नौसेना की ताकत बढ़ाने आया फॉस्ट अटैक पोत ‘INS तरासा’, करेगा समंदर की निगरानी

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26/11 जैसे हमलों से बचने के लिए समुद्र सीमाओं की निगरानी भारत के लिए बहुत जरूरी हो गई है। ऐसे में भारतीय नौसेना को तेजी से हमला और बचाव करने के लिए एक खास पोत की जरूरत थी, जो आज INS तरासा के जलावतरण के साथ पूरी हो गई। 3 वाटर जेट से लैस अटैक क्राफ्ट INS तरासा को आज समुद्री निगरानी के लिए नौसेना में शामिल कर लिया गया।
वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा ने इस पोत को आधिकारिक तौर पर नेवी में शामिल किया। फिलहाल इस पोत की तैनाती मुंबई में की गई है। INS तरासा को उसका नाम अंडमान-निकोबार के एक टापू पर दिया गया है।

नौसेना अधिकारियों के मुताबिक, कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड द्वारा तैयार किए गए इस गश्ती पोत के जरिए अवैध तरीके से सीमा में प्रवेश करने वालों की बारीकी से निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा मानवीय सहायता और आपदा की स्थिति में भी यह पोत काम आएगा। एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय नौसेना में ऐसे 3 पोत पहले ही शामिल किए जा चुके हैं। INS तारमुगली, INS तिहायु और INS तिल्लनचांग पहले से भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
आपको बता दें कि INS तारमुगली को पिछले साल मई में, INS तिहायु को पिछले साल अक्टूबर में INS तिल्लनचांग को इस साल मार्च में नौसेना में शामिल किया गया था। INS तारमुगली और INS तिहायु को विशाखापट्टनम में तैनात किया गया है, जबकि INS तिल्लनचांग को कारवार में तैनात किया गया है। खास बात यह है कि नौसेना में ‘INS तरासा’ के नाम से यह दूसरा पोत है। इस नाम का पहला पोत 1999 से 2014 तक नौसेना का हिस्सा रह चुका है, लेकिन बाद में उसे सेशेल्स तटरक्षक बल को उपहार में दे दिया गया था।
क्या है खास : 50 मीटर लंबाई वाले INS तरासा में तीन वॉटर जेट लगे हैं जो इसे 35 नॉट (65 किमी प्रति घंटा) की अधिकतम रफ्तार प्रदान करते हैं। इसकी मुख्य गन 30 मिमी (स्वदेशी) की है। इसके अलावा इसमें कई हल्की, मध्यम और भारी मशीनगन भी लगी हैं। इस पोत की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर प्रवीण कुमार संभाल रहे हैं।

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