पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारत कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर पाक को दुनिया में अलग-थलग करने के साथ ही उसकी अर्थव्यवस्था पर प्रहार करने में भी जुटा है. इस क्रम में भारत के साथ ईरान भी आ गया है. ईरान ने अपने एलीट कमांडो फोर्सेज रिवाल्यूशनरी गार्ड्स पर हुए हमले के लिए पाकिस्तान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इसके लिए पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. उधर अफगानि‍स्‍तान ने UNSC में तालिबान की मदद करने और अपने देश में आतंकवाद को पनाह देने का आरोप लगाते हुए पाकिस्तान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.
ईरान के उप विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरगाची ने तेहरान में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात के बाद कहा कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है. अरगाची ने ट्वीट किया कि- “बीते कुछ दिनों में ईरान और भारत आतंकवाद की घृणित कार्रवाई का शिकार हुए हैं. इस हमले की वजह से दोनों देशों को भारी नुकसान हुआ है आज भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ मीटिंग में हमने इस क्षेत्र में आंतकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है, Enough is Enough!. “ईरान ने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्‍तान के एंबेसडर को नोटिस भी जारी किया है.
हमले में पाक स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ सामने आने के बाद भारत ने उससे MFN का दर्जा छीन लिया और पाक से आयात होने वाली चीजों पर सीमा शुल्क 200% बढ़ा दिया है. भारत पाक की इकॉनमी को दुनिया में ब्लैकलिस्ट कराने की तैयारी में है. भारत दुनिया भर में आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ काम करने वाली संस्था “फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स” (FATF) को डॉजिएर सौंप पाक को ब्लैकलिस्ट करने की मांग करने जा रहा है. FATF द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने का मतलब है कि संबंधित देश मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनैंसिंग के खिलाफ वैश्विक जंग में सहयोग नहीं कर रहा है.
FATF ने बीते जुलाई में ही पाक को ग्रे लिस्ट में शामिल करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि पाक के रवैये में सुधार नहीं हुआ तो फिर उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है. अगले ही सप्ताह FATF की सालाना मीटिंग पेरिस में होनी है. इस मीटिंग में पाक को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला भी हो सकता है. ब्लैक लिस्ट होने के बाद उसे वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ, एडीबी, यूरोपियन यूनियन जैसी संस्थाओं से कर्ज मिलना मुश्किल होगा साथ ही मूडीज, स्टैंडर्ड ऐंड पूअर और फिच जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां उसकी रेटिंग भी घटा सकती हैं.

भारत के साथ अब ईरान भी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के समूल विनाश के लिए एक साथ चलने को तैयार है. ईरान ने अपने एलीट कमांडो फोर्सेज रिवाल्यूशनरी गार्ड्स पर हुए हमले के लिए पाकिस्तान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि इसके लिए पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. ईरान के इस्फहान शहर में हुए एक आत्मघाती हमले में रिवाल्यूशनरी गार्ड्स के 27 जवानों ने जान गंवाई थी. जबकि पुलवामा में हुए आतंकी हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हुए. पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों ने अपने आकाओं के संरक्षण में दोनों देशों के 67 जवानों को शहीद कर दिया है.
अफगानि‍स्‍तान ने यूनाइटेड नेशन सिक्‍युरिटी काउंसिल (UNSC) में तालिबान की मदद करने और अपने देश में आतंकवाद को पनाह देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है. इससे पहले भी अफगानिस्‍तान पाकिस्‍तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है. भारत के दबाव का ही असर है कि सउदी अरब के प्र‍िंस मोहम्‍मद बि‍न सलमान ने पाकिस्‍तान की अपनी यात्रा छोटी कर दी है.
न्‍यूज चैनल WION ने दुबई में 20 फरवरी को होने वाली ‘ग्‍लोबल समिट : साउथ एशिया एडिशन’ में किसी भी पाकिस्‍तानी नेता को शामिल नहीं करने का फैसला लेते हुए पाकिस्‍तानी नेताओं को भेजा गया आमंत्रण वापस ले लिया है. इसमें पाकिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ, भारत में पाकिस्‍तान के पूर्व उच्‍चायुक्‍त अब्‍दुल बासित, पाकिस्‍तान के पूर्व विदेश सचिव सलमान बशीर और पाकिस्‍तानी नेता फवाद अहमद चौधरी का नाम शामिल है.
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान में अलकायदा और ISIS रिवाइव हो रहा है. ईरान के पास इन सारे ग्रुप के संदर्भ में काफी जानकारी है, उसे यह भी पता है कि इन्हें फंडिंग कंहा से हो रही है. या फिर पर्दे के पीछे कौन- कौन है? पर ईरान स्वयं पाकिस्तान के खिलाफ कोई सैन्य कारवाई नहीं करेगा.हाँलाकि ईरान में भी काफी हमले हो रहे हैं, पाकिस्तान वहां पर सुन्नी आतंकी संगठनों को लगातार एक्टिव कर रहा है. ईरान इस मामले में भारत का साथ देगा और दोनों देश एक-दूसरे के साथ खुफिया जानकारी साझा कर सकते हैं. उधर पाकिस्तान जब तक आतंकवाद के मुद्दे पर झूठ बोलता रहेगा उसकी मुश्किलें चारों ओर से बढ़ती रहेंगी. क्योंकि अब ऐसे काम नहीं चलेगा, किसी देश में आतंकवादी मौजूद हैं तो यह उसकी जिम्मेदारी है कि वो अपनी धरती का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ नहीं करने दें.


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