नियोजित शिक्षकों की बड़ी जीत: समान काम के लिए समान वेतन की मांग सही : पटना हाईकोर्ट

 89 


पटना हाइकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अब समान काम के लिए समान वेतन लागू होगा. पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि समान कार्य के लिए सरकार द्वारा समान वेतन नहीं देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है.
नियोजित शिक्षकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को उनके पक्ष में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि समान काम के लिए समान वेतन की मांग सही है. खंडपीठ ने फैसले में कहा कि समान कार्य के लिए सरकार द्वारा समान वेतन नहीं देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और जस्टिस डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.
नियोजित शिक्षकों की ओर से वरीय अधिवक्ताओं राजेंद्र प्रसाद सिंह, पीके शाही, विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा ने शिक्षकों को मिल रहे वेतन में भेदभाव का आरोप लगाया. वहीं, सरकार की ओर से अदालत में पेश महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति सरकार नहीं करती है, इसलिए समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत नियोजित शिक्षकों पर लागू नहीं होगा.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया था कि सूबे के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षिकों से समान कार्य तो लिया जा रहा है, लेकिन वेतन समान नहीं दिया जा रहा है. नियोजित शिक्षकों का वेतन विद्यालय में कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों से भी कम है.
समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर बिहार में नियोजित शिक्षक लंबी लड़ाई लड़ रहे थे, वे काफी दिनों से आंदोलनरत थे. उन्होंने मैट्रिक व इंटरमीडिएट की कॉपी का मूल्यांकन करने से भी इंकार कर दिया था. नियोजित शिक्षकों ने अपनी मांगों के समर्थन में पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हाईकोर्ट के फैसले का शिक्षक संघों ने स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत करार दिया है.
समान काम के लिए समान वेतन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी थी कि सरकार इस नीति पर विचार करे और आज पटना हाइकोर्ट ने इसपर अपनी मुहर लगा दी. समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर पटना हाइकोर्ट में कुल याचिकायें दायर थीं.

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें

loading...


Loading...





Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *