पहली बार देश के तीनों सर्वोच्च पदों पर होंगे RSS के स्वयंसेवक

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पहली बार देश के तीन सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर RSS के स्वयंसेवक बैठने जा रहे हैं.
उपराष्ट्रपति पद के लिए केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू को उम्मीदवार बनाने का फैसला लिए जाते ही यह स्पष्ट हो गया. पिछले दिनों बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था, वो भी RSS से जुड़े रहे हैं. आंकड़ों पर गौर किया जाए तो रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना लगभग तय है.
सत्ता पक्ष का उम्मीदवार होने और लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य संख्या के आलोक में नायडू का उपराष्ट्रपति बनना भी तय नजर आ रहा है. तीन वर्ष पूर्व ही नरेंद्र मोदी जो बचपन से ही स्वयंसेवक रहे हैं. वडनगर से निकलकर देश के प्रधानमंत्री बने. इसलिए आने वाले चंद दिनों बाद देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तीनों पदों पर RSS के स्वयंसेवक विराजमान मिलेंगे.
1 जुलाई, 1949 को आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले के एक गरीब किसान परिवार में जन्मे नायडू के पास पढ़ाई तक के लिए पैसे नहीं थे. वे अपनी अल्पावस्था से ही संघ कार्यालय में ही रहते और सोते थे. नेल्लोर से ही राजनीति में स्नातक तक की पढ़ाई की. विशाखापट्टनम लॉ कॉलेज से अंतरराष्ट्रीय कानून में डिग्री ली. 14 अप्रैल, 1971 को उषा से शादी हुयी, एक बेटा हर्षवर्धन और एक बेटी दीपा है.
जय आंध्रा आंदोलन से 1972 में सुर्खियों में आए. 1974 में आंध्रा यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन का चुनाव जीता. आपातकाल के दौरान जेपी आंदोलन से जुड़े और जेल भी गए. 1977 से 1980 तक जनता पार्टी की युवा शाखा के अध्यक्ष रहे. 29 वर्ष की उम्र में 1978 में पहली बार आंध्र प्रदेश में विधायक बने और 1983 में भी विधानसभा पहुंचे. नायडू दक्षिण में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा हैं जो कभी किसी विवाद में भी नहीं रहे.

1980 से 88 तक आंध्र प्रदेश में पार्टी के महामंत्री रहे, 1988 से 93 तक प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहे. सितंबर, 1993 से 2000 तक वे नेशनल जनरल सेक्रेटरी रहे. 2002 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये गये. नायडू 1998 में कर्नाटक से राज्यसभा के लिए में चुने गए और फिर राजस्थान से 2004, 2010 और 2016 में भी राज्यसभा के सदस्य बनाये गये. 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय सम्हाला और 2014 के बाद से शहरी विकास, आवास तथा शहरी गरीबी उन्‍मूलन और संसदीय कार्य मंत्री हैं.
मोदी कैबिनेट में राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के साथ उनके नाम की चर्चा होती है. बेदाग छवि वाले नायडू को मोदी के सबसे करीबी मंत्रियों और सबसे भरोसेमंद एडवाइजर्स में से एक माना जाता है. साथ ही अपोजिशन लीडर्स से भी उनके अच्छे सम्बन्ध रहे हैं.

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