स्वच्छता सर्वेक्षण में एक बार पुनः इंदौर पहले नंबर पर रहा, जो 2018 एवं 2017 में भी प्रथम था. सबसे स्वच्छ बड़ा शहर अहमदाबाद, सबसे स्वच्छ मध्यम आबादी वाला शहर उज्जैन, सबसे स्वच्छ छोटा शहर NDMC दिल्ली तथा सबसे स्वच्छ राजधानी में भोपाल पहले स्थान पर रहा.
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कुल सात कैटेगरी में पुरस्कार दिये. इसमें सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार इंदौर को, सबसे स्वच्छ बड़ा (10 लाख से ज्यादा आबादी) शहर का पुरस्कार अहमदाबाद को, सबसे स्वच्छ मध्यम आबादी (3 -10 लाख) वाले शहर का पुरस्कार उज्जैन को तथा सबसे स्वच्छ छोटा (3 लाख से कम आबादी) शहर का पुरस्कार NDMC दिल्ली को मिला.
राष्ट्रपति ने सबसे स्वच्छ राजधानी का पुरस्कार भोपाल, सबसे स्वच्छ कैंटोनमेंट का दिल्ली कैंट और सबसे स्वच्छ गंगा टाउन का पुरस्कार गौचर, उत्तराखंड को दिया. इंदौर देश की पहली फीकल मैनेजमेंट सिटी बनीं, जहाँ ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरे के पहाड़ को वैज्ञानिक तरीके से पूरी तरह खत्म कर दिया गया. वहीं गीले और सूखे कचरे की शत-प्रतिशत प्रोसेसिंग की जा रही है. शहरी विकास मंत्रालय ने 5000 अंकों के लिए 4237 शहरों में सर्वे किया है.
सबसे स्वच्छ शहरों की लिस्ट में मध्यप्रदेश के इंदौर (4659अंक) के बाद दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर, कर्नाटक का मैसूर तीसरे, मध्यप्रदेश का उज्जैन चौथे तथा पांचवें नंबर पर नयी दिल्ली (NDMC) रहा. छठे नंबर पर गुजरात का अहमदाबाद, सातवें पर महाराष्ट्र का नवी मुम्बई, आठवें पर आन्ध्र का तिरुपति, नौंवें पर गुजरात का राजकोट तथा दसवें स्थान पर मध्यप्रदेश का ही देवास (3968अंक) रहा.
छत्तीसगढ़ का भिलाई 11वें, आन्ध्र का विजयवाड़ा 12वें, UP का गाजियाबाद 13वें, गुजरात का सूरत 14वें, झारखंड का जमशेदपुर 15वें, महाराष्ट्र का कोल्हापुर 16वें, मध्यप्रदेश का खरगोन, नगदा व भोपाल क्रमशः17 से 19वें तथा 3787 अंक के साथ चंड़ीगढ़ 20वें स्थान पर रहा. महाराष्ट्र का धुले 2858 अंक लेकर सौंवे स्थान पर रहा. इस सूची में बिहार को कोई शहर नहीं है जबकि झारखंड का जमशेदपुर के अलावे राँची 46वें, धनबाद 56वें, हजारीबाग 64वें, चास 66वें तथा 95वें स्थान पर मांगो कुल 6 शहर शामिल हैं.


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