नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को उम्रकैद, बाकी दो को 20-20 वर्ष

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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी आसाराम को उम्रकैद और अन्य दो आरोपियों को 20-20 साल कैद की सजा सुनाई गई. इस मामले में जोधपुर कोर्ट के जस्टिस मधुसूदन शर्मा ने जोधपुर जेल में अपना फैसला सुनाते हुए आसाराम समेत 3 लोगों को दोषी करार दिया था जबकि अन्य दो आरोपियों को बरी कर दिया था.
जोधपुर कोर्ट ने सुरक्षा कारणों से सेंट्रल जेल परिसर में ही फैसला सुनाने का निर्णय किया था. अासाराम के अलावा सह अारोपी शरतचंद्र और शिल्पी को भी दोषी करार दिया. वहीं शिवा और प्रकाश को बरी किया. फैसले के मद्देनजर केंद्र सरकार ने दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा को सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश दिए हैं.
अदालत का फैसला आने के बाद आसाराम व उसके पुत्र नारायण साईं के खिलाफ चल रहे केसों में अहम गवाह पानीपत के गांव सनौली निवासी महेंद्र चावला ने अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है. आसाराम को दोषी ठहराए जाने से पहले उन्होंने कहा कि मैं न्यायपालिका पर भरोसा करता हूं और मुझे विश्वास है कि आसाराम को दोषी ठहराया जाएगा. मैं न्यायपालिका से अनुरोध करता हूं कि ऐसे दुष्कर्मियों को फांसी दी जानी चाहिए. हालांकि मेरे पास सुरक्षा है लेकिन मैं अतिरिक्त सुरक्षा के लिए केंद्र से अनुरोध करता हूं. अन्य गवाहों की तरह मेरा जीवन लगातार खतरे में है.


आसाराम पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पीड़िता छिंदवाड़ा आश्रम के कन्या छात्रावास में 12वीं कक्षा में पढ़ती थी. पीड़िता के पिता के पास 7 अगस्त,2013 को छिंदवाड़ा आश्रम से फोन आया कि उनकी बेटी बीमार है. पिता के वहां पहुंचने पर बताया गया कि उनकी बेटी को सिर्फ आसाराम ही ठीक कर सकते हैं. तब पीड़िता के माता-पिता अपनी बेटी के साथ 14 अगस्त को आसाराम से मिलने जोधपुर आश्रम में पहुंचे. अगले दिन 15 अगस्त को आसाराम ने 16 साल की पीड़िता को अपनी कुटिया में बुलाया और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया.
पीड़िता ने दिल्ली जाकर 20 अगस्त, 2013 को कमला नगर पुलिस थाने में रात 2 बजे एफआइआर दर्ज कराई थी क्योंकि आसाराम ने उसे धमकाया था. वहां से केस जोधपुर रेफर किया गया था. जांच के बाद आसाराम को जोधपुर पुलिस ने पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट की धारायों में 31 अगस्त, 2013 की आधी रात इंदौर स्थित आश्रम से गिरफ्तार किया था और तब से वह जोधपुर जेल में बंद है. सजा के बाद आसाराम को जेल में कैदी नंबर 130 मिला है.
फैसले के बाद पीड़िता के घर पर पांच पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. पीड़िता के घर के बाहर सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जा रही है. केंद्र सरकार ने फैसला सुनाए जाने से पहले ही राजस्थान, गुजरात और हरियाणा को सुरक्षा कड़ी करने और अतिरिक्त बल तैनात करने को कहा. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक संदेश जारी कर तीनों राज्यों से सुरक्षा मजबूत करने के साथ ही यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया है कि अदालत के आदेश के बाद कोई हिंसा नहीं फैले. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जोधपुर में दो दिन पहले से ही धारा 144 लगा दी गई तथा पुलिस तमाम होटलों और धर्मशालाओं की सघन जांच की. जोधपुर छावनी में तब्दील कर दिया गया.

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