“न्यू इंडिया” का सपना सब मिलकर करेंगे साकार : राष्ट्रपति

 169 


राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि देश के लिए अपने जीवन का बलिदान कर देने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने और देश के लिए कुछ कर गुजरने की उसी भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में सतत जुटे रहने का समय है. स्वतंत्रता दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर देश के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का नैतिकता पर आधारित नीतियों और योजनाओं को लागू करने पर जोर, एकता और अनुशासन में दृढ़ विश्वास, विरासत और विज्ञान के समन्वय में आस्था, विधि के अनुसार शासन और शिक्षा को प्रोत्साहन और इन सभी के मूल में नागरिकों और सरकार के बीच साझेदारी की अवधारणा थी.
उन्होंने आगे कहा कि यही साझेदारी हमारे राष्ट्र-निर्माण का आधार रही है. नागरिक और सरकार के बीच साझेदारी, व्यक्ति और समाज के बीच साझेदारी, परिवार और एक बड़े समुदाय के बीच साझेदारी. राष्ट्र निर्माण के लिए ऐसे कर्मठ लोगों के साथ सभी को जुड़ना चाहिए, साथ ही सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लाभ हर तबके तक पहुंचे इसके लिए एकजुट हो काम करना चाहिए. इसके लिए नागरिकों और सरकार के बीच साझेदारी महत्वपूर्ण है.
राष्ट्रपति ने कहा कि आजादी केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं था, बल्कि वह एक बहुत बड़े और व्यापक बदलाव की घड़ी थी. वह हमारे समूचे देश के सपनों के साकार होने का पल था, ऐसे सपने जो हमारे पूर्वजों ने देखे थे. स्वतंत्र भारत का उनका सपना, हमारे गांव, गरीब और देश के समग्र विकास का सपना था. सरकार ने कर प्रणाली को आसान करने के लिए जीएसटी लागू किया है, प्रक्रियाओं को आसान बनाया है, लेकिन इसे अपने हर काम-काज और लेन-देन में शामिल करना और कर देने में गर्व महसूस करने की भावना को प्रसारित करना हर एक की जिम्मेदारी है.
राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी ने समाज और राष्ट्र के चरित्र निर्माण पर बल दिया था. गांधीजी ने जिन सिद्धांतों को अपनाने की बात कही थी, वे हमारे लिए आज भी प्रासंगिक हैं. राष्ट्रव्यापी सुधार और संघर्ष के इस अभियान में गांधीजी अकेले नहीं थे. नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ का आह्वान किया तो हजारों-लाखों भारतवासियों ने उनके नेतृत्व में आजादी की लड़ाई लड़ते हुए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया.


राष्ट्रपति ने कहा कि नेहरूजी ने हमें सिखाया कि भारत की सदियों पुरानी विरासतें और परंपराएं, जिन पर हमें आज भी गर्व है, उनका प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल संभव है, और वे परंपराएं आधुनिक समाज के निर्माण के प्रयासों में सहायक हो सकती हैं. सरदार पटेल ने हमें राष्ट्रीय एकता और अखंडता के महत्व के प्रति जागरूक किया, साथ ही उन्होंने यह भी समझाया कि अनुशासन-युक्त राष्ट्रीय चरित्र क्या होता है. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने संविधान के दायरे मे रहकर काम करने तथा ‘कानून के शासन’ की अनिवार्यता के विषय में समझाया. साथ ही, उन्होंने शिक्षा के बुनियादी महत्व पर भी जोर दिया.
राष्ट्रपति ने सरकार के ‘स्वच्छ भारत’ अभियान, ‘खुले में शौच से मुक्त’ कराना, इंटरनेट का सही उद्देश्य के लिए उपयोग और बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार कानून बना सकती है और कानून लागू करने की प्रक्रिया को मजबूत कर सकती है, लेकिन कानून का पालन करने वाला नागरिक बनना, कानून का पालन करने वाले समाज का निर्माण करना, हर एक की जिम्मेदारी है. सरकार पारदर्शिता पर जोर दे रही है, सरकारी नियुक्तियों और सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार समाप्त कर रही है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में अपने अंत:करण को साफ रखते हुए कार्य करना, कार्य संस्कृति को पवित्र बनाए रखना- हममें से हर एक की जिम्मेदारी है.
राष्ट्रपति ने ‘न्यू इंडिया’ को भेदभाव विहीन बनाने का देशवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि यह एक ऐसा समाज होना चाहिए, जो भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने के साथ-साथ संवेदनशील भी हो, जिसमें कोई भेदभाव न हो. ‘न्यू इंडिया’ समग्र मानवतावादी मूल्यों को समाहित करे, क्योंकि यही मानवीय मूल्य देश की संस्कृति की पहचान हैं. 2022 में देश अपनी आजादी के 75 साल पूरे करेगा. ‘न्यू इंडिया’ के लिए कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करने का ‘राष्ट्रीय संकल्प’ है- जैसे हर परिवार के लिए घर, मांग के मुताबिक बिजली, बेहतर सड़कें और संचार के माध्यम, आधुनिक रेल नेटवर्क, तेज और सतत विकास.
राष्ट्रपति ने कहा कि हमें एक ऐसा संवेदनशील समाज बनाना है जहां पारंपरिक रूप से वंचित लोग, चाहे वे अनुसूचित जाति के हों, जनजाति के हों या पिछड़े वर्ग के हों, देश के विकास प्रक्रिया में सहभागी बनें. एक ऐसा संवेदनशील समाज, जो उन सभी लोगों को अपने भाइयों और बहनों की तरह गले लगाए, जो देश के सीमांत प्रदेशों में रहते हैं, और कभी-कभी खुद को देश से कटा हुआ सा महसूस करते हैं. एक ऐसा संवेदनशील समाज, जहां अभावग्रस्त बच्चे, बुजुर्ग और बीमार वरिष्ठ नागरिक, और गरीब लोग, हमेशा हमारे विचारों के केंद्र में रहें. अपने दिव्यांग भाई-बहनों पर हम विशेष ध्यान देते हुए जीवन के हर क्षेत्र में अन्य नागरिकों की तरह उन्हें आगे बढ़ने के अधिक से अधिक अवसर दे सकें. एक ऐसा संवेदनशील और समानता पर आधारित समाज, जहां बेटा-बेटी में कोई भेदभाव न हो, धर्म के आधार पर कोई भेदभाव न हो.

राष्ट्रपति ने कहा कि नोटबंदी के समय जिस तरह आपने असीम धैर्य का परिचय देते हुए कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया, वह एक जिम्मेदार और संवेदनशील समाज का ही प्रतिबिंब है. नोटबंदी के बाद से देश में ईमानदारी की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला है. ईमानदारी की भावना दिन-प्रतिदिन और मजबूत हो, इसके लिए हमें लगातार प्रयास करते रहना होगा. आधुनिक प्रौद्योगिकी को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल में लाने की आवश्यकता है. हमें अपने देशवासियों को सशक्त बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रयोग करना ही होगा, ताकि एक ही पीढ़ी के दौरान गरीबी को मिटाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके. ‘न्यू इंडिया’ में गरीबी के लिए कोई गुंजाइश नहीं है.
राष्ट्रपति ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को सम्मान से देखती है. जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं, आपसी टकराव, मानवीय संकटों और आतंकवाद जैसी कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में विश्व पटल पर भारत अहम भूमिका निभा रहा है. प्रधानमंत्री की अपील पर स्वेच्छा से एलपीजी पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने वाले एक करोड़ से अधिक परिवारों की चर्चा करते हुए कहा कि ‘मैं सब्सिडी का त्याग करने वाले ऐसे परिवारों को नमन करता हूं’. उन परिवारों ने ऐसा इसलिए किया, ताकि एक गरीब के परिवार की रसोई तक गैस सिलेंडर पहुंच सके और उस परिवार की बहू-बेटियां मिट्टी के चूल्हे के धुंए से होने वाली आंख और फेफड़े की बीमारियों से बच सकें. उन्होंने जो किया, वह किसी कानून या सरकारी आदेश का पालन नहीं था. उनके इस फैसले के पीछे उनके अंतर्मन की आवाज थी.
राष्ट्रपति के तौर पर 20 दिन पूर्व 25 जुलाई को कोविंदजी ने देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी, के आर नारायणन के बाद वो देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति हैं. कोविंद देश के पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं जो RSS की पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं. राष्ट्रपति बनने से पहले वह बिहार के राज्यपाल के पद पर आसीन थे. 1977 में आप प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के प्रधान सचिव भी रह चुके हैं.

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें

loading…


Loading…



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *