नेताओं की बेतहाशा बढ़ती संपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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सांसद/ विधायक बनने के बाद जिन नेताओं की संपत्ति में आश्चर्यजनक रूप से बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है, उस पर अपनी नजर टेढ़ी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। रिपोर्ट में केंद्र को यह बताना होगा कि इस मामले में उसने अभी तक क्या ऐक्शन उठाए हैं या उसकी जांच कहां तक पहुंची है।
ऐसे मामलों करीब 289 नेताओं के नाम शामिल हैं और इसमें हर राजनीतिक दल का कोई न कोई नेता है। कुछ मामले तो ऐसे भी हैं, जिनमें इनकी संपत्ति में पिछले पांच साल में 500 प्रतिशत तक का उछाल आया है। नेताओं की बेतहाशा बढ़ रही संपत्ति अक्सर ही विवाद का विषय रही है, लेकिन इस पर कुछ सांसदों का यह भी तर्क होता है कि उनकी प्रॉपर्टी का मूल्यांकन वर्तमान बाजार मूल्य से किया जाता है और इसके अलावा व्यापार से प्राप्त आय के चलते उनकी संपत्ति में इतना उछाल आया है। कोर्ट चाहता है कि इसकी हर स्तर पर जांच होनी चाहिए। इससे स्पष्ट हो सके कि नेताओं की आय में हुई वृद्धि कानूनी तौर पर सही है या नहीं।
जस्टिस जे. चेलामेश्वर और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की बेंच ने कहा कि इस मामले में आय का स्रोत जानने के लिए जांच जरूरी है और यह भी पता लगाना जरूरी है कि प्रॉपर्टी का जो आकलन किया गया है वह कानूनी तौर पर कितना सही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। एनजीओ ने कोर्ट से अपील की है कि इलेक्शन के दौरान ऐफिडेविट में सोर्स ऑफ इनकम का कॉलम जोड़ा जाए, ताकि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों का सोर्स ऑफ इनकम पता चल सके।


सरकार की ओर से इस मामले में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी। कोर्ट ने कहा कि CBDT द्वारा सौंपे गए हलफनामे में दी गई सूचना अधूरी थी, ऐसा लगता है जैसे केंद्र इस मामले में सूचना बांटने में कुछ अनिच्छुक दिख रहा है। कोर्ट ने कहा कि CBDT के हलफनामे में सूचना अधूरी है। क्या यह भारत सरकार का रुख है?’ कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक हफ्ते के भीतर कोर्ट को विस्तृत हलफनामा सौंपे।
केंद्र की ओर से इस मामले में वरिष्ठ वकील के. राधाकृष्णन पेश हुए, उन्होंने कोर्ट को बताया कि ऐसे मामले में शामिल जो लोग चुनाव लड़ रहे हैं, उन पर जांच चल रही है। किसी वर्ग को ध्यान में रखकर ऐसा नहीं किया गया, लेकिन जिन मामलों में छानबीन जरूरी लगी उन्हें जांच के अंतर्गत लाया गया। इस पर कोर्ट ने पूछा कि आपने अब तक क्या किया है? जब सरकार कह रही है कि वह कुछ सुधार के खिलाफ नहीं है। जरूरी सूचना अदालत के रेकॉर्ड में होनी चाहिए। अदालत ने सरकार से इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दायर करने को कहा है।

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