विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस्‍लामी सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में बतौर मुख्‍य अतिथि आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी मजहब के खिलाफ नहीं है. उन्होंने ऋग्वेद का हवाला देते हुए कहा कि भगवान एक हैं और सभी धर्मों का मतलब है शांति.
उन्‍होंने कहा कि 2019 भारत के लिए एक महत्‍वूपर्ण साल है. हम महात्‍मा गांधी की 150 वीं जयंती मना रहे हैं. OIC अपनी गोल्‍डन जुबली मनाने वाला है और OIC में पहली बार भारत को मुख्‍य अतिथि बनने का सम्‍मान मिला है. “OIC की मीटिंग में भारत को बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर न्योता भेजा गया था.”
सुषमा स्वराज ने जोर देकर कहा कि दुनिया आज आतंकवाद की समस्या से त्रस्त है और आतंकवाद ने कई जिंदगियां तबाह की हैं. उन्होंने बगैर किसी देश का नाम लिए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का भी जिक्र किया, जिससे भारत लंबे वक्त से जूझ रहा है उन्‍होंने कहा कि आतंकवाद ने कई जिंदगियां तबाह की हैं. आतंकी संगठनों की टेरर फंडिंग पर रोक लगनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद से जूझ रहा है. आतंकवाद का दंश बढ़ रहा है, दायरा बढ़ रहा है. आज आतंकवाद और अतिवाद एक नए स्तर पर है. आतंकवाद को संरक्षण और पनाह देने पर रोक लगनी ही चाहिए.
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी मजहब के खिलाफ टकराव नहीं है. धर्म को शांति का पर्याय बताते हुए उन्होंने कहा कि- ‘जिस तरह इस्लाम का मतलब शांति है, अल्लाह के 99 नामों में से किसी भी नाम का अर्थ हिंसा नहीं है, उसी तरह हर धर्म शांति के लिए हैं.’ हम ब्रुनेई से लेकर अफगानिस्‍तान तक मजबूत रिश्‍ते रखते हैं, हम कई मध्‍य एशियाई देशों से करीबी ताल्‍लुक रखते हैं. खाड़ी देश हमारे लिए व्‍यापार का बड़ा केंद्र हैं. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍था का हिस्‍सा बन रही है.
भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में हर धर्म और संस्कृति का सम्मान है, यही वजह है कि भारत के बहुत कम मुस्लिम जहरीले प्रॉपगेंडा से प्रभावित हुए. ‘भारत के लिए बहुलता को अपनाना हमेशा से आसान रहा है क्योंकि यह संस्कृति के सबसे पुराने धार्मिक ग्रंथ ऋग्वेद में भी है और मैं वहाँ से उद्धरण ले रही हूँ- “एकम सत विप्र बहुधा वधंती” अर्थात भगवान एक हैं लेकिन विद्वान लोग अलग-अलग तरह से उनका वर्णन करते हैं.’
पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बाद भी OIC ने भारत को भेजा अपना न्योता रद्द नहीं किया, जो भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है. पाकिस्तान ने OIC से भारत को दिए न्योते को रद्द करने की मांग की थी. न्योता रद्द करने के लिए पाकिस्तान की तिलमिलाहट और किस हद तक OIC के सामने गिड़गिड़ाया, यह खुद उनके विदेश मंत्री के संसद में दिए बयान से स्पष्ट है. शुक्रवार को पाक संसद में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने OIC की बैठक में न जाने का ऐलान करते हुए कहा कि कैसे वह यूएई के क्राउन प्रिंस को उनके पिता के साथ संबंधों का वास्ता देकर गुरुवार रात तक मनाते रहे, लेकिन उन्होंने पाक की नहीं सुनी. संसद में एक सांसद ने कहा कि OIC का फाउंडर मेंबर होने और इसके लिए लड़ाई लड़ने के बावजूद उसके साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है.


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