौ बार लोकसभा के सांसद रहे. अपने संसदीय जीवन में वह संसद की कई कमेटियों का हिस्सा रहे, सरकारों में कई पदों पर भी रहे. देश में जब आपातकाल था तब जार्ज फर्नांडिस पगड़ी बांध और दाढ़ी रख कर सिख भेष में घूमा करते थे. वह जेल में अपने साथ बंद लोगों को गीता के श्लोक सुनाते थे. जॉर्ज फर्नांडिस दस भाषाओं के जानकार थें, जिसमें हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, तुलु, कोंकणी आदि भाषाएं शामिल हैं.
जॉर्ज फर्नांडिस की शुरुआती छवि एक जबरदस्त विद्रोही की थी, 50 और 60 के दशक में जॉर्ज फर्नांडिस ने कई मजदूर हड़तालों और आंदोलनों का नेतृत्व किया था. 1967 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव जीता, तब तक वह देश के बड़े मजदूर नेता बन चुके थे और बंबई के गरीब उन्हें अपना हीरो मानने लगे थे. लेकिन उन्हें पूरे देश ने तब जाना जब उनके आह्वान पर 1974 में रेलवे के 15 लाख कर्मचारी हड़ताल पर चले गए. इस हड़ताल से पूरा देश थम गया था, सत्ता के खंभे हिलने लगे थे. कुछ ही वक्त बाद इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स, ट्रांसपोर्ट वर्कर्स और टैक्सी चलाने वाले भी इस हड़ताल से जुड़ गए. वे 1967 से 2004 तक 9 लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने. जनता पार्टी के टूटने के बाद उन्होंने समता पार्टी का गठन किया था, यही समता पार्टी आगे चलकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) बनी.
जॉर्ज फर्नांडीस के निधन से बिहार में शोक की लहर फैल गई, राज्य सरकार ने दो दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व रक्षा मंत्री, प्रख्यात समाजवादी और प्रखर मजदूर नेता जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने उच्च राजनीतिक मूल्यों और आदर्शों की बदौलत सार्वजनिक जीवन में उच्चस्थ शिखर को प्राप्त किया. अपने व्यक्तित्व की बदौलत राजनीतिक सीमाओं के परे सभी विचारधारा के राजनीतिक दलों का आदर और सम्मान प्राप्त किया. अपने जीवन में लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखते हुए हमेशा साम्प्रदायिक सौहार्द्र और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. मैंने अपना अभिभावक खो दिया.



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