बिहार के उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी 2019-20 के बजट की तैयारी के लिए पहली रायशुमारी नगर निकाय व पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ 17 जनवरी को पुराना सचिवालय के सभा कक्ष में करेंगे. बाद में वाणिज्य-उद्योग, कृषि, पशुपालन, सहकारिता व वानिकी तथा स्वास्थ्य व समाज कल्याण प्रक्षेत्र के प्रतिनिधियों की बैठक कर उनकी राय लेंगे.
पूर्व के वर्षों की भांति इस वर्ष भी बजट की तैयारी के लिए विभिन्न प्रक्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ रायशुमारी की शुरुआत गुरुवार से होने जा रही है. पहली रायशुमारी उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता में नगर निकाय व पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ 17 जनवरी, 2019 को करंगे. इस बैठक में आगामी बजट के लिए अपनी राय देने हेतु आठ नगर निगमों के मेयर, आठ नगर परिषद के अध्यक्ष व नगर पंचायत के आठ सभापति के साथ जिला परिषद, प्रखंड समिति व ग्राम पंचायत के बीस आमंत्रित प्रतिनिधि भाग लेंगे.
इसके अलावा तीन अलग-अलग समूहों में वाणिज्य-उद्योग, कृषि, पशुपालन, सहकारिता व वानिकी तथा स्वास्थ्य व समाज कल्याण प्रक्षेत्र के प्रतिनिधियों की बैठक कर राय ली जायेगी. ज्ञात है कि 2005 में बिहार में NDA की सरकार बनने के बाद पहली बार जनअपेक्षाओं के अनुरूप बजट की तैयारी के लिए आम लोगों से रायशुमारी के साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करने की शुरूआत की गयी थी और प्रतिवर्ष बजट पूर्व राय संग्रहित कर बजट तैयार करने में लगातार उसे अहमियत दी जाती रही है.


विधानमंडल के 11 फरवरी से शुरू होने वाले सत्र में 2019-20 का पूर्ण बजट पेश कर 4 महीने के खर्चों की लेखानुदान के जरिए अनुमति ली जायेगी. ज्ञात है कि 2004-05 का बजट आकार जहाँ 23,885 करोड़ था, वहीं 2018-19 में बढ़ कर एक लाख 76 हजार करोड़ का हो गया है. बजट 2019-20 के लिए आम लोगों से भी आगामी बीस जनवरी तक अपने सुझाव आनलाइन व आफलाइन वित विभाग की बजट शाखा को भेजने की अपील की गई है.
सुशील मोदी ने आज ट्वीट किया कि “लालू प्रसाद ने अपने शासनकाल में दलितों-पिछड़ों को रिजर्वेशन से वंचित रख कर पंचायतों-निकायों के चुनाव कराये और रिजर्वेशन में पिछड़ा-अतिपिछड़ा के वर्गीकरण का भी उन्होंने विरोध किया था. राजद जैसी मानसिकता वाले चंद दलों के विरोध के बावजूद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में भारी बहुमत से आर्थिक आधार पर गरीबों को 10 फीसद रिजर्वेशन दिलाने वाला बिल पास कराने में सफल हो गए, तब लोगों के गुस्से को भांप कर राजद अपने सवर्ण विरोधी रुख पर लीपापोती कर रहा है. दस फीसद रिजर्वेशन को लालीपॉप बताने वाले बतायें कि वे गरीबी के आधार पर क्या इससे अधिक रिजर्वेशन देने का वादा अपने घोषणापत्र में कर सकते हैं?
एक अन्य ट्वीट किया कि “राजद में जिन सीनियर समाजवादी नेताओं को परिवारवादी राजनीति के तहत किनारे लगा दिया गया है, उन्होंने परिवार की बेनामी सम्पत्ति पर भले कुछ न कहा हो, UP में सपा-बसपा गठबंधन को तो स्वार्थी बता ही रहे हैं. दूसरी तरफ राजद के राजकुमार UP में कांग्रेस को अपमानित करने वाले नेताओं को गुलदस्ते भेंट करने के बाद पटना में कांग्रेस का दही-चूड़ा खाने भी पहुंच गए.



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