सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि निर्भयाकांड में जिस बर्बरता के साथ अपराध हुआ उसे माफ नहीं किया जा सकता। चारों दोषियों ने फांसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने फास्ट ट्रैक सुनवाई के बाद 27 मार्च को फैसला सुरक्षित रखा था। आज पांच मई 2017 को दोपहर 2.03 बजे सुप्रीम कोर्ट के तीनों जज जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस भानुमति कोर्ट में आए। जस्टिस मिश्रा और जस्टिस भूषण ने हर चीज को रिकॉर्ड में लिया।
कोर्ट ने कहा कि जिस बर्बरतापूर्ण तरीके से घटना को अंजाम दिया गया, उस लिहाज से हाईकोर्ट का फैसला सही था। रहम की गुंजाइश नहीं है। घटना समाज को हिला देने वाली थी। घटना को देखकर लगता है कि ये धरती की नहीं बल्कि किसी और ग्रह की है। दोषियों ने पीड़िता को बस से कुचलकर मारने की कोशिश भी की। बाद में सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई। लोगों को तभी भरोसा आएगा जब इसी तरह से फैसला हो। फैसले के बाद कोर्टरूम में तालियां भी बजीं।
16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में 6 आरोपियों ने चलती बस में निर्भया के साथ गैंगरेप किया था। उसे बस से फेंक दिया था। बाद में इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई थी। निर्भया की मां ने कहा था कि मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, दोषियों को सुप्रीम कोर्ट भी फांसी की सजा सुनाएगा और मेरी बेटी को न्याय देगा। निर्भया के पिता ने कहा था कि दोषियों को फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए। कोर्ट तो क्या, उन्हें भगवान भी माफ नहीं करेगा।
ट्रायल कोर्ट ने मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा था। चारों दोषियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के फांसी के ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था।
16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली में पैरा मेडिकल की स्टूडेंट 23 साल की निर्भया अपने दोस्त के साथ मूवी देखकर एक बस में लौट रही थी। बस में मौजूद 6 बदमाशों ने निर्भया से बर्बरता के साथ चलती बस में गैंगरेप किया था। बाद में उसे और उसके दोस्त को रास्ते में फेंक दिया था। 13 दिन बाद इलाज के दौरान सिंगापुर में निर्भया की मौत हो गई थी। देशभर में इस घटना का जमकर विरोध हुआ था।
घटना के वक्त जुवेनाइल रहे एक आरोपी को सुधार गृह भेजा गया था। 3 साल सजा काटने के बाद वह पिछले साल दिसंबर में रिहा हो गया। एक दोषी राम सिंह ने तिहाड़ में फांसी लगा ली थी, शेष चार को फांसी की सजा सुनाई गई है।
निर्भया मामले में 18 दिसंबर 2012 को राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को गिरफ़्तार किया गयाl 21 दिसंबर को मामले में एक नाबालिग को दिल्ली से और छठे अभियुक्त अक्षय ठाकुर को बिहार से गिरफ़्तार किया गयाl 3 जनवरी, 2013 को पुलिस ने पांच बालिग अभियुक्तों के ख़िलाफ़ हत्या, गैंगरेप, हत्या की कोशिश, अपहरण, डकैती आदि आरोपों के तहत चार्जशीट दाख़िल किया और 17 जनवरी 2013 को फ़ास्ट ट्रैक अदालत ने पांचों अभियुक्तों पर आरोप तय कर दियाl 11 मार्च 2013 को राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर लीl 31 अक्टूबर 2013 को जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को गैंगरेप और हत्या का दोषी मान उसे प्रोबेशन होम में तीन साल गुज़ारने का फ़ैसला सुनायाl 10 सितंबर 2013 को फ़ास्ट ट्रैक अदालत ने चारों को 13 अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए सज़ा-ए-मौत की सज़ा सुनाईl 13 मार्च 2014 को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी चारों दोषियों की मौत की सज़ा को बरक़रार रखाl दोषियों की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2014 में चारों की फांसी पर रोक लगायी।
गैंगरेप के दोषियों की मानसिकता कितनी गन्दी थी, इसका अंदाजा एक रेपिस्ट मुकेश सिंह के उस बयान से लगाया जा सकता है, जिसमें उसने एक डॉक्युमेंट्री में कहा था कि ‘अगर रात में लड़कियां निकलेंगी तो इस तरह की घटनाएं होंगी। रेप के लिए आदमी से ज्यादा वह जिम्मेदार होगी।
पिछले साल बीबीसी की डॉक्युमेंट्री ‘इंडियाज डॉटर’ को दिए इंटरव्यू में मुकेश बोला था कि आप एक हाथ से ताली नहीं बजा सकते। कोई भी शरीफ लड़की रात में नौ बजे घर के बाहर नहीं घूमेगी। उस हालत में एक लड़की रेप के लिए लड़के से कहीं ज्यादा जिम्मेदार होती है। लड़के और लड़की एक नहीं हो सकते। घर का काम और घर में रहना लड़कियों का काम है, वे रात में बार, डिस्को कैसे जा सकती हैं? भद्दे कपड़े पहन कर गलत काम करती हैं। केवल 20 पर्सेंट लड़कियां ही अच्छी होती हैं।

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