अमेरिका और भारत के बीच आतंकवाद पर जानकारी साझा करने पर सहमति बनी हैl साथ ही अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा पर भारत का साथ देने के लिए भी तैयार हुआ।
अमेरिका के सुरक्षा सलाहकार ले. जनरल एच आर मैकमास्टर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान विदेश सचिव जे एस जयशंकर और अजित डोभाल भी मौजूद रहे।
इसके पूर्व सुबह मैकमास्टर और उनके भारतीय समकक्ष अजित डोभाल के बीच लगभग दो घंटे तक आतंकवाद पर बातचीत हुईl दोनों के बीच आतंकवाद पर जानकारी साझा करने पर सहमति बनी, साथ ही अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा पर भारत का साथ देने के लिए तैयार हुआ अमेरिका के NSA मैकमास्टर ने पाकिस्तान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत और अफगानिस्तान के पड़ोसी को छद्म (प्रॉक्सी) रवैया अपनाकर अपने हितों को जारी रखने के लिए हिंसा का रास्ता अपनाने के बजाय कूटनीति का इस्तेमाल करना चाहिए। एक अफगान चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि हम सब आशा कर रहे हैं कि पाकिस्तान के नेता ये समझेंगे कि पूर्व की रणनीति के विपरीत इन आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करना उनके अपने हित में भी है।
मैकमास्टर के PM नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी मुलाकात करने की संभावना है। पिछले सप्ताह पेंटागन में अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मेटिस और डोभाल के बीच हुई बैठक के बाद पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा था कि रक्षा मंत्री जेम्स मेटिस ने भारत के साथ रक्षा संबंध को सबसे ऊपर रखा है और भारत-अमेरिका संबंध सही दिशा में हैं।
भारत के तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर से फोन पर अपनी पहली बातचीत में मेटिस ने कहा था कि वह रक्षा क्षेत्र में भारत-अमेरिका संबंध को वहां से आगे ले जाने के लिए तैयार हैं जहां उनके पूर्ववर्ती ऐशटन कार्टर द्वारा छोड़ा गया था। रक्षा समझौतों को भारत-अमेरिका संबंध में सबसे ऊपर रखते हुए ट्रंप प्रशासन ने भारत को दिये अहम रक्षा सहयोगी के दर्जे को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
उधर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अमेरिका कश्मीर मसले पर भारत और पाकिस्तान के बीच तानव को कम कर सकता है। लोधी ने वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक वर्ल्ड अफेयर्स परिषद को बताया कि इस मसले पर किसी की मध्यस्थता की दरकार है और इसके लिए अमेरिका बेहतर स्थिति में है। अमेरिका का भारत और पाकिस्तान दोनों से बेहतर रिश्ते हैं। इस तरह की भूमिका में अमेरिका की ओर से ज्यादा संतुलित नीति की जरूरत है।

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